Satish Kaushik: रील लाइफ का कॉमेडियन लेकिन रीयल लाइफ का दमदार व्यक्तित्व
सतीश कौशिश ने भले ही कई फिल्मों का डॉयरेक्शन भी किया हो लेकिन उनकी पहचान एक कॉमेडियन के रूप में ही बनी। रील लाइफ का ये कॉमेडियन रीयल लाइफ का एक दमदार व्यक्तित्व था।

Satish Kaushik: ये 2005 की बात है, कटघरे में बैठे हुए थे सतीश कौशिक और सामने सवाल पूछ रहे थे पत्रकार रजत शर्मा। शो का नाम था 'आप की अदालत'। एक के बाद एक तीखे और कुछ अपमानजनक से लगने वाले सवाल भी, लेकिन हर आरोप के जवाब में हंसते हुए जवाब दे रहे थे फिल्मी दुनिया के 'कलेंडर'। फिर एक ऐसा सवाल हुआ कि दर्शक भी स्तब्ध रह गए।
रजत शर्मा ने सवाल पूछा कि 'तेरे नाम' के सेट पर सलमान खान ने आपके गाल पर थप्पड़ लगा दिया था? शुरू में तो सतीश कौशिक भी हंसे, बोले हां, कई मैगज़ीन ने इसे छापा था, फिर थोड़े सीरियस हुए और बोले, "रजत जी.. दिल्ली का लड़का हूं। करोल बाग की नाई वाली गली का। कोई थप्पड़ लगाएगा तो उसका क्या हाल होगा ये नाई वाली गली में जाकर पूछ लीजिए।"
हालांकि बाद में वो भी हंस दिए, और इस मामले को कैसे तूल मिला ये बताया, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में हर कोई इस बात को बखूबी जानता है कि सलमान खान के लिए कोई भी इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने की हिम्मत नहीं दिखा सकता। सबको याद है कि कैसे विवेक ओबेरॉय ने कैटवॉक करते हुए सलमान से सरेआम हाथ जोड़कर माफी मांगी थी। कैसे सलमान से बिगाड़कर कई लोगों ने बॉलीवुड में अपना कैरियर बर्बाद कर लिया है। बावजूद इसके कलेंडर जैसी फनी छवि में कैद सतीश कौशिक ने थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से देने की बात करके अपने और सलमान दोनों के फैंस को चौंका ही दिया था।
ये सही है कि आम दर्शकों के बीच सतीश कौशिक की जो छवि थी, फिल्मी दुनिया में ठीक उसके उलट थी। वहां हर कोई उन्हें सीरियसली लेता था। शुरुआत से ही उनका हरियाणा और दिल्लीपन उन पर हावी था। दिल से साफ। लोगों की दिल खोलकर मदद करने वाले लेकिन कोई परेशान करे तो उसकी ढंग से बजाने वाले।
तभी तो जब अनुपम खेर के पास एनएसडी में पढ़ते वक्त पैसे नहीं होते थे, वो फलवाले का उधार ना चुका पाने की वजह से उसकी दुकान के आगे से इंस्टीट्यूट नहीं जाते थे। सतीश कौशिक ने उन्हें 80 रुपए उधार दिए थे, लेकिन जब मांगने के बावजूद समय पर पैसे नहीं लौटाए तो डंडा लेकर हॉस्टल भी पहुंच गए थे। सतीश कौशिक में फिल्मी दुनिया में काम करने का इतना जुनून था कि बंबई में खर्च चलाने के लिए एक मिल तक में काम करना स्वीकार कर लिया था। मिल में पहले दिन ही मालिक बनारसी दास अरोड़ा ने उनसे एक गंदा कमरा साफ़ करवा लिया, फिर पेटियां बंद करवाईं, और एक दिन कैशियर भी बना दिए गए। लेकिन शाम को पृथ्वी थिएटर जाना नहीं भूलते थे।
उनका ये जुनून ही था कि पर्दे के पीछे के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। इस बात को भी वो हिम्मत से कबूल करते थे कि उनको एक्टिंग में बहुत ज्यादा अच्छे मौके नहीं मिले तो वो असिस्टेंट डायरेक्शन में भी हाथ आजमाने लगे। ऐसे में शेखर कपूर और जावेद अख्तर जैसे लोगों ने उनके जुनून को समझा। शेखर ने उन्हें फिल्म 'मासूम' से अपने साथ जोड़ा और 'मिस्टर इंडिया' तक आते आते वो एसोसिएट डायरेक्टर हो गए। इस मूवी में भले ही कलेंडर का उनका रोल अमर बन गया, लेकिन सच ये है कि मिस्टर इंडिया में जितना काम उन्होंने किया शेखर ने भी नहीं किया। हर स्टार के कपड़ों से लेकर स्क्रिप्ट के एक एक पन्ने तक का वो ख्याल रखते थे। लोग आज भी चौंक जाते हैं ये जानकर कि कल्ट फिल्म 'जाने भी दो यारों' के डायलॉग सतीश कौशिक ने लिखे थे।
एक्टिंग हो या डायरेक्शन सतीश एक एक सीन के लिए कड़ी मेहनत करते थे। उनके साथी सुहास ने मनमोहन शेट्टी की फिल्म 'चक्र' में उन्हें पहला रोल दिलवाया, एक गुंडे का। एक और फिल्म में इसी तरह का रोल मिला, आप यकीन नहीं करेंगे कि उन्होंने इन रोल्स के लिए गॉडफादर के मार्लोन ब्रांडो का रोल कई बार देखा ये उनका जुनून ही था।
