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Onam 2018: 10 दिनों तक चलने वाला ये त्योहार क्यों होता है खास?

नई दिल्ली। 15 अगस्त से शुरू हुआ पर्व 'ओणम' 27 अगस्त को खत्म होगा, केरल के प्रमुख त्योहारों में से एक 'ओणम' की चमक इस बार काफी फीकी रही है क्योंकि केरल इस वक्त बाढ़ की वजह से काफी दुखी और बदहाल है, इसी कारण राज्यवासियों ने अपने नए साल का स्वागत प्रार्थनाओं के साथ किया है, जिसके कि उनके राज्य के लोगों, के सारे कष्ट जल्दी ही खत्म हो। दरअसल केरलवासी ओणम को अपना 'न्यूईयर' मानते हैं, उनके लिए ये धार्मिक त्‍योहार से ज्यादा एक सांस्‍कृतिक पर्व है जो कि फसल के लिए मनाया जाता है।

 केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही ओणम की शुरुआत हुई थी

केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही ओणम की शुरुआत हुई थी

ये पर्व गणेश चतुर्थी की तरह 10 दिन तक मनाया जाता है। केरल के साथ-साथ पूरे देश में अलग अलग जगहों पर भी यह पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन घरों को फूलों से सजाया जाता है। इस दिन ही केरल में मशहूर नौका-दौड़ शुरू होती है। लोग इस दिन पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही 'ओणम' की शुरुआत हुई थी।

 राजा महाबलि की कहानी

राजा महाबलि की कहानी

कहते हैं केरल के एक राजा थे जिनका नाम था महाबलि, वो अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते थे और बहुत बड़े दानी थे। वो कोशिश करते थे कि उनके राज्य में हर कोई खुश रहे इसलिए प्रजा उन्हें भगवान की तरह पूजा करती थी। महाबलि की ये लोकप्रियता देवताओं से देखी नहीं गई। राजा इंद्र ने भगवान विष्णु से कहा कि वो महाबलि की परीक्षा लें, विष्णु मान गये और उन्होंने ब्राह्मण वेश धारण करके महाबलि के पास पहुंचकर तीन पग जमीन की मांग की।

भगवान विष्णु ने नापें तीन पग...

भगवान विष्णु ने नापें तीन पग...

महाबलि ने तुरंत हां कर दिया और उसके बाद विष्णु ने विराट रूप धारण करके तीन पग नापें, पहले पग में भू-लोक तथा दूसरे पग में स्वर्ग-लोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए भूमि कम पड़ गई। इस पर महबलि के पास कोई चारा नहीं बचा, उन्होंने भगवान विष्णु से माफी मांगी तब विष्णु ने उन्हें पाताल लोक में रहने की सजा दी लेकिन एक वरदान भी दिया जो वो पाताल लोक जाने से पहले मांग सकते थे।

राजे के लिए प्रजा होती है खुश

राजे के लिए प्रजा होती है खुश

राजा बलि अपनी प्रजा को बहुत चाहते थे। अत: उन्होंने वरदान मांगा कि, उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा के सुख- दु:ख को देखने का अवसर मांगा जो भगवान ने दे दिया इसलिए ऐसा माना जाता है कि हर साल श्रवण नक्षत्र यानी ओणम के दिन में राजा बली अपनी प्रजा को देखने आते हैं। इसी कारण राज्य की जनता अपने महाबलि को दिखाने के लिए 'ओणम'का दिन उत्सव के रूप में मनाती हैं और नाचती-गाती है ताकि उसके राजा को लगे कि उसकी प्रजा सुखी है और उन्हें कोई तकलीफ ना हो।

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