इलाहाबाद के इस महाकुम्भ में जरूर लगाइये डुबकी

आस्था के महाकुम्भ के बाद संगम की धरती में एक और महाकुम्भ की छटा इन दिनों अपने सबाब पर है। इलाहाबद की सड़कों पर उमड़ा यह सैलाब देश के कोने कोने से आये उन लोक कलाकारों का है, जो अपनी कला और सोच के जरिये देश की विविधता को एकता के एक ही धागे का सन्देश देने लोगो के बीच पहुंचे हैं। इस समय इसी धरती पर एक और तम्बुओं का शहर बस गया है।
अपने रहन-सहन, अपनी लोक-कलाओ, अपने लोक-कर्म को एक दूसरे से बाटने आये देश भर के 16 राज्यो से आये ये लोक कर्मी किसी सरकारी आयोजन में शिरकत करने नहीं आये बल्कि इनके इनके समागम का यह प्रयास निजी है और जिसके पीछे सोंच है देश भर के सभी धर्मो , भाषाओ और जातियो के बीच आपसी भाईचारे के ऐसे बीज बोना जिससे देश की एकता और अखण्डता का ताना बाना मजबूत बना रहे है।
सुबह की पहली किरण पढ़ने के साथ ही यहाँ तम्बुओ के इस शहर की अनोखी दुनिया शुरू हो जाती है। मणिपुर के पेना वादक कलाकारो की ईश प्रार्थना के साथ हुई सुबह के बाद यहाँ देश भर के कई राज्यो का भक्ति और अध्यात्म का रंग बिखर जाता है। सुबह जैसे जैसे आगे सरकती है यहा का जीवन के रंग भी बदलने लगते है। प्यार और मस्ती के रस से सराबोर इनकी गतिविधियां हर किसी का ध्यान अपनी तरह खीच रही है।
देश के अलग अलग राज्यो से आये इन लोगो के अलग भाषा, जुदा मजहब और फर्क बोलियो कोई मायने नहीं रखती। अपनी अपनी लोक संस्कृति को एक दूसरे के साथ मिलकर जीना सीख रहे इन लोक कर्मियो के लिए यह अनूठी दुनिया है। ख़ास बात यह है की इस पूरे आयोजन में सरकार इन्हे फूटी कौड़ी भी नहीं देती अपनी गाढ़ी कमाई लेकर ये अपने राज्यो से आते है और अपनी अपनी माटी का पैगाम देकर वापस अपनी धरती को लौट जाते है।












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