Vat Savitri Vrat 2025 : आज जरूर करें ये आरती, मिलेगा सदा सुहागन होने का आशीर्वाद

Vat Savitri Vrat, Aarti lyrics: आज सुहागिनों का प्रिय व्रत 'वट सावित्री' है, हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को आने वाला ये उपवास महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार करके बरगद (वट वृक्ष) की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और यश के लिए प्रार्थना करती हैं।

इस दिन मां सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है। ये पूजा तब तक अधूरी है,जब तक माता सावित्री की आरती नहीं हो जाती, जो कोई भी ऐसा करता है उसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मिलता है।

Vat Savitri Vrat 2025

मां सावित्री की आरती

  • ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
  • अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
  • ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
  • अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
  • ओम जय जय सावित्री।
  • तुम ही रक्षक सबका, प्राणों का तुम प्राण
  • भक्तजन मिले सारे, नित्य करें तेरा ध्यान
  • ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
  • भक्त तरसे तुम हो सभी विधि करें उपकार
  • अंतर्मन से सुमिर लो, सुने वो तभी पुकार,
  • ओम जय जय सावित्री।।
  • भक्तों का दुख भंजन रक्षा करें आठों याम,
  • दिव्य ज्योति तुम्हारी, रहें सदा अविराम
  • ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
  • चारों विधि के मंत्रों का गुरु मंत्र तुम्हे कहते।
  • ऋषि मुनि योगी सारे गुणगान तुम्हारा करें।
  • ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
  • अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
  • ओम जय जय सावित्री।
  • हृदय विराजो हे मां, भटक न जाऊ किसी ओर
  • ले लो अपनी शरण में, न छूटे कभी डोर।
  • ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
  • अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
  • ओम जय जय सावित्री।

महत्व (Vat Savitri Vrat)

वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में पतिव्रता धर्म का प्रतीक है। यह व्रत नारी शक्ति की महानता, प्रेम, तप और विश्वास का साक्षात उदाहरण है। जिस घर को लोग ये पूजा करते हैं, उनके घर में हमेशा सुख, शांति और प्रेम का वास होता है और इस घर के लोग तरक्की के मार्ग पर अग्रसर होते हैं।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि (Vat Savitri Vrat)

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

वट वृक्ष का क्या महत्व है?

वट वृक्ष को त्रिदेवों - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - का प्रतीक माना जाता है। इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास माना गया है।

वट सावित्री व्रत कब रखा जाता है?

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या या पूर्णिमा को किया जाता है (क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार)। इस दिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, जो जीवन, स्थायित्व और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

वट सावित्री व्रत किसके लिए रखा जाता है?

वट सावित्री व्रत विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है

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