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इंडिया गेट से: मदरसों और वक्फ की बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी

उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री इन दो राज्यों में पिछले 75 साल से हो रही गलतियों को सुधारने में लगे हैं। जिन मदरसों से पिछले 75 साल से उन्मादी पैदा हो रहे थे उनकी पड़ताल करने में जुटे हैं। कोई यह नहीं कहता कि सभी मदरसों में उन्मादी और आतंकी पैदा हो रहे है, लेकिन अनेक मदरसों में उन्मादी और आतंकी पैदा हो रहे हैं। यह अब अनेक मुस्लिम विद्वान भी कह रहे हैं। इसलिए इन दोनों राज्यों में मदरसों पर कड़ी निगरानी की जा रही है। उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे करवाया जा रहा है। अब यूपी सरकार ने वक्फ संपत्तियों की जांच का भी आदेश दे दिया है।

Survey of Waqf and Madrasa properties needed

जब यूपी सरकार ने मदरसों के सर्वे का आदेश दिया था तो कट्टरपंथी मुस्लिम भडक गए थे। उन्होंने कहना शुरू कर दिया था कि मुसलमानों को टार्गेट किया जा रहा है। सिर्फ मुस्लिमों के मदरसों का सर्वे क्यों करवाया जा रहा है। आरएसएस के स्कूलों का सर्वे क्यों नहीं करवाया जा रहा। असुदुद्दीन ओवेसी ने तो मदरसों के सर्वे को एन.आर.सी. से जोड़ दिया कि मदरसों का सर्वे नागरिकता रजिस्टर बनाने के लिए हो रहा है। अब इन दोनों का आपस में कोई संबंध न हो लेकिन मुसलमानों को भडकाने के लिए नफरत की राजनीति हो रही है। ओवैसी को यह अच्छी तरह पता है कि आर.एस.एस सनातन धर्म की शिक्षा देने के लिए स्कूल नहीं चला रहा। इसके बावजूद वह गुमराह करने वाले बयान देते हैं।

आरएसएस के स्कूलों और मदरसों की तुलना गलत

आर.एस.एस के सारे स्कूल राज्यों के बोर्डों के अधीन हैं और जिला शिक्षा अधिकारियों की निगरानी में ही चलते हैं। आर.एस.एस के स्कूलों में अनेक मुस्लिम छात्र भी पढ़ रहे हैं। आर.एस.एस ने 2020 में खुद आंकड़े पेश किए थे कि देश भर में चल रहे उनके स्कूलों में 47 हजार मुस्लिम छात्र पढ़ रहे हैं और 270 मुस्लिम अध्यापक पढ़ा रहे हैं। नूर-ए-हसन सरकारी नौकरी ठुकरा कर चंदौली जिले के एक सरस्वती शिशु मन्दिर में पढा रहा है। पूरे उत्तर प्रदेश में 12 हजार गैर हिन्दू इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं जिनमें मुस्लिमों के अलावा ईसाई भी हैं। 2016 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 49 जिलों के स्कूलों में 6890 मुस्लिम छात्र थे जो 2019 में बढ़कर 9037 हो चुके थे। लेकिन इन तथ्यों को दरकिनार कर असद्दुद्दीन ओवैसी नफरत फैलाने के लिए तथाकथित सेक्युलर मीडिया को आधारहीन मसाला देते रहते हैं।

मदरसों के बाद वक्फ संपत्तियों का सर्वे

योगी सरकार ने मदरसों के सर्वेक्षण के बाद वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति का सर्वे करवाने के आदेश भी दे दिए हैं। असद्दुद्दीन ओवैसी का फिर वही बयान आया है कि सिर्फ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति का सर्वे क्यों करवाया जा रहा है। हिन्दुओं की धार्मिक सम्पत्ति का सर्वे क्यों नहीं करवाया जा रहा। यह सर्वे मुस्लिमों को टार्गेट करने के लिए करवाया जा रहा है। एन.आर.सी के लिए करवाया जा रहा है। वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जा करने के उद्देश्य से सर्वे करवाया जा रहा है। सिर्फ मुस्लिम क्यों, सरकार सभी का सर्वे करवाएं। दोनों ही मुद्दों पर ओवैसी ने हिन्दुओं के स्कूलों और धार्मिक स्थलों का सर्वे नहीं करवाने का मुद्दा उठाया है। वह एक जैसा क़ानून, एक जैसा व्यवहार और एक जैसा नियम चाहते हैं तो हिन्दू कब तैयार नहीं? हिन्दू तो तैयार हैं। लागू करवाईए कामन सिविल कोड। ओवैसी फिर कॉमन सिविल कोड का विरोध क्यों करते है?

