हरियाणा: सरकारी प्रॉपर्टी के किरायेदारों को मिलेगा मालिकाना हक

इस योजना के तहत नगर निगम, नगरपालिका व नगर परिषद की जमीन के उन किरायेदारों व कब्जाधारियों को मालिकाना हक देने का कानून था, जिन्हें संबंधित प्रॉपर्टी पर बैठे 20 साल या इससे अधिक समय हो चुका है।

Haryana: Tenants of government property will get ownership rights

हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार चुनावी मोड में आ गई है। प्रदेश सरकार के हर फैसले में इसकी झलक नजर आ रही है। ताजा फैसले में मनोहर सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों- नगर निगम, नगर परिषद व नगरपालिका की प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक देने के लिए 'शहरी स्वामित्व' योजना का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अभी तक इस योजना के तहत नगर निगम, नगरपालिका व नगर परिषद की जमीन के उन किरायेदारों व कब्जाधारियों को मालिकाना हक देने का कानून था, जिन्हें संबंधित प्रॉपर्टी पर बैठे 20 साल या इससे अधिक समय हो चुका है।

ऐसे लोगों को कलेक्टर रेट के हिसाब से पैसा सरकार को देना है और इसके बदले वे जमीन के मालिक बन जाएंगे। इतना ही नहीं, 20 साल से 50 साल तक पुराने किरायेदारों के लिए कलेक्टर रेट में भी 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट के नियम बने हुए हैं। 25 साल तक काबिज व्यक्ति को कलेक्टर रेट का 75 प्रतिशत, 30 साल तक 70 प्रतिशत, 35 साल तक 65 प्रतिशत, 40 साल तक 60 प्रतिशत, 45 साल तक 55 प्रतिशत और 50 साल तक 50 प्रतिशत का भुगतान करने पर मालिकाना हक दिये जाने का प्रावधान है।

अब सरकार ने शहरी स्वामित्व योजना को शहरों में पड़ी सभी सरकारी विभागों व बोर्ड-निगमों की प्रॉपर्टी पर लागू करने का निर्णय लिया है। शहरों में पालिकाओं के अलावा स्कूल-कॉलेजों, पब्लिक हेल्थ, परिवहन विभाग, बिजली विभाग, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, सहित कई विभागों की जमीनों पर किरायेदार हैं। इन्हें शहरी स्वामित्व योजना की तर्ज पर मालिकाना हक देने की योजना है।

सरकार ने सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों व विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले 15 दिनों में इसकी कार्ययोजना तैयार करें। फिर सीएमओ इसका अध्ययन करेगा। वित्त विभाग भी राय देगा। फिर प्रारूप को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा जहां से पास होने के बाद शहरी स्वामित्व योजना से जुड़े कानून में बदलाव होगा। माना जा रहा है कि आगामी मार्च में प्रस्तावित बजट सत्र के दौरान इससे जुड़ा विधेयक भी विधानसभा में पेश किया जा सकता है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने योजना के विस्तार को लेकर बृहस्पतिवार को विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों के साथ बैठक भी की। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अन्य विभागों के लिए प्रारूप शहरी स्थानीय निकाय विभाग ही तैयार करे। संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिवों से टिप्पणियां मांगी जाएंगी।

इसलिए किया योजना में विस्तार

दरअसल, सरकारी विभागों की जमीन पर बैठे लोगों से जमीन को खाली करवा पाना अब कानूनन संभव नहीं है। किराया भी काफी कम आ रहा है। ऐसे में सरकार ने मालिकाना हक देने का रास्ता निकाला है। इससे विभागों के पास पैसा आएगा और जमीनों के विवाद भी खत्म होंगे। अदालतों में बड़ी संख्या में केस चल रहे हैं। यह निर्णय इसलिए भी लिया है ताकि निकायों के अलावा अन्य विभागों की जमीन पर भी मालिकाना हक देने के लिए प्रदेशभर में एकरूपता लाई जा सके।

1730 को मिल चुके लेटर ऑफ इंटेंट

मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के पहले चरण के दौरान लगभग 7 हजार आवेदन आए थे। 1730 आवेदकों को लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी हो चुके हैं। कुल 1100 आवेदन रद्द हुए हैं। 1130 आवेदन ऐसे पाये गए, जिनमें भूमि अन्य विभागों से संबंधित है।

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