कौन थे IAS धनेंद्र? जिनकी दिल्ली AC ब्लास्ट में हुई मौत, CCI के पहले चेयरमैन,PMO से वर्ल्ड बैंक तक था दबदबा
IAS Dhanendra Kumar Profile: दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास एन्क्लेव में हुए दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक जगत को झकझोर दिया। 27 मई देर रात एसी की इंडोर यूनिट में धमाके के बाद घर में आग लग गई, जिसमें 80 वर्षीय रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई। हादसे में उनका बेटा भी घायल हुआ है, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस के मुताबिक धुएं के कारण दम घुटने से उनकी जान गई।
लेकिन इस हादसे के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर धनेंद्र कुमार कौन थे, जिनका नाम भारतीय प्रशासनिक सेवा से लेकर वर्ल्ड बैंक और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) तक बड़े सम्मान से लिया जाता था।

🔷Who is IAS Dhanendra Kumar: कौन हैं धनेंद्र कुमार?
धनेंद्र कुमार उन चुनिंदा अफसरों में गिने जाते थे जिन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वे 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी थे और हरियाणा कैडर से जुड़े थे। उन्होंने 1967 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की थी। उस दौर में IAS बनना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में माना जाता था और धनेंद्र कुमार ने यह मुकाम शानदार अकादमिक रिकॉर्ड के साथ हासिल किया था।
Dhanendra Kumar Education: धनेंद्र कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले थे। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने यूपी बोर्ड से की। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी ऑनर्स में प्रथम श्रेणी हासिल की। यहीं नहीं उन्होंने एमएससी भी फर्स्ट क्लास और हाई रैंक के साथ पूरी की। पढ़ाई में तेज होने के कारण वे शुरुआत से ही प्रशासनिक सेवा की तैयारी की ओर बढ़े और आखिरकार IAS अधिकारी बने।
🔷हरियाणा से दिल्ली तक कई बड़े पद संभाले
अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार दोनों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। करनाल और जींद जैसे जिलों में वे डिप्टी कमिश्नर रहे। हरियाणा सरकार में उन्होंने श्रम आयुक्त, उद्योग निदेशक और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
बाद में वे हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भी बने। राज्य के औद्योगिक विकास में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। खासतौर पर इंडस्ट्रियल पार्क्स और औद्योगिक ढांचे के विस्तार में उनके काम की काफी सराहना हुई।
🔷लंदन में भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी, वर्ल्ड बैंक में भारत का प्रतिनिधित्व
धनेंद्र कुमार का करियर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लंदन स्थित इंडियन इन्वेस्टमेंट सेंटर में रेजिडेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया। विदेशी निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मामलों में उनकी समझ काफी मजबूत मानी जाती थी। यही वजह थी कि बाद में उन्हें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।
नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वे वर्ल्ड बैंक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया से जुड़े आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक परियोजनाओं पर काम किया। वर्ल्ड बैंक जैसी वैश्विक संस्था में यह जिम्मेदारी किसी भी भारतीय अफसर के लिए बेहद प्रतिष्ठित मानी जाती है। उनके कार्यकाल में कई क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं को गति मिली और आर्थिक नीतियों पर भारत की भूमिका मजबूत हुई।
🔷CCI के पहले चेयरमैन बने
- धनेंद्र कुमार को सबसे ज्यादा पहचान भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी Competition Commission of India (CCI) के पहले चेयरमैन के रूप में मिली। फरवरी 2009 में उन्हें इस संस्था की कमान सौंपी गई और जून 2011 तक वे इस पद पर रहे। यह वही संस्था है जो बाजार में बड़ी कंपनियों के एकाधिकार और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर नजर रखती है।
- उनके कार्यकाल में भारत में प्रतिस्पर्धा कानून को लागू करने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि बड़ी कंपनियां छोटे कारोबारियों को नुकसान न पहुंचा सकें।
- केंद्र सरकार में उन्होंने रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय में सचिव के तौर पर काम किया। इन मंत्रालयों में रहते हुए उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाई।
- वे ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स के दौरान उनका प्रशासनिक अनुभव काफी काम आया।
🔷रिटायरमेंट के बाद भी रहे सक्रिय, सम्मान और उपलब्धियां
सेवानिवृत्ति के बाद भी धनेंद्र कुमार सार्वजनिक नीति और कॉर्पोरेट मामलों में सक्रिय रहे। वे Competition Advisory Services India LLP से जुड़े रहे और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स में स्कूल ऑफ कंपटीशन लॉ के प्रिंसिपल एडवाइजर और चीफ मेंटर की भूमिका निभाते रहे। वे COMPAD नाम की संस्था के संस्थापक चेयरमैन भी थे।
हरियाणा में औद्योगिक विकास में योगदान के लिए उन्हें "नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड" से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा सार्वजनिक प्रशासन और नीति निर्माण में योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली।
धनेंद्र कुमार का जीवन केवल एक अफसर की कहानी नहीं था, बल्कि उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता था जिसने भारत की प्रशासनिक और आर्थिक संरचना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली के हौज खास में हुआ हादसा सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक और नीति जगत के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। एक ऐसा अधिकारी, जिसने हरियाणा के जिलों से लेकर वर्ल्ड बैंक और CCI तक अपनी पहचान बनाई, अब सिर्फ यादों में रह गया है।














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