Kanya Pujan Muhurat: आज है कन्या-पूजन, जानिए क्या है मुहूर्त और कथा

Kanya Pujan Muhurat: आज अष्टमी और नवमी दोनों मनाई जा रही है, आज दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक अष्टमी तिथि है तो वहीं इसके बाद से नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो कि शनिवार सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।

मालूम हो कि भक्तगण अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों में कन्या पूजन करते हैं। कन्या पूजन का मुहूर्त आज दोपहर 12 बजकर 32 मिनट के बाद से है। आपको बता दें कि छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है।

Kanya Pujan Muhurat

इस अनुष्ठान के माध्यम से भक्तजन देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। कन्या पूजन का मुख्य कारण स्त्री शक्ति की पूजा और सम्मान है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है।

यह मान्यता है कि कन्याओं की पूजा करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा, यह समाज में स्त्री के सम्मान और उसके महत्व को दर्शाता है। कन्या पूजन के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया जाता है कि लड़कियां किसी भी रूप में कम नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं देवी का रूप हैं।

कन्या पूजन की कथा ( Kanya Pujan Katha)

कन्या पूजन से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं हैं। पुराणों के अनुसार, महिषासुर नामक एक दैत्य ने अत्याचार मचाया और देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।

तब सभी देवताओं ने मिलकर माँ दुर्गा की आराधना की, और उनकी कृपा से मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसे समाप्त किया था। इसी कारण इन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। देवी को प्रसन्न करने के लिए कन्याओं की पूजा की जाती है।

दुर्गा मां ने जब धरती पर अवतार लिया था

एक अन्य कथा के अनुसार, दुर्गा मां ने जब धरती पर अवतार लिया था, तब उन्होंने बाल रूप में नौ कन्याओं के रूप में प्रकट होकर असुरों का नाश किया था। इस कारण से नवरात्रि में कन्याओं की पूजा कर देवी के बाल स्वरूप को प्रणाम किया जाता है।

कन्या पूजन की विधि ( Kanya Pujan Vidhi)

कन्या पूजन में आमतौर पर 9 कन्याओं को भोजन पर आमंत्रित किया जाता है। सबसे पहले, उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें रोली और चंदन से तिलक लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें भोजन करवाया जाता है, जिसमें हलवा, पूड़ी और चना होता है। भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा दिया जाता है। कुछ स्थानों पर एक साथ नौ कन्याओं की पूजा के साथ एक बालक (जिसे बटुक या कुमार कहा जाता है) की भी पूजा की जाती है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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