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Women Voters: महिला वोटरों के सियासी पिच पर मोदी की चुनावी बैटिंग

Women Voters: संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी आज पहली बार भोपाल पहुंचे जहां उन्होंने जंबूरी मैदान में कार्यकर्ता महाकुंभ को संबोधित किया। भोपाल के जंबूरी मैदान के 102 एकड़ क्षेत्र में टेंट लगाया गया था। भाजपा का दावा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा कार्यकर्ता महाकुंभ था जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया।

खास बात यह रही कि महिला आरक्षण विधेयक के पास होने की खुशी में भाजपा के महिला लोकप्रतिनिधियों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन किया गया। भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर जंबूरी मैदान में तीसरी बार कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करने पहुंचे मोदी ने प्रदेश में चल रही पांच यात्राओं का भी समापन किया। इस मौके पर मोदी ने मध्य प्रदेश की महिला वोटरों को याद दिलाया कि मोदी ने जो गारंटी दी थी, उसे 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून बनाकर पूरा कर दिया है।

Women Voters: Modis election batting on the political pitch of women voters

भोपाल के बाद प्रधानमंत्री मोदी दोपहर को जयपुर में परिवर्तन संकल्प महासभा को संबोधित करने पहुंचे। मोदी साढ़े चार साल बाद जयपुर पहुंचे हैं। इसके पहले मोदी 1 मई 2019 को जयपुर में सभा को संबोधित करने आए थे। आज जयपुर की दादिया पंचायत सांगानेर में मोदी की सभा हुई जहां मंच संचालन से लेकर पंडाल की सभी व्यवस्थाएं महिलाओं ने संभाला। मोदी के इन दोनों कार्यक्रमों की खास बात यह रही कि आयोजन के प्रमुख कार्यों की जिम्मेवारी भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने ही उठाया।

शनिवार को वाराणसी में महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी पिच तैयार करने की शुरूआत कर चुके मोदी भोपाल और राजस्थान में भी नारी शक्ति वंदन विधेयक पर अपनी सरकार की पीठ थपथपाने के साथ ही महिलाओं के लिए उनकी सरकार के किए गए कामों का भी जिक्र किया। साफ है जो आरक्षण अभी दिया नहीं गया है उसका सिर्फ कानून बना है उसका लाभ लेने का काम मोदी और भाजपा दोनों ने शुरु कर दिया है। कुछ ही दिनों बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होंगे जिसमें वो फसल बोने की कठिनाई उठाये बिना फसल काटने की तैयारी कर रहे हैं।

महिला वोटरों का बढता महत्व

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भारत में कुल मतदाता 91 करोड़ थे, जिसमें से 43.8 प्रतिशत महिला मतदाता और 47.2 प्रतिशत पुरूष मतदाता थे। वहीं 2022 में कुल मतदाता 95.1 करोड़ थे, जिसमें 46.1 प्रतिशत महिला मतदाता और 49 प्रतिशत पुरूष मतदाता थे। ध्यान देने योग्य यह है कि 2019 और 2022 के बीच महिला मतदाताओं में जहां 5.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं पुरूष मतदाताओं में 3.6 प्रतिशत की बढोतरी हुई। मोदी की नजर महिलाओं के वोट पर है जिसके दम पर मोदी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव की जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं।

चुनाव आयोग के मुताबिक 2019 के चुनाव में कुल 66.8 प्रतिशत मतदान हुआ था और इसमें पुरूष और महिला की करीब करीब आधी भागीदारी थी। 2019 के चुनाव में भाजपा को कुल 37 फीसदी वोट मिले थे जिसमें लगभग 36 प्रतिशत वोट महिलाओं का था। इससे वह महिला मतदाता वर्ग की सबसे पसंदीदा पार्टी बनकर उभरी है। 2019 के आम चुनाव में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को सिर्फ 20 फीसदी महिलाओं ने वोट दिए थे।

मोदी का महिला वोटरों पर फोकस

लोकसभा चुनाव से लगभग 120 दिन पहले महिला आरक्षण कानून लाकर मोदी ने महिला मतदाताओं को रिझाने की कोशिशों में नया अध्याय जोड़ दिया है। इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षाबंधन के दिन गैस सिलेण्डर की कीमतों में 200 रूपये कम कर दिए थे और 2016 में शुरू की गई उज्वला योजना को और 75 लाख घरों तक बढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी आने वाले चुनाव में स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन, सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सरीखी दूसरी योजनाओं को भी यह कहकर प्रचारित करेगी कि इनसे महिलाओं को गरिमा, जीवनयापन में आसानी, वित्तीय शक्ति और समावेशन, आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहे हैं और यह सब मोदी के कारण संभव हो रहा है।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के बाद से कई योजनाए ऐसी शुरू की जिसकी बड़ी लाभार्थी महिलाएं रही हैं। मोदी लगातार नारी शक्ति का जिक्र करते रहे और उनके आर्थिक और सामाजिक उत्थान की बात भी करते रहे। जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दूसरी बार भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला, उस समय मोदी ने कहा था कि 'हमारी इस जीत की सारथी महिलाएं रहीं।' जनवरी 2023 में दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपने संबोधन में मोदी ने कहा था कि 'महिला मोर्चा को अधिक से अधिक महिलाओं को भाजपा से जोड़ने के लिए काम करना चाहिए।' इसके बाद केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की एक करोड़ लाभार्थी महिलाओ से संपर्क कर उनके साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डालने का कार्यक्रम महिला मोर्चा ने शुरू किया था।

