Nautapa 2026: 25 मई से शुरू होगा नौतपा, 9 दिनों तक आसमान से बरसेगी आग! क्या करें और क्या नहीं?
Nautapa 2026: कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक गर्मी का रौद्र रूप जारी है, लू की वजह से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, तेलंगाना में तो हीटस्ट्रोक के कारण अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, तो वहीं 25 मई से गर्मी का डबल वार लोगों को झेलना पड़ेगा क्योंकि इस दिन से नौतापा की शुरुआत हो रही है।
आपको बता दें कि नौतपा का समय काल 9 दिनों का होता है यानी कि ये 2 जून तक रहेगा, इन 9 दिनों के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करता है, जिसके प्रभाव से उत्तर और मध्य भारत में भीषण गर्मी पड़ती है।मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधी और तीव्र होती हैं, इसलिए तापमान तेजी से बढ़ता है।

इसी वजह से प्रकृति और शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए शास्त्रों और पुराणों में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करके इंसान गर्मी के प्रकोप को थोड़ा कम कर सकता है।
क्या है नौतापा के नियम?
काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक नौतपा को केवल गर्मी का समय नहीं बल्कि प्रकृति के संतुलन का चरण भी माना जाता है। मान्यता है कि यदि नौतपा में अच्छी गर्मी पड़े तो मानसून बेहतर हो सकता है और खेती को लाभ मिलता है, इस दौरान निम्नलिखित नियमों के जरिए इंसान अपना जीवन आसान कर सकता है।
- पानी का दान: इस दौरान प्याऊ लगाना, पानी पिलाना और ठंडी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करने से भी पुण्य मिलता है।
- तामसिक भोजन से बचें: कई लोग नौतपा में अधिक मसालेदार और भारी भोजन से परहेज करते हैं क्योंकि ये भोजन इंसान के शरीर को गर्म करता है।
- दोपहर में बाहर निकलने से बचें: लू का खतरा अधिक होने के कारण दोपहर में धूप से बचने की सलाह दी जाती है, अगर निकलना जरूरी हो तो सिर ढंककर ही बाहर निकलें ऐसा करने से आप सूर्य के गुस्से का शिकार होने से बच जाएंगे।
- पेड़-पौधों को पानी देना: धार्मिक मान्यता के अनुसार जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों की सेवा पुण्यदायी मानी जाती है।
- सात्विक जीवनशैली: कुछ लोग नौतपा के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और सात्विक आहार अपनाते हैं।
नौतपा में इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ती है?
- सूर्य की सीधी किरणें: इस दौरान सूर्य उत्तरी गोलार्ध के काफी करीब होता है। भारत में सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे जमीन तेजी से गर्म होती है।
- हवा में नमी कम होना: मई के अंत तक कई इलाकों में हवा शुष्क हो जाती है। नमी कम होने से गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती है।
- मानसून से पहले का दौर: नौतपा को मानसून आने से पहले की सबसे गर्म अवधि माना जाता है। धरती अत्यधिक गर्म होती है, जिससे बाद में मानसूनी हवाओं को खिंचाव मिलता है।














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