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Eid 2021: जानिए कब दिखेगा चांद, किस दिन मनाई जाएगी ईद?

नई दिल्ली, 11 मई। इन दिनों रमजान का पाक महीना चल रहा है, कहते हैं ये महीना सीधे खुदा से साक्षात्कार करने का होता है। एक महीने के रोजे के बाद हर किसी को बस अब ईद का इंतजार है। अगर 12 मई को चांद दिखाई देगा तो ईद 13 मई को होगी और अगर 13 मई को ईद का चांद नजर आता है तो ईद 14 मई को मनाई जाएगी यानी कुल मिलाकर ईद की तारीख चांद पर ही निर्भर करती है। दरअसल इस्लामिक कैलेंडर चांद की गति पर आधारित है, वैसे परंपरानुसार ईद-उल-फितर का पर्व 'शव्वाल' की पहली तारीख को मनाया जाता है, जो कि रमजान के महीने के खत्म होने पर शुरू होता है।

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    ईद-उल-फितर को मीठी ईद कहते हैं

    ईद-उल-फितर को मीठी ईद कहते हैं

    मालूम हो कि ईद-उल-फितर को मीठी ईद कहा जाता है क्योंकि इस दिन घरों में सेवईं बनने की पंरपरा है। लोग इस दिन अपने घरों को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाते हैं और खुद भी सजते हैं। घरों में पकवान बनते हैं और सेवईं तो इस पर्व का खास त्योहार है। इस दिन लोग नमाज अता करने के बाद लोगों को गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। ये पर्व खुशियों और भाईचारे का मानक है और इसलिए इस त्योहार का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं।

    कुछ खास बातें

    कुछ खास बातें

    इस्लाम में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना गया है, इस पूरे महीने में सभी मुसलमान रोजे रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि 610 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद साहब पर लेयलत-उल-कद्र के मौके पर पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान शरीफ नाजिल हुई थी इसलिए इस्लाम में रमजान को पाक माह का दर्जा दिया गया है, इस बार ये पाक महीना 12 अप्रैल से शुरू हुआ था जो कि 12 मई को खत्म होगा।

     सुबह 'सहरी' और शाम को 'इफ्तार'

    सुबह 'सहरी' और शाम को 'इफ्तार'

    रमजान के महीने में, मुसलमान सुबह से सूर्यास्त तक रोजे रखते हैं। रोजे की शुरुआत से पहले 'सहरी' की जाती है, जो कि सूर्योदय से पहले होता है, जिसमें हर दिन सुबह तय समय पर भोजन किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता और ना ही पानी पिया जाता है।

    'सहरी' करने को 'सुन्नत' कहा जाता है

    'सहरी' करने को 'सुन्नत' कहा जाता है। वहीं जब शाम के समय सूरज डूब जाता है तब रोजेदार रोजा खोलते हैं जिसे 'इफ्तार' कहा जाता है। एक महीने तक रोजे रखना का मतलब खुदा में यकीन रखना ,उसकी इबादत करना, खुद को संयमित और अनुशासन में रखना, मन में आ रहे बुरे विचारों का त्याग करना और अपने गुनाहों से तौबा करना होता है।

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