Parsi New Year 2018: पारसी समुदाय आज मना रहा है नया साल 'नवरोज', जानिए इससे जुड़ी खास बातें
नई दिल्ली। आज पारसी समुदाय अपना नववर्ष मना रहा है, जिस कि 'नवरोज' के नाम से जाना जाता है। आज का दिन पारसी लोगों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है, आज इनके घरों में पकवान बनते हैं और ये लोग नए कपड़े पहनकर और अपने घरों को सजाकर अपनी खुशी बयां करते हैं। इस पर्व को पतेती और 'जमशेदी नवरोज' के भी नाम से जाना जाता है।
चलिए जानते हैं 'नवरोज' के बारे में कुछ खास बातें...

'नवरोज' का अर्थ ही होता है पारसी कैलेंडर का पहला दिन
- आज के न्यू ईयर को 'जमशेदी नवरोज' इसलिए कहा जाता है क्योंकि पारसियों के वीर योद्धा और फारस के राजा जमशेद ने ही पहली बार अपने समुदाय के लोगों को पारसी कैलेंडर के बारे में बताया था।
- 'नवरोज' का अर्थ ही होता है पारसी कैलेंडर का पहला दिन, जिसका पूरा समुदाय दिल खोलकर स्वागत करता है।

आज के दिन होती है खास पूजा
- पारसी समुदाय के लोग आज मंदिरों में जाते हैं और विशेष पूजा करते हैं, ये लोग भी अग्नि को ही साक्षी मानते हैं और उसके आगे ही अपनी प्रार्थना करते हैं और ईश्वर से घर-परिवार की सुख-समृद्दि का कामना करते हैं।
- प्रार्थना समाप्त होने के बाद समुदाय के लोग एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई देते हैं।
- इस दिन ये लोग घरों के मुख्य द्वार पर रंगोली जरूर बनाते हैं और घर के अंदर चंदन की लकड़ी रखते हैं, ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा आती है और घर से सारी बुरी चीजें बाहर चली जाती है।
- लोग एक-दूसरे से मिलने घरों में जाते हैं और एक-दूसरे को उपहार देते हैं।

क्या होता है खास

अल्पसंख्यक समुदायों में से एक पारसी समुदाय
आपको बता दें पारसी समुदाय देश की सबसे कम आबादी वाले अल्पसंख्यक समुदायों में से एक है। लेकिन नवरोज जैसे त्योहार के माध्यम से इस समुदाय ने आज भी अपनी परंपराओं को जिंदा रखा है।












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