योगी सरकार बता सकती है वक्फ की जमीन के उचित उपयोग का तरीका

आम तौर पर गैर मुस्लिम वक्फ के बारे में ज्यादा नहीं जानते। वक्फ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है रोकना। इस्लामिक नजरिए से इसका मतलब है, वह सम्पत्ति जो मुसलमान के हित में अल्लाह के नाम पर दान दे दी गई हो। मान लो आपके पास कोई जमीन है, जिसे आप चाहते हैं कि वह लोगों के काम आए, तो आप उसे दान करते हैं। देश भर में बनी लाखों धर्मशालाएं सनातनधर्मियों के दान से ही बनी हैं। मुसलमान दान की प्रॉपर्टी को वक्फ कहते हैं, और दान की प्रॉपर्टी को वक्फ में शामिल करवाते हैं। इस जमीन पर हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, कब्रिस्तान बना सकते हैं, जो सभी मुसलमानों के काम में आए।

इस्लामिक इतिहास के मुताबिक हजरत उमर को खैबर की लड़ाई में जमीन का एक टुकड़ा दान में मिला था, जिसके बारे में उन्होंने पैगंबर मोहम्मद से पूछा कि इसका क्या करना चाहिए। मोहम्मद साहब ने कहा कि इसको इसी तरह रखिए और इससे होने वाले फायदे को दान में दें, जिससे मुसलमानों को फायदा पहुंचे। इसके लिए कुछ शर्तें रखी गईं। जैसे उस प्रॉपर्टी को एक बार दान दे कर वापस नहीं ले सकते। किसी को विरासत में नहीं दिया जा सकता। इसे बेचा नहीं जाएगा, लेकिन उसे किराए पर या लीज पर दिया जा सकता है।
यह जो देश में गलतफहमी है कि वक्फ की सम्पत्ति का सिर्फ मुसलमानों के हित में इस्तेमाल किया जा सकता है, यह गलतफहमी योगी आदित्यनाथ दूर कर सकते हैं। योगी आदित्यनाथ कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जो सारे देश के लिए उदाहरण बनेगा। हो सकता है कि जैसे असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की वक्फ सम्पत्ति के सर्वे की मुखालफत की है, योगी के अगले कदम पर भी देश में बवाल खड़ा हो। लेकिन योगी आदित्यानाथ क़ानून और संविधान के दायरे में ही कुछ ऐसा करने जा रहे हैं कि मुसलमानों का एक वर्ग उनके साथ खड़ा हो जाएगा, क्योंकि वह इस्लामिक परम्पराओं के अनुसार भी होगा।
वक्फ बोर्ड का क़ानून 1954 में संसद में पास हुआ था, लेकिन नरसिंह राव सरकार ने 1996 के लोकसभा चुनावों से पहले उस क़ानून को निरस्त करके नया क़ानून बना दिया, जिसमें वक्फ सम्पत्ति को संभालने वाले वक्फ बोर्ड को ज्यादा शक्तियां दी गई। इसी पावर के बेजा इस्तेमाल पर अब देश भर में बवाल मचा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में इस क़ानून को रद्द करने की याचिकाएं दाखिल हैं। वक्फ बोर्डों ने देश भर में जगह जगह पर हिन्दुओं की सम्पत्ति को बिना किसी आधार के वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है। पिछले दिनों तमिलनाडु के एक पूरे गाँव को वक्फ ने अपनी सम्पत्ति बता दिया था, जिसमें इस्लाम की उत्पत्ति से भी सौ साल पहले बना हुआ एक मन्दिर भी था। यह 1995 में मिले असीमित अधिकारों की वजह से हुआ।
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इसी तरह यूपी की अखिलेश यादव सरकार के समय शिया वक्फ बोर्ड ने लखनऊ के एक 150 साल पुराने शिव मन्दिर की जमीन को वक्फ रिकार्ड में दर्ज कर लिया, फिर उसे एक माफिया को किराए पर दे दिया। माफिया ने उस जमीन पर प्लाट बना कर बेच दिए। इसमें इस्लामिक परंपराओं और क़ानून का भी उलंघन हुआ। जब कोई जमीन दान में मिली ही नहीं थी, तो उसे वक्फ के रिकार्ड में दर्ज कैसे किया गया? फिर दूसरे धर्म के नाम पहले से रिकार्ड में दर्ज जमीन दूसरे धर्म को कैसे दान दी जा सकती है, फिर जमीन दान में दी किसने? वक्फ बोर्ड के पास किसी सवाल का कोई जवाब नहीं है।
सेक्यूलरिज्म के नाम पर सरकारें ये सब होने दे रही हैं जबकि कोई भी प्रॉपर्टी वक्फ में दर्ज होने का एक नियम है। कोई प्रॉपर्टी वक्फ के तहत तब ही आएगी जब उसके लिए वक्फनामा या कहें कि एग्रीमेंट तैयार होगा। जिसमें बताना होगा कि किस मकसद से आप दान कर रहे हैं। फिर वक्फ बोर्ड सर्वे करता है। फिर बाकी कागजी काम, जैसे सरकार के रेवेन्यू रिकॉर्ड में लिस्ट कराना। लेकिन यहाँ तो मन्दिर की जमीन पर कॉलोनी बना कर बेच दी गई। मान लीजिए वह प्रॉपर्टी वक्फ की ही थी तो इस्लामिक नियम कहते हैं कि वक्फ की जमीन बेची नहीं जा सकती। यह सरकारी अफसरों की मिलीभगत से हुआ, क्योंकि मन्दिर के नाम पर रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी को किसी और ने कैसे बेच दिया और रजिस्ट्रार ने कैसे रजिस्ट्री कर दी?
वक्फ का कैसे दुरूपयोग हो रहा है, यह इसका सिर्फ एक उदाहरण है। देश के बंटवारे के बाद मुसलमानों ने वक्फ की प्रॉपर्टी पर जम कर कब्जे किए। सारे देश में कहीं एक उदाहरण नहीं मिलेगा, जहां वक्फ की जमीन पर मन्दिर बना हो या हिन्दुओं ने कब्जा किया हो। भारत सरकार ने वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (WAMSI) प्रोजेक्ट शुरू किया था। ऑनलाइन वक्फ की संपत्तियों की जानकारी आप इनटरनेट पर जाकर wamsi.nic.in पर देख सकते हैं।
30 सितम्बर 2022 के रिकॉर्ड मुताबिक देशभर के 32 वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 3,54,628 वक्फ एस्टेट्स थे। लेकिन अगले दिन 1 अक्टूबर 2022 को वेबसाइट पर वक्फ एस्टेट्स घटकर 220,442 रह गए। 30 सितम्बर 2022 को 8,58,233 अचल प्रापर्टी दिखाई गई थी, इसमें से 57,486 वक्फ प्रॉपर्टी पर गैर-कानूनी कब्जा था और करीब 4,35,417 वक्फ प्रॉपर्टी की कोई जानकारी ही नहीं थी। लेकिन 1 अक्टूबर को 762,595 अचल संपत्ति दिखाई गई थी और 5 अक्टूबर को 763,039 अचल सम्पत्ति दिखाई गई। यानी वक्फ मामलों में देश भर में गोलमाल हो रहा है। हर रोज वक्फ संपत्तियों की संख्या घट बढ़ रही है।
योगी सरकार ने जब से उत्तर प्रदेश की वक्फ संपत्तियों की जांच करने का आदेश दिया है, तब से वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे की जानकारी निकलकर सामने आ रही हैं। पूरे प्रदेश में वक्फ की सैंकड़ों संपत्तियों पर मुसलमानों का अवैध कब्जा है।
अब आपको बताते हैं कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने वक्फ बोर्ड को कैसे असीमित अधिकार देकर सरकारी जमीनों को भी वक्फ की जमीन बना दिया था। सात अप्रैल, 1989 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया था कि यदि बंजर, भीटा, ऊसर आदि सरकारी भूमि का इस्तेमाल वक्फ के रूप में किया जा रहा हो, मसलन उस पर कब्रिस्तान, मस्जिद या ईदगाह हो, तो उसे वक्फ संपत्ति के रूप में ही दर्ज कर दिया जाए। यह आदेश कांग्रेसी मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने जारी किया था। इस आदेश के तहत प्रदेश में लाखों हेक्टेयर बंजर, भीटा, ऊसर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गईं।
लेकिन अब योगी सरकार ने 33 साल पुराने इस आदेश को रद्द कर दिया है और वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराने का आदेश दिया है। ऐसी भी अनेक शिकायतें आई थीं कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को भी 33 साल पुराने आदेश का फायदा उठाकर पहले वक्फ में दर्ज कराया गया और फिर बेचा गया। आवासीय कॉलोनियां तक डेवलप कर दी गई और वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
सर्वे पूरा होने के बाद योगी सरकार इन पर कार्रवाई करेगी। योगी आदित्यानाथ की योजना का इशारा उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश अंसारी और अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री धर्मपाल सिंह ने किया है। उन्होंने कहा है कि यूपी सरकार राज्य में कब्जाई गई वक्फ भूमि पर सारे अवैध निर्माण गिराएगी और इसके बाद वहां पर अस्पताल और स्कूल बनाए जाएंगे जो बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सारे समाज के काम आएँगे। धर्मपाल सिंह ने कहा है कि वक्फ की जमीन ईश्वर की जमीन है, उस पर कब्जे का किसी को अधिकार नहीं।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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