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Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी आज, क्या है शुभ मुहूर्त? क्यों होती है काल भैरव की पूजा?

Kalashtami Vrat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह कीअष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भय, रोग, शत्रु बाधा और अकाल मृत्यु का डर दूर होता है।

मालूम हो कि कालाष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। यह व्रत प्रत्येक मास में अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है, विशेष रूप से मार्गशीर्ष, चैत्र और फाल्गुन माह की कालाष्टमी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

Kalashtami Vrat 2026

Kalashtami Vrat 2026:कालाष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त

  • फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 फरवरी से 10 फरवरी तक सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक है।
  • अभिजीत मुहूर्त 9 फरवरी दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक।
  • गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से शाम 6 बजकर 30 मिनट तक।

Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

काल भैरव को काल के स्वामी और काशी के कोतवाल कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव की पूजा से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और राहु-केतु और शनि दोष में राहत मिलती है, तंत्र बाधा और अनिष्ट योग शांत होते हैं, जो जातक जीवन में बार-बार रुकावटों, डर या अस्थिरता का सामना कर रहे हों, उनके लिए कालाष्टमी का व्रत विशेष लाभकारी होता है।

Kalashtami Vrat 2026:कालाष्टमी 2026 पूजा विधि

प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और दिनभर उपवास रखें या फलाहार करें, शाम या मध्य रात्रि में पूजा स्थान शुद्ध करें,काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल, उड़द, नारियल, गुड़ अर्पित करें, कुत्ते को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। काल भैरव मंत्र या चालीसा का पाठ करें।

Kalashtami Vrat 2026

Kaal Bhairav Chalisa in Hindi: काल भैरव चालीसा

काल भैरव चालीसा का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। काल भैरव की कृपा से सिद्धि-बुद्धि,धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।

दोहा

  • श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ।
  • चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ॥
  • श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल।
  • श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल॥

चालीसा

  • जय जय श्री काली के लाला।
  • जयति जयति काशी-कुतवाला॥
  • जयति बटुक-भैरव भय हारी।
  • जयति काल-भैरव बलकारी॥
  • जयति नाथ-भैरव विख्याता।
  • जयति सर्व-भैरव सुखदाता॥
  • भैरव रूप कियो शिव धारण।
  • भव के भार उतारण कारण॥
  • भैरव रव सुनि हवै भय दूरी।
  • बटुक नाथ हो काल गंभीरा। श्‍वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥
  • करत नीनहूं रूप प्रकाशा। भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा॥
  • रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन। व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन॥
  • तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं। विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं॥
  • जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। जय उन्नत हर उमा नन्द जय॥
  • भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय। वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥
  • महा भीम भीषण शरीर जय। रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय॥
  • अश्‍वनाथ जय प्रेतनाथ जय। स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय॥
  • निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥
  • त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय। क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥
  • श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥
  • रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर। चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥
  • करि मद पान शम्भु गुणगावत। चौंसठ योगिन संग नचावत॥
  • करत कृपा जन पर बहु ढंगा। काशी कोतवाल अड़बंगा॥
  • देयं काल भैरव जब सोटा। नसै पाप मोटा से मोटा॥
  • जनकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा॥
  • श्री भैरव भूतों के राजा। बाधा हरत करत शुभ काजा॥
  • ऐलादी के दुख निवारयो। सदा कृपाकरि काज सम्हारयो॥
  • सुन्दर दास सहित अनुरागा। श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥
  • श्री भैरव जी की जय लेख्यो। सकल कामना पूरण देख्यो॥

दोहा

  • जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार।
  • कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार॥
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