UPGIS 2023: यूपी में आर्थिक विकास के जरिए जनता का विश्वास जीतने की पहल
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या ये थी कि आर्थिक विकास के जितने वायदे राजनीतिक नेताओं द्वारा किये जाते थे, वो वायदे ही रह जाते थे। लेकिन अब मोदी योगी मिलकर यूपी के हालात बदलने का प्रयास कर रहे हैं।

UPGIS 2023: उत्तर प्रदेश में अब आर्थिक विकास या औद्योगीकरण सिर्फ वादा नहीं इरादा बन गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार 10 फरवरी से शुरू हुआ 'यूपी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट' 2023 का आयोजन विशुद्ध रूप से प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने का मकसद लिए दिख रहा है। कुछ शब्दों को छोड़ दें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उद्घाटन भाषण भी पूरी तरह प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के प्रयासों को बताने पर ही केंद्रित रहा। अब भाजपा प्रदेश में 'विकास पर विश्वास' के मंत्र और 'बदहाल बनाम खुशहाल' उत्तर प्रदेश के अस्त्र से विपक्ष की घेराबंदी करेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह साल पहले प्रदेश की आर्थिक बदहाली का उल्लेख कर गैर भाजपा सरकारों को घेरा था। फिर 2017 में प्रदेश में सत्तारूढ़ हुई योगी आदित्यनाथ की सरकार के फैसलों से इस स्थिति में बदलाव आया। तमाम अव्यावहारिक, अनुपयोगी तथा व्यापार-उद्योग के लिए समस्या खड़े करने वाले कानूनों को खत्म कर निवेशकों के लिए उद्योग लगाने का रास्ता आसान बनाया गया। उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए केंद्रीय बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रावधान किया गया। निर्यात और आयात की सुविधा देने के लिए उत्तर प्रदेश को मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों से जोड़ने का काम शुरु हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में बताया कि उद्योगपतियों व उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बजट में ग्रीन एनर्जी के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए निवेश पर तमाम सहूलियतें देने के प्रावधान किये गये हैं। प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन के लिए भी सहूलियतें दी जा रही हैं। उनके भाषण से साफ हो गया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वह लोगों को समझाना चाह रहे हैं कि भाजपा ने सिर्फ वायदे नहीं किए बल्कि उन्हें पूरा किया है।
लखनऊ में मोदी ने एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश की है कि छह साल में यूपी की आर्थिक सेहत में इतने सुधार की बड़ी वजह डबल इंजन सरकार है। अगर किसी कारण केंद्र या प्रदेश में अलग-अलग दलों की सरकारें बन गईं तो यूपी की आर्थिक सेहत में सुधार की प्रक्रिया रुक जाएगी।
एक तरह से मोदी ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि 2024 में लोकसभा की 80 सीटों के लिहाज से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लोगों की जरा सी चूक तरक्की की इस रफ्तार में ब्रेक लगाकर यूपी की आर्थिक सेहत फिर बिगाड़ सकती है।
शायद इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश को कई देशों से भी बड़ा बताते हुए देश की अर्थव्यवस्था का इंजन और ड्राइवर बताया। मतलब एक तरह से उन्होंने यूपी के महत्व व सरोकारों के सहारे यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि यूपी में भाजपा की राह की राजनीतिक बाधा देश के विकास, युवाओं को रोजगार, सीमाओं की सुरक्षा के साथ आंतरिक सुरक्षा के लिए भी संकट खड़ा कर सकती है।
दरअसल, साल 2013 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हुए नरेन्द्र मोदी का अब तक का सफर अर्थ के शास्त्र से राजनीतिक सफलता हासिल करना रहा है। यहां 'ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट' के उद्घाटन सत्र के संबोधन के जरिये भी उन्होंने इसी का प्रयोग किया। अर्थशास्त्री प्रो. अंबिका प्रसाद तिवारी के अनुसार यूपी में पहले राजनेताओं की छवि वादा खिलाफी की बन गई थी। लोग यह मानकर चलने लगे थे कि चुनावी वायदों का कोई मतलब नहीं है। नरेन्द्र मोदी ने राजनेताओं की इसी नकारात्मक छवि को अपनी राजनीतिक सफलता का जरिया बनाया।
राजनीतिक आलोचना के बावजूद अब हर कोई मानता है कि बीते आठ सालों में प्रधानमंत्री मोदी की छवि घोषणाओं पर काम करने वाले नेता के रूप में स्थापित हो गई है। प्रो. तिवारी की बात सही लगती है। तभी तो प्रधानमंत्री मोदी ने 2017 से पहले प्रदेश में बदहाल कानून-व्यवस्था, बदहाल सड़कों, आए दिन होने वाले करोड़ों रुपये के घोटालों का जिक्र करते हुए अतीत की याद दिलाई। साथ ही प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद तेजी से बन रहे एक्सप्रेस वे, देश में सबसे ज्यादा छह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के उत्तर प्रदेश में निर्माण, देश के दो डिफेंस कॉरीडोर में एक के यूपी में बनने, बिजली आपूर्ति दुरुस्त होने, एक के बाद एक नए विश्वविद्यालयों के निर्माण का उल्लेख कर इस बदलाव की कहानी को लोगों के दिल व दिमाग में भी उतारने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में खुद को उत्तर प्रदेश का बताते हुए कहा कि राज्य में उद्योगपतियों का निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के साथ केंद्र सरकार से भी पूरा समर्थन व सहयोग देने के लिए आश्वस्त किया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस समिट के जरिए लगभग 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के समझौतों में 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूर्वाचंल तथा 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से बुंदेलखंड में उद्योग-धंधे स्थापित करने की जानकारी दी। योगी ने बताया कि इस समिट के जरिये हुए समझौतों से लगभग 1 लाख युवाओं को नौकरी मिलेगी।
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यह बताने की जरूरत नहीं है कि पूर्वाचंल और बुंदेलखंड का विकास प्रदेश की सियासत का बड़ा मुद्दा रहा है। संकेतों से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकार का इन क्षेत्रों के विकास पर खास फोकस है ताकि जनता का आर्थिक सुधार भी हो और उसका राजनीतिक लाभ भी मिले।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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