चक्र के लिए उनको फीस मिली केवल 500 रुपए। फिर उनके अंदर का हरियाणवी बाहर निकल आया। फौरन दोस्तों के पास जाकर पार्टी करने के लिए स्लो ट्रेन से फास्ट ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए पटरी पर कूद गए, दोनों तरफ से ट्रेन आ गईं और वो बीच में थरथराते हुए खड़े थे। तब से संकल्प लिया कि कामयाबी पर ज्यादा खुश नहीं और नाकामयाबी पर ज्यादा निराश नहीं होंगे।
लेकिन 'रूप की रानी चोरों का राजा' की नाकामयाबी से वो एकदम सदमे में आ गए। चलती कार में बोनी, श्रीदेवी के सामने फूट फूट कर रोने लगे। करीबियों को पता है कि वो सुसाइड तक करने की सोचने लगे थे। फिर 25 साल बाद उनसे ट्विटर पर माफी भी मांगी, बावजूद इसके उन्हें तमाम फिल्में डायरेक्ट करने को मिलीं, कई बेहतरीन भी साबित हुईं, जिनमें सलमान की 'तेरे नाम' भी थी।
बोनी कपूर ने अनिल कपूर, श्रीदेवी के साथ 'रूप की रानी चोरों का राजा' बनाने का इरादा किया था तो जावेद, शेखर और सतीश कौशिक की तिकड़ी को लिया। लेकिन शेखर कपूर को ये स्क्रिप्ट समझ नहीं आ रही थी, और जावेद साहब से भी उनकी नहीं बन रही थी। शेखर ने फिल्म को छोड़ना ही बेहतर समझा। फिर भी बोनी कपूर फिल्म को बंद नहीं करना चाहते थे। अनिल कपूर भी काफी पैसा लगा चुके थे। उन दिनों 9 या 10 करोड़ की मूवी बनाना बड़ी बात थी।
ऐसे में फिल्म के बीच में शेखर कपूर जैसे दिग्गज के जाने पर सतीश कौशिक जैसे कलेंडर छवि वाले पर फिल्म का दारोमदार छोड़ना ये बताता है कि पर्दे के पीछे जावेद अख्तर, बोनी कपूर, अनिल कपूर, श्री देवी जैसे चेहरों के बीच सतीश कौशिक की कितनी साख थी। तभी उनको डायरेक्टर चुना गया और वाकई में कौशिक ने घटिया स्क्रिप्ट पर भी बेहतरीन काम किया, तमाम लोग ऐसा ही मानते हैं।
हालांकि ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई इसलिए जब भी मीडिया के बीच गए, 'रूप की रानी चोरों का राजा' के लिए कोई सफाई नहीं दी। किसी पर ठीकरा नहीं फोड़ा, बल्कि उसे महा डिजास्टर फिल्म बताया। जावेद साहब की स्क्रिप्ट पर सबने सवाल उठाए, लेकिन वो मरते दम तक उन्हें मेंटर बताते रहे। क्रेडिट भी नहीं लेते थे कामयाब फिल्मों का। ' तेरे नाम' के लिए कहते थे सलमान के बालों का आइडिया चल गया, और सलमान को ही उस हेयर स्टाइल का क्रेडिट देते थे।
इतनी हिम्मत कोई बिरला ही दिखा सकता है कि जब भी उनसे फिल्मों के आइडिया साउथ की फिल्मों से लेने का आरोप लगता, वो बता देते कि उनकी कौन सी फिल्म किस अन्य फिल्म से प्रेरित है। यहां तक कि उनकी ज्यादातर फिल्में फ्लॉप फिल्मों से प्रेरित थीं। आज किसी में है इतनी हिम्मत फ्लॉप फिल्मों का रीमेक बनाने की या फिर इसे स्वीकारने की कि उसके पास मूल आइडिया नहीं है। सतीश कौशिक ने यह तक स्वीकारा कि मुत्थूस्वामी का किरदार उन्होंने महमूद से कॉपी किया था, जो महमूद को उनकी श्रद्धांजलि थी।
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सतीश कौशिक, 'म्हारी छोरियां छोरों से कम है के' जैसी हरियाणवी फिल्म हो या फॉर हांडा साहब जैसा किरदार, हरियाणा की फिल्म इंडस्ट्री बनाने का सपना हो या किरोड़ी लाल कॉलेज में अपने एक्टिंग गुरु के नाम पर ऑडिटोरियम बनाने का सपना, वो लगातार सक्रिय रहे। मुंबई में होली पार्टी, गुरुग्राम में होली पार्टी और उससे ठीक एक हफ्ते पहले चंडीगढ़ में होने वाले चित्र साधना फिल्म फेस्टिवल के प्रचार से उनका जुड़ना बताता है कि डेड होने से पहले वो गेम में बने रहना चाहते थे। लोग उनका गम समय के साथ भूल जायेंगे लेकिन रील्स बनाने में उनकी जोड़ीदार बेटी वंशिका जरूर अपने डैड, अपने पार्टनर को मिस करेगी, सालों तक दीवार पर उसके पापा की तस्वीर के साथ टंगा कलेंडर देखते हुए।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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