Netflix Dispute: नेटफ्लिक्स पर निगाहें, मोदी पर निशाना

दो निर्देशकों ने इसी महीने नेटफ्लिक्स की तरफ आरोपों की बंदूक तान दी है। इन निर्देशकों के नाम हैं अनुराग कश्यप और दिबाकर बनर्जी। इन निर्देशकों की निगाहें भले ही नेटफ्लिक्स पर हों लेकिन निशाना मोदी सरकार पर है।

Netflix Dispute Anurag Kashyap and Dibakar Banerjee target pm modi?

Netflix Dispute: अनुराग कश्यप के बाद अब दिबाकर बनर्जी नेटफ्लिक्स पर आरोप लगा रहे हैं कि मोदी सरकार के दबाव में वह उनके साथ भेदभाव कर रहा है। अनुराग कश्यप तो मोदी सरकार से हमेशा फिल्म निर्देशक कम एक्टिविस्ट की तरह ही बात करते रहे हैं, खासतौर पर जब से उन्हें यूपी सरकार से मिलने वाला अनुदान रोक दिया गया था। लेकिन दिबाकर बनर्जी का आरोप चौंकाने वाला है। दोनों ही निर्देशक इसके लिए अमेजन प्राइम वीडियो की वेबसीरीज सैफ अली खान स्टारर 'तांडव' से जुड़े विवाद को दोषी ठहरा रहे हैं, जिसे अली अब्बास जफर ने डायरेक्टर किया था।

खोसला का घोंसला, ओए लकी लकी ओए जैसी फिल्में बना चुके दिबाकर बनर्जी ने 2019 में एक नए प्रोजेक्ट का ऐलान किया था, जिसको नाम दिया था 'फ्रीडम'। बताया गया था कि ये एक ऐसे भारतीय परिवार की तीन पीढ़ियों की कहानी है, जो भारत के इतिहास के विवादित पन्नों से भी जुड़ी हुई है। पहली कहानी 'कश्मीर फाइल्स' की तरह 1990 के कश्मीर पंडितों के पलायन के समय की जुड़ी हुई है। दूसरी कहानी में उस परिवार की लड़की की मुम्बई में फ्लैट खरीदने में हो रही विकट परेशानी से जुड़ी है और तीसरी उसके बेटे द्वारा अपना उपन्यास छपवाने की जद्दोजहद से। नसीरुद्दीन शाह, कल्कि किकला, हुमा कुरैसी, नीरज कबी आदि की भूमिकाओं वाले इस प्रोजेक्ट का नाम भी बदलकर फ्रीडम से 'तीस' कर दिया गया था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

2020 में इसकी शूटिंग खत्म हो गई थी, और दिबाकर को लग रहा था नेटफ्लिक्स इसे 2022 के अंत में या 2023 की शुरूआत में रिलीज कर देगी, लेकिन अब दिबाकर बनर्जी का कहना है कि नेटफ्लिक्स वाले ये कहकर टाल रहे हैं कि अभी समय ठीक नहीं है। उनको लगता है कि 'तांडव' विवाद के बाद ओटीटी किसी भी राजनीतिक विवाद वाली मूवी या सीरीज को भारत में रिलीज नहीं करना चाहता।

अनुराग कश्यप तो दिबाकर बनर्जी से भी दो कदम आगे बढ गए हैं। उन्होंने ना केवल नेटफ्लिक्स को बल्कि अमेजन के प्राइम वीडियो को भी लपेटे में ले लिया है। अनुराग का कहना है कि नेटफ्लिक्स ने उनके 'मैक्सिमम सिटी' के बैकड्रॉप में बनने वाले प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिया है। मिशन कश्मीर के को-राइटर सुकेतु मेहता के इस उपन्यास में 90 के दशक के मुंबई की सच्ची कहानियां हैं, जिनमें शिवसेना की कार्यशैली, डी गैंग का जलवा, फिल्म इंडस्ट्री का अंधेरा, धारावी का सच आदि है।
जबकि प्राइम वीडियो पर उनका आरोप है कि इंस्पेक्टर हाथी सिंह (जयदीप अहलावत) को केन्द्र में रखकर फिल्माई गई 'पाताल लोक' के सीजन टू को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

