हरियाणा के पहले सोलर विलेज बनेंगे डिप्टी सीएम चौटाला और पंचायत मंत्री बबली के दो गांव
हरियाणा के पहले सोलर विलेज बनेंगे डिप्टी सीएम चौटाला और पंचायत मंत्री बबली के दो गांव
हिसार। हरियाणा सरकार सोलर ऊर्जा के ऊपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है। सरकार की ओर से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल गांव गांव तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में हरियाणा के दो गांव पूरी तरह सोलर एनर्जी पर निर्भर होकर पहले सोलर विलेज बन गए हैं।

हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और विकास व पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के विधानसभा क्षेत्र के दो गांव सोलर विलेज बनने जा रहे हैं। बिजली के मामले में यह दोनों गांव आत्मनिर्भर होंगे। इन दोनों गांवों के हर घर, चौपाल व सरकारी संस्थाओं में सूर्य से पैदा होने वाली बिजली जलेगी। गांव के लोग अपनी जरूरत की बिजली इस्तेमाल करने के बाद यदि बचाएंगे भी तो वह प्रदेश सरकार खरीद लेगी। इसके लिए बाकायदा तकनीकी सिस्टम खड़ा किया जाएगा।
हरियाणा सरकार की योजना पंंचायतों व शहरी निकायों की गलियों की लाइट भी सौर ऊर्जा पर लाने की है। इस दिशा में काम आरंभ कर दिया गया है। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की उचाना विधानसभा का गांव गुरुकुल खेड़ा और पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली की विधानसभा टोहाना का गांव बिढ़ाई खेड़ा सोलर विलेज बनने की ओर अग्रसर हैं।
विकास व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली तो चाहते थे कि प्रदेश के समस्त गांवों को सोलर विलेज बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने प्रस्ताव भी तैयार करा लिया था, लेकिन अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी कि पहले पायलट प्रोजेक्ट पर काम करना उचित रहेगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने देवेंद्र बबली के प्रयासों की सराहना की और कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद पूरे प्रदेश के गांवों को सौर ऊर्जा पर लाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ने को तैयार है। हरियाणा के बिजली निगमों के चेयरमैन पीके दास ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के अपने-अपने क्षेत्र के गांवों को सोलर विलेज बनाने के प्रयासों को सराहा है। उनके इस प्रयास से राज्य के बाकी मंत्रियों, सांसदों व विधायकों को भी अपने-अपने गांवों को सौर ऊर्जा पर लाने की प्रेरणा मिलेगी। पीके दास का कहना है कि हरियाणा में चूंकि जमीन काफी उपजाऊ है और महंगी है, इसलिए हम यहां अपने खुद के बड़े सोलर प्लांट नहीं लगा सकते।
प्रदेश सरकार राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से सोलर पावर की खरीद करेगी। इसके अलावा, सोलर गांव विकसित करने का यह फायदा होगा कि लोग अपने खुद के प्लांट लगाएंगे। उन्हें रियायत मिलेगी। एक कनाल के प्लाट में सोलर प्लांट लगाना अनिवार्य है। बाकी लोगों को भी मनाही नहीं होगी।












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