छत्तीसगढ़ शासकीय अस्पतालों में फ्री में हो रहा है मोतियाबिंद का इलाज, जानिए योजना के बारे में
रायपुर, मई 01। छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में मोतियाबिंद की वजह से किसी की दृष्टि न छिन जाए, इसके लिए अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम द्वारा वर्ष 2022-23 में ज्यादा से ज्यादा मोतियाबिंद ऑपरेशन कर प्रदेश में दृष्टिहीनता के प्रकरणों में कमी लाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राज्य में स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा दृष्टिदोष रोगियों की विकसखंड स्तर पर सूची तैयार कर नेत्र सहायक अधिकारियों के माध्यम से मरीजों की पुष्टि कर मोतियाबिंद ऑपरेशन करने के लिए चिन्हाकित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया की प्रदेश में वर्ष 2020-21 में शासकीय व प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर कुल 41 हजार 874 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए थे वहीँ वर्ष 2021-22 में 85 हजार 178 ऑपरेशन किए गए हैं। वर्ष 2017-18 में प्रदेश में जहाँ 8 हजार 844 मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों का शासकीय अस्पतालों में सफल ऑपरेशन किया गया था वह वर्ष 2021-22 में बढ़कर 16 हजार 295 हो गया है। इस तरह प्रदेश में शासकीय अस्पतालों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है।
डॉ. मिश्रा ने बताया की प्रदेश में अब मोतियाबिंद के उपचार की अत्याधुनिक तकनीक "फेको" के माध्यम से मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस तकनीक में किसी प्रकार के चीरे की आवश्यकता नहीं होती। ऑपरेशन की इस विधि के दौरान आंख में महज एक बारीक छेद किया जाता है, जिसके माध्यम से मोतिया को आंख के अंदर ही घोल दिया जाता है और इसी के माध्यम से ही फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
प्रदेश के 13 जिला अस्पतालों में "फेको" तकनीक से मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है जिसमें जिला अस्पताल बीजापुर, सूरजपुर, बलौदाबाजार, बैकुंठपुर (कोरिया), कोंडागाँव, धमतरी, मुंगेली, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़, राजनांदगांव, रायपुर, एवं बिलासपुर शामिल हैं। वर्ष 2023 तक राज्य के सभी जिलों में यह सुविधा उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों में आयुष्मान योजना की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया की वर्ष 2021-22 में प्रदेश में ग्लॉकोमा के 5 हजार 69 मरीजों का एवं डाइअबेटिक रेटिनो पात्र के 8 हजार 667 मरीजों की पहचान कर निःशुल्क उपचार किया गया और 23 हजार 731 चश्मा बच्चों को तथा 46 हजार 741 चश्मा वयस्कों को इस तरह कुल 70 हजार 472 निःशुल्क चश्मा वितरण किए गए।












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