Mahashivratri 2026: 19 साल बाद महाशिवरात्रि पर लक्ष्मी नारायण योग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत
Mahashivratri 2026 and Lakshmi Narayan Yoga : फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 15 फरवरी को है। इस बार की शिवरात्रि बहुत खास है क्योंकि इस बार 19 साल बाद लक्ष्मीनारायण योग बन रहा है। यह शुभ योग धन, समृद्धि, सुख-सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
खास बात यह है कि इस योग का सकारात्मक प्रभाव वृषभ, मेष, तुला और मकर राशि के जातकों पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इन राशियों की किस्मत चमकने वाली है।

क्या है लक्ष्मी नारायण योग? (Mahashivratri 2026)
ज्योतिष में लक्ष्मी नारायण योग तब बनता है जब शुक्र और बुध ग्रह अपनी मजबूत स्थिति में एक-दूसरे से शुभ संबंध बनाते हैं। शुक्र सुख-सुविधा, धन और प्रेम का कारक है, जबकि बुध बुद्धि, व्यापार और वाणी का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों ग्रहों का शुभ योग जीवन में आर्थिक स्थिरता, करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख प्रदान करता है। महाशिवरात्रि स्वयं में ही आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति का पर्व है।
धन लाभ, रुके हुए कार्यों में गति और भाग्य का साथ
ऐसे में इस दिन लक्ष्मी नारायण योग का बनना इसे और भी फलदायी बना देता है। मान्यता है कि इस योग में भगवान शिव की पूजा और विशेष उपाय करने से धन लाभ, रुके हुए कार्यों में गति और भाग्य का साथ मिलता है।
इन राशियों का बदलेगा वक्त (Mahashivratri 2026)
- मेष राशि:करियर और व्यवसाय में उन्नति के योग बन रहे हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
- वृषभ राशि :इस योग के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी।
- तुला राशि : शुक्र के प्रभाव से प्रेम और दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। धन लाभ के साथ-साथ सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी।
- मकर राशि :नौकरी और व्यापार में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आर्थिक परेशानियां दूर होंगी।
शिव चालीसा
दोहा
- जय गणेश गिरिजा सुवन,
- मंगल मूल सुजान।
- कहत अयोध्यादास तुम,
- देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
- जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
- सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
- भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
- कानन कुण्डल नागफनी के ॥
- अंग गौर शिर गंग बहाये ।
- मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
- वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
- छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
- मैना मातु की हवे दुलारी ।
- बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
- कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
- करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
- नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
- सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
- कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
- या छवि को कहि जात न काऊ ॥
- देवन जबहीं जाय पुकारा ।
- तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
- किया उपद्रव तारक भारी ।
- देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
- तुरत षडानन आप पठायउ ।
- लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
- आप जलंधर असुर संहारा ।
- सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
- त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
- सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
- किया तपहिं भागीरथ भारी ।
- पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
- दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
- सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
- वेद नाम महिमा तव गाई।
- अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
- प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
- जरत सुरासुर भए विहाला ॥
- कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
- नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
- पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
- जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
- सहस कमल में हो रहे धारी ।
- कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
- एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
- कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
- कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
- भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
- जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
- करत कृपा सब के घटवासी ॥
- दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
- भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
- त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
- येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
- लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
- संकट से मोहि आन उबारो ॥
- मात-पिता भ्राता सब होई ।
- संकट में पूछत नहिं कोई ॥
- स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
- आय हरहु मम संकट भारी ॥
- धन निर्धन को देत सदा हीं ।
- जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
- अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
- क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
- शंकर हो संकट के नाशन ।
- मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
- योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
- शारद नारद शीश नवावैं ॥
- नमो नमो जय नमः शिवाय ।
- सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
- जो यह पाठ करे मन लाई ।
- ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
- ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
- पाठ करे सो पावन हारी ॥
- पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
- निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
- पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
- ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
- त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
- ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
- धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
- शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
- जन्म जन्म के पाप नसावे ।
- अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
- कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
- जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
दोहा
- नित्त नेम कर प्रातः ही,पाठ करौं चालीसा ।
- तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश ॥
- मगसर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान ।
- अस्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण ॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें।












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