CBSE का 'रील्स' वाला PR स्टंट! OSM विवाद पर बोर्ड ने स्कूलों को थमाया सोशल मीडिया PR टास्क, कहा- बोल सब ठीक है

CBSE OSM System Controversy: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर देशभर में मचा बवाल अब एक बेहद गंभीर और अजीबोगरीब मोड़ पर पहुंच गया है।

एक तरफ जहां छात्र, अभिभावक और छात्र संगठन कॉपियों के मूल्यांकन में हुई भारी गड़बड़ियों को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई (CBSE) पर यह गंभीर आरोप लगा है कि वह इस जन-आक्रोश को दबाने के लिए स्कूल प्रिंसिपलों का इस्तेमाल कर 'पीआर कैंपेन' चला रहा है।

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हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के एक बड़े खुलासे के मुताबिक, सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इसी हफ्ते स्कूल प्रिंसिपलों को एक 'सोशल मीडिया टूलकिट' और लिखित स्क्रिप्ट भेजी है, जिसमें उन्हें बोर्ड का बचाव करने और इंस्टाग्राम पर 'रील्स' (Reels) बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

मटेरियल फॉर प्रिंसिपल्स में क्या है स्क्रिप्ट?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE के क्षेत्रीय कार्यालयों ने स्कूल प्रिंसिपलों को Material for Principals शीर्षक वाला एक दस्तावेज भेजा। इस दस्तावेज में उन लाइनों और बयानों का उल्लेख था जिन्हें प्रिंसिपलों को छात्रों और अभिभावकों के सामने पढ़ना था या सोशल मीडिया वीडियो में इस्तेमाल करना था। इसमें प्रिंसिपलों से कहा गया कि वे बोर्ड को-"Highly proactive, empathetic and communicative" यानी बहुत सक्रिय, संवेदनशील और संवादात्मक संस्था के रूप में पेश करें।

स्क्रिप्ट में यह लाइन भी शामिल थी-"इतने बड़े पैमाने पर किसी भी नई तकनीक को लागू करने में शुरुआत में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें (Implementation bumps) आती हैं... कृपया, कोई भी पैनिक (डरे) न करे। मैं हर छात्र और अभिभावक को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी बच्चे को तकनीकी त्रुटि के कारण नुकसान नहीं उठाने दिया जाएगा।"

इतना ही नहीं, स्क्रिप्ट में प्रिंसिपलों से यह भी कहने को कहा गया कि अगर छात्रों को अपनी परफॉर्मेंस और डिजिटल शीट में कोई अंतर दिखता है, तो वे पैनिक होने के बजाय बोर्ड की री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया का उपयोग करें।

सरकारी स्कूलों ने धड़ाधड़ पोस्ट किए वीडियो-निजी स्कूलों ने खड़े किए सवाल

इस टूलकिट के सर्कुलेट होने के बाद सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम पर सीबीएसई के समर्थन में रील्स की बाढ़ आ गई। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित केंद्रीय विद्यालय (KV) और जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) इस PR कैंपेन में सबसे आगे नजर आए।

केंद्रीय विद्यालय, गोरखपुर: केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, एयरफोर्स स्टेशन गोरखपुर के एक वीडियो में कक्षा 12वीं के छात्र को बोर्ड का बचाव करते हुए दिखाया गया। छात्र ने कहा कि वह अपने नंबरों से संतुष्ट है और ऐसी दिक्कतें हर साल आती हैं, इसमें OMS की कोई गलती नहीं है। हालांकि, दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों ने इसका खुल कर विरोध किया और बोर्ड के रवैये पर सवाल उठाएं।

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आंकड़े बयां कर रहे हैं हकीकत: स्क्रूटनी के आवेदनों में 208% का भारी उछाल

सीबीएसई के अधिकारी भले ही कैमरे के सामने सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रहे हों, लेकिन खुद बोर्ड के आधिकारिक आंकड़े इस सिस्टम की विफलता की गवाही दे रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस साल परीक्षा में बैठे लगभग 18 लाख (1.8 Million) छात्रों में से हर चार में से एक छात्र (लगभग 25%) ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां (Scanned Copies) प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है।

पिछले साल की तुलना में इस बार स्क्रूटनी और कॉपियां दोबारा देखने के आवेदनों में 208% से अधिक का रिकॉर्ड उछाल आया है। हालांकि, सीबीएसई का कहना है कि यह उछाल 17 मई को स्क्रूटनी फीस में की गई भारी कटौती के कारण है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छात्र अपने नंबरों को देखकर सदमे में हैं।

CBSE का ने कहा- हमने कोई दबाव नहीं बनाया

जब इस टूलकिट और स्क्रिप्ट के संबंध में सीबीएसई के आधिकारिक प्रवक्ता से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, बोर्ड के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, बोर्ड ने किसी भी स्कूल या प्रिंसिपल को अपने पक्ष में जबरन वीडियो पोस्ट करने के निर्देश या आदेश जारी नहीं किए हैं। यह स्कूलों की अपनी मर्जी हो सकती है।

OSM सिस्टम पर क्यों हो रहा विवाद?

CBSE ने इस साल 12वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया था। इस सिस्टम में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया गया और परीक्षकों ने कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियों की जांच की।

बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, तेज और सही-सटीक बनेगी। लेकिन रिजल्ट आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने शिकायत की कि स्कैन कॉपियां धुंधली थीं, कई पेज गायब थे, कुछ छात्रों को किसी और की उत्तर पुस्तिका अपलोड होकर मिली और मूल्यांकन में भारी गड़बड़ियां दिखीं।

वेदांत श्रीवास्तव केस के बाद बढ़ा विवाद

OSM विवाद तब और बड़ा हो गया जब दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उसकी फिजिक्स की कॉपी किसी दूसरे छात्र की अपलोड कर दी गई थी। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद CBSE ने गलती स्वीकार की और छात्र को सही कॉपी भेजी। इसके बाद OSM सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल उठने लगे। अब यह बहस और तेज हो गई है कि क्या CBSE छात्रों की समस्याएं सुलझाने की बजाय अपनी छवि बचाने में ज्यादा ध्यान दे रहा है।

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