किसानों के लिए आई खुशखबरी: हरियाणा में अब इस योजना से बागवानी फसलों के नुकसानों की होगी भरपाई
किसानों के लिए आई खुशखबरी,
चंडीगढ़। हरियाणा में बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (एमबीबीवाई) के कार्यान्वयन को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30 हजार रुपये और फल फसलों की 40 हजार रुपये की बीमा राशि के विरूद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानी क्रमश: 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे। मुआवजे के लिए सर्वेक्षण और नुकसान की चार श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत होंगी। यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी।

बागवानी करने वालों के लिए खुशखबरी
जनसंपर्क एवं सूचना विभाग ने बताया कि, हरियाणा सरकार ने बागवानी किसानों को खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (एमबीबीवाई) के कार्यान्वयन को स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के तहत कुल 21 सब्जियों, फलों और मसाला फसलों को कवर किया जाएगा। एक सरकारी प्रवक्ता नेजानकारी देते हुए बताया कि इस योजना को बागवानी फसल आश्वासन योजना के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ज्यादा जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।

क्या क्या देगी सरकार?
बागवानी किसानों को विभिन्न कारकों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है जिनमें फसलों में अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण जैसे जैविक कारक और बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे प्राकृतिक कारक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30 हजार रुपये और फल फसलों की 40 हजार रुपये की बीमा राशि के विरूद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानी क्रमश: 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे। मुआवजे के लिए सर्वेक्षण और नुकसान की चार श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत होंगी।

यह योजना वैकल्पिक होगी
यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी। प्रवक्ता ने बताया कि किसानों को मेरी फसल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करते समय इस योजना का विकल्प चुनना होगा। मौसमवार फसल पंजीकरण की अवधि समय-समय पर निर्धारित एवं अधिसूचित की जाएगी। यह योजना व्यक्तिगत क्षेत्र पर लागू की जाएगी अर्थात फसल हानि का आकलन व्यक्तिगत क्षेत्र स्तर पर किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए बजट का भी प्रावधान किया जाएगा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां राज्य एवं जिला स्तर पर निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी।












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