बताया जाता है कि अशोक अमृतराज की कम्पनी हाइड पार्क एंटरटेनमेंट 'मैक्सिमम सिटी' पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए अनुराग कश्यप के सम्पर्क में आई थी। नेटफ्लिक्स ने भी हां की लेकिन 'तांडव' का तांडव जिस तरह कई कोर्ट केसों के रूप में सामने आया, उस पर उन्हें विवादित सीन भी हटाने पड़े। कोई भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पॉलीटिकल विवाद वाली कोई भी मूवी या सीरीज को अपने प्लेटफॉर्म पर रिलीज करना नहीं चाहती।

अनुराग ये भी आरोप लगाते हैं कि एक शो की चर्चा थी 'गॉरमिंट', लेकिन वो आज तक नहीं आया। अनुराग इस बात से भी नेटफ्लिक्स से खफा हैं कि उन्होंने 'सेक्रेड गेम्स' के सीजन तीन को भी अभी तक हरी झंडी नहीं दिखाई है, बल्कि ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

जिन लोगों को नहीं पता उनकी उत्सुकता इस बात में होगी कि 2021 में रिलीज हुई 'तांडव' सीरीज में ऐसा क्या सीन था जिस पर सबसे ज्यादा विवाद था और ट्विटर पर हिंदू भड़के हुए थे। वो था भगवान शिव और नारद संवाद का एक दृश्य। इस सीन में वीएनयू यूनिवर्सिटी में एक प्ले खेला जा रहा है, जिसमें शिवा शेखर (जीशान अयूब) शिव के किरदार में है और उसका दोस्त विशाल (पर्व कैला) नारद के किरदार में है। पहले डायलॉग से ही राम भक्तों पर निशाना साधा गया था। इसमें नारद का किरदार शिवजी के किरदार से बोलता है- ''हे भोले नाथ, हे ईश्वर, प्रभु ये राम जी के फॉलोवर्स सोशल मीडिया पर बढ़ते ही जा रहे हैं। मुझे लगता है हमें भी कोई नई सोशल मीडिया स्ट्रेटजी बना ही लेनी चाहिए।''

शंकरजी के किरदार में जीशान अयूब कहते हैं - ''तो क्या करूं, कोई नई फोटो लगा लूं?'' नारद कहते हैं- ''भोलेनाथ आप बहुत ही भोले हैं, कुछ नया कीजिए, इन्फैक्ट कुछ नया ट्वीट कीजिए.. कुछ सेंसेशनल, कुछ भड़कता हुए शोला, जैसे कि कैंपस में सारे विद्यार्थी देशद्रोही हो गए हैं, आजादी आजादी के नारे लगा रहे हैं।"

इस पर शंकरजी कहते हैं-''आजादी... व्हाट द fuck.. (शंकर जी के मुंह से गाली सुनकर सारे स्टूडेंट्स तालियां बजाते हैं), फिर नारद को पास बुलाकर- इधर आ.. जब मैं सोने चला गया था तब तो आजादी कूल चीज होती थी, अब बुरी चीज हो गई क्या? (फिर स्टूडेंट्स से पूछते हैं) हां भाई किस चीज से आजादी चाहिए आपको?'' स्टूडेंट्स नारा लगते हैं - ''भुखमरी से आजादी, सामंतवाद से आजादी , भ्रष्टाचार से चाहिए आजादी..''

शंकर (बीच में रोककर) कहते हैं - ''हां हां मतलब देश से आजादी नहीं चाहिए, देश में रहकर आजादी चाहिए। फिर इन्हें समझाओ न कि जिओ लेकिन हमें भी तो जीने दो जी'। तांडव के इस सीन में साफ तौर पर लेफ्ट की आइडियोलॉजी को खुलेआम बढ़ावा दिया गया था।

दिलचस्प बात है कि जेएनयू के पास दिल्ली पुलिस के थाना बसंत कुंज को 'महंत कुंज' थाना नाम दिया गया है, जो ना केवल धार्मिक दृष्टि से भी एजेंडा लगता है, टारगेट भी लगता है। इतना ही नहीं, एपिसोड 8 में एक साधू बाबा का प्रवचन टीवी पर चल रहा है, ये बिलकुल एपिसोड के एंड सीन में है, जिसमें साधु का प्रवचन काफी अश्लील है- न्यूटन का क्रिया प्रतिक्रिया का नियम - ''कभी आप प्रकृति की मारेंगे, कभी प्रकृति आप की मारेगी''