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Mauni Amavasya 2025 Muhurat: मौनी अमावस्या आज, जानिए क्या है स्नान का मुहूर्त, महत्व और आरती

Mauni Amavasya 2025 Muhurat: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। आज का दिन बेहद ही पावन है। ऋषि मनु की वजह से आज की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। माना जाता है कि आज के दिन जो भी पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आज श्रवण नक्षत्र और उत्तराषाढा नक्षत्र दोनों बने हैं, साथ ही प्रयागराज में महाकुंभ भी लगा हुआ है, जिसकी वजह से इसकी महत्ता और भी ज्यादा बढ़ गई है।

Mauni Amavasya 2025

आपको बता दें कि मौनी अमावस्या पर स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 08 बजकर 20 मिनट है। इस दौरान जो भी पूजा पाठ करेगा उसे विशेष लाभ मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर उसके घर में धन संपन्नता बरकरार रहेगी।

आज के दिन सूर्य भगवान को अर्ध्य जरूर देना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इंसान की सारी परेशानियों का अंत होता है और साथ ही उसके घर में हमेशा खुशियां रहती हैं, वो रोगमुक्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए आज अर्ध्य देते वक्त सूर्य भगवान की आरती जरूर करें।

भगवान सूर्य की आरती (Mauni Amavasya 2025)

  • जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन।
  • त्रिभुवनतिमिरनिकन्दन भक्तहृदय चन्दन।।
  • सप्तअश्वरथ राजित एक चक्रधारी।
  • दुःखहारी सुखकारी, मानस मलहारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन
  • सकलसुकर्मप्रसविता सविता शुभकारी।
  • विश्वविलोचन मोचन भवबन्धनभारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन
  • कमलसमूहविनाशक नाशक रूम तापा।
  • सेवत सहज हरत अति मनसिज सन्तापा।। ओम जय कश्यप-नन्दन
  • नेत्र व्याधिहर सुरवर भू-पीड़ाहारी।
  • वृष्टिविमोचन सन्तत परहित व्रतधारी।। ओम जय कश्यप-नन्दन
  • सूर्यदेव करुणाकर अब करुणा कीजै।
  • हर अज्ञानमोह सब तत्त्वज्ञान दीजै।। ओम जय कश्यप-नन्दन


सूर्यदेव के मंत्र (Mauni Amavasya 2025)

  • ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।
  • विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।।

सूर्याष्टकम मंत्र

  • आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर
  • दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते।
  • सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्
  • श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।
  • लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्
  • महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।
  • त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्
  • महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।
  • बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च
  • प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।
  • तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्
  • महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें।

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