Laxmi Puja: आज जरूर करें इसका पाठ वरना हो जाएंगे कंगाल, खराब हो जाएगा घर-व्यापार
Laxmi Stuti: शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित होता है, इस दिन मां की पूजा करने से इंसान को हर तरह से सुख और वैभव की प्राप्ति होती है।
मां लक्ष्मी की पूजा के बिना ना तो व्रत संभव है और ना ही कोई काम, मां लक्ष्मी का वास जहां होता है वहां भय नाम की कोई चीज नहीं होती है।

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की स्तुति विशेष रूप से करनी चाहिए, ऐसा करने भक्त पर मां लश्र्मी की विशेष कृपा रहती है और धन धान्य से घर हमेशा भरा रहता है, यही नहीं ऐसा ना करने से इंसान के घर दरिद्रता का वास हो जाता है और गृह में कंगाली आती है।
लक्ष्मी स्तुति (Laxmi Stuti)
- आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
- यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
- पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
- विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
- धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
- धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
- प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
- अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि।
- वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे।
- जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि।
- भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते।
- कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि।
- आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि।
- सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते।
- रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि।
- मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
- मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे।
- मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा।।
- सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
- शरण्ये त्रयम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।
लक्ष्मी चालीसा (Laxmi Chalisa)
दोहा
- जय जय श्री महालक्ष्मी, करूँ मात तव ध्यान।
- सिद्ध काज मम किजिये, निज शिशु सेवक जान॥
चौपाई
- नमो महा लक्ष्मी जय माता।
- तेरो नाम जगत विख्याता॥
- आदि शक्ति हो मात भवानी।
- पूजत सब नर मुनि ज्ञानी॥
- जगत पालिनी सब सुख करनी।
- निज जनहित भण्डारण भरनी॥
- श्वेत कमल दल पर तव आसन।
- यह पढ़ें: पूरी चालीसा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- शुक्रवार को जरूर करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ
Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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