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Operation Sindoor के बीच जानिए लाल और नारंगी सिंदूर में अंतर? क्या है महत्व?

Operation Sindoor: 'सिंदूर' केवल एक श्रृंगार का सामान नहीं बल्कि हिंदू विवाहित भारतीय नारी की पहचान है, 'चुटकी भर सिंदूर' उसके विवाहित होने का सबूत तो देते ही हैं, साथ ही ये एक सुहागन के लिए सबसे बड़ी ताकत भी होता है, जिसके नाम का 'सिंदूर' महिला अपनी मांग में भरती है, उसके लिए वो अपना तन, मन यहां तक की पूरी जिंदगी न्यौछावर कर देती है।

इस 'सिंदूर' के बल पर ही एक लड़की अपना घर-आंगन छोड़कर एक अनजान इंसान के साथ जिंदगी जीने का फैसला कर लेती है।

Operation Sindoor

इसी सिंदूर की लंबी उम्र के लिए विवाहित महिलाएं ना जाने कितने व्रत और तपस्या करती हैं, इसलिए भारतीय हिंदू विवाहित महिलाओं के लिए 'सिंदूर' उनके वैवाहिक सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर भारत में दो तरह के सिंदूर देखने को मिलते हैं, एक 'लाल' और एक 'नारंगी'।

शक्ति, प्रेम और समर्पण का पर्याय है 'सिंदूर' (Operation Sindoor)

दोनों ही शक्ति, प्रेम और समर्पण का पर्याय है। यूपी, बिहार और झारखंड में आमतौर पर लोग 'नारंगी' सिंदूर का प्रयोग करते हैं। बिहार में तो महिलाएं शादी और विशेष आयोजन पर नाक से लेकर मांग तक सिंदूर लगाती हैं तो वहीं लाल रंग का सिंदूर आम तौर पर मध्य भारत में प्रमुखता से प्रयोग होता है। कहीं-कहीं इसे लोग 'इंगूर' भी कहते हैं।

मां पार्वती को "सौभाग्य की देवी" कहा जाता है

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मां पार्वती, जिन्हें "सौभाग्य की देवी" कहा जाता है, उन्हें सिंदूर बहुत प्रिय है इसलिए विवाहित महिलाएं 'लाल सिंदूर' लगाकर मां पार्वती से अपने पति के दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

'नारंगी रंग' सूर्य और अग्नि तत्व से जुड़ा है (Operation Sindoor)

तो वहीं 'नारंगी रंग' त्याग और आध्यात्मिक सौंदर्य को दर्शाता है। 'नारंगी रंग' सूर्य और अग्नि तत्व से जुड़ा है। संतों और तपस्वियों के वस्त्र भी इसी रंग के होते हैं, इसलिए इसे शुभ और पवित्र माना जाता है।

सूर्योदय से पहले आसमान में लालिमा छा जाती है

अक्सर विवाह होते वक्त इसी 'सिंदूर' का प्रयोग करते हैं क्योंकि हमारे यहां शादी की रस्में रात में होती हैं और जब 'सिंदूर दान' की रस्म होने को आती है तो 'पौ फटने' का वक्त होता है यानी की सवेरा होने वाला होता है और उस वक्त सूर्योदय से पहले आसमान में लालिमा छा जाती है जो कि अक्सर 'नारंगी रंग' की होती है, जो कि नए सवेरे का सूचक है इसलिए वैवाहिक जीवन 'वर-वधू' का सुखमय बना रहे इसलिए 'नारंगी रंग' के सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

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