महिला मोर्चा को विशेष जिम्मेवारी

भाजपा नेतृत्व ने महिला मोर्चा को टास्क देकर कहा था कि वह मोदी सरकार की योजनाओं की लाभार्थी महिलाओं से मिलकर जाने कि कैसे मोदी की योजनाओं से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इसके लिए महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को 24 घंटे का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर मोदी सरकार की 12 योजनाओं के बारे में जानकारी दी गयी। इसके साथ ही भाजपा ने फीडबैक का सिस्टम भी बनाया है, जिसके तहत जमीनी स्तर पर काम कर रही महिला कार्यकर्ता को लाभार्थी महिला से कोई फीडबैक मिले तो वह सीधे दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज सकती है।

संसद से महिला आरक्षण का विधेयक पारित करने के बाद अब अक्टूबर के अंत में भाजपा भोपाल और जयपुर में महिला लाभार्थी सम्मेेलन करने वाली है जिसमें लाभार्थी महिलाओं से मोदी संपर्क और चर्चा करेंगे। इसके साथ ही भाजपा का महिला मोर्चा चुनाव वाले राज्यों के हर जिले से दस महिलाओं को सुषमा स्वराज सम्मान से सम्मानित करने का कार्यक्रम करेगी। यह अभियान लोकसभा चुनाव तक देश के सभी जिलों में पूरा करने की योजना है।

महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के बाद अब भाजपा की महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सामाजिक समरसता और अन्न अभियान द्वारा कम से कम दो दलित महिलाओं को घर पर बुलाकर भोजन करवायेंगी। इसके अलावा भाजपा सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, महिला प्रोफेशनल्स और महिला योग गुरू जैसे 50 क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं से संवाद कर पार्टी से जोड़ने का काम करेंगी। इसे स्मार्ट वूमन लीड़र फेस्टिवल नाम दिया गया है।

महिला आरक्षण को भुनाने के लिए भाजपा 2024 में पहली बार मतदान करने वाली लड़कियों के लिए 'माय फर्स्ट वोट फार मोदी' अभियान चलाएगी। इस अभियान की जिम्मेदारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और महिला मोर्चा की होगी। यह दोनों संगठन पहली बार मतदान करने वाली लड़कियों का वोटर कार्ड बनाने में मदद करने से लेकर मोदी को वोट क्यों देना चाहिए इस बारे में भी विस्तार से बताएगें।

योजनाओं के जरिए नाराजगी दूर करने का प्रयास

भाजपा का यह भी आकलन है कि महिला आरक्षण विधेयक से उसे इसी साल महिला पहलवानों के उस विरोध प्रदर्शन से जो नुकसान हुआ है उसकी भी भरपाई होगी। एक कारण यह भी है कि भाजपा महंगाई सरीखे आर्थिक मुद्दों को लेकर चिंतित थी जिसका असर महिला मतदाताओं पर उनकी पकड़ पर पड़ रहा था। भाजपा का मानना है कि अगर पार्टी महिलाओं पर फोकस करते हुए दिखेगी तो महिला वोटरों में आई नाराजगी को कम करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने 'जेंडर गैप' कम करने के लिए बनाए गए 'जेंडर बजट' में पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत का इजाफा किया है। इसके अलावा जिन योजनाओं में 100 प्रतिशत आवंटन महिलाओं के लिए है, उसके लिए 88 हजार करोड़ रू आवंटित किये गये है, जो पूर्व के मुकाबले 228 प्रतिशत ज्यादा है। यही कारण भी है कि राजस्थान में 1.3 करोड़ महिलाओं को स्मार्ट फोन, 3 साल डेटा फ्री और महिलाओें के लिए 1200 करोड़ का बजट रखा गया है। मध्य प्रदेश में लाडली बहना और उज्वला योजना के लिए 19,650 करोड़ रूपये का बजट रखा गया है।

हालांकि एक ओर भाजपा महिला वोटरों को साधने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर उसकी दो बड़ी महिला नेता नाराज हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं को शामिल करने की मांग पार्टी से की है, वहीं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश से निकली चारों यात्राओं से दूरी बनाकर भाजपा को असहज कर दिया है। असंतुष्ट चल रही इन दो महिला नेत्रियों से मोदी कैसे निपटते हैं, यह देखना बाकी है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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