हिन्दू मंदिरों का भी हो सर्वे

ओवैसी एक बैरिस्टर हैं। वह अच्छी तरह से जानते हैं कि दोनों ही सर्वे मुस्लिम को टार्गेट करने के लिए नहीं किए जा रहे। सर्वे क़ानून के तहत हो रहे हैं। 1995 के वक्फ बोर्ड कानून में हर दस साल बाद सर्वे का प्रावधान है। सरकार उसी प्रावधान के तहत सर्वे करवा रही है। दूसरी बात यह कि हिन्दू धार्मिक संस्थानों का नियन्त्रण और संचालन सरकार के अधीन है। सरकार मन्दिरों से टैक्स भी वसूलती है। इसके अलावा किसी क़ानून में हिन्दू धार्मिक संस्थानों के सर्वे का प्रावधान नहीं है। बल्कि हिन्दू तो चाहते हैं कि यह प्रावधान होना चाहिए।

हिन्दू धार्मिक प्रापर्टी का सर्वे होना चाहिए ताकि पता चल सके कि कितने हिन्दू मन्दिरों पर अन्य धर्म के लोगों ने कब्जा किया हुआ है। हाल ही में इंदौर नगर निगम ने एक सर्वे करवाया था तो पता चला कि एक मुस्लिम मोहल्ले के मन्दिरों के आगे दीवार खडी कर के मुस्लिमों ने कब्जे कर रखे हैं। मुस्लिम अयोध्या काशी में तो 1991 के क़ानून की दुहाई देते हैं लेकिन कश्मीर में 1991 के बाद सैंकड़ों मन्दिरों को मस्जिद बना दिया गया, उसकी बात नहीं करते। इसलिए यह जरूरी है कि हिन्दू धार्मिक स्थलों का भी राष्ट्रव्यापी सर्वे हो। मोदी सरकार को इसकी पहल जल्दी से जल्दी करनी चाहिए।

वक्फ संपत्ति पर पहले से है सर्वे का प्रावधान

जहां तक वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जे का सवाल है तो नरसिंह राव सरकार ने वक्फ बोर्ड को इतने अधिकार दे गए हैं कि वक्फ बोर्ड ही किसी गैर मुस्लिम की जमीन हथिया सकता है। कोई गैर मुस्लिम या सरकार वक्फ बोर्ड की जमीन नहीं हथिया सकते। लेकिन सरकार को पता तो चलना चाहिए कि वक्फ बोर्ड ने सरकारी या गैर सरकारी कितनी जमीन हथियाई हुई है। यह भी पता चलना चाहिए कि वक्फ बोर्ड की कितनी जमीनों पर मुसलमानों ने नाजायज कब्जा किया हुआ है।

असुदुद्दीन ओवैसी तो वक्फ बोर्ड की जमीनों के सर्वे पर एतराज कर रहे हैं लेकिन पहली अक्टूबर 2021 को तेलंगाना विधानसभा में उनके छोटे भाई अकबरूद्दीन ने खुद वक्फ बोर्ड की जमीनों का सर्वे करवाने की मांग की थी। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जे की सीबीआई से जांच करवाई जाए। ओवैसी के अपने राज्य तेलंगाना और उससे पहले आंध्र प्रदेश में तो हर दस साल बाद सर्वेक्षण होता रहा है।

आंध्र प्रदेश में 1955 में वक्फ सम्पत्ति का पहला सर्वे किया गया था जो 10 साल तक चला था। इसमें 38,529 वक्फ संस्थाओं की 1 लाख 33 हजार एकड़ जमीन को नोटिफाई किया गया था। इसके बाद 2001 में आंध्र प्रदेश सरकार ने वक्फ प्रॉपर्टीज़ के दूसरे सर्वे का ऐलान किया था जो 2016 में पूरा हुआ था। अक्टूबर 2017 में तेलंगाना में वक्फ बोर्ड ने खुद अपनी पूरी संपत्ति का लेखा जोखा रखने और इसकी निगरानी के लिए सर्वे कराने का ऐलान किया था।

अमरोहा के एक शायर थे कफील अमरोहवी। उनकी मशहूर नज्म है कि बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी। तो क्या इसी डर से सर्वेक्षण का विरोध हो रहा है कि बात कहीं दूर तलक न चली जाए? मदरसों और वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति के सर्वे में बड़ा सवाल यह है कि एतराज क्यों है? क्या इसलिए कि वक्फ बोर्ड ने दो लाख गैर मुस्लिम और सरकारी सम्पत्तियों पर जो कब्जा हुआ है उसका राज खुल जाएगा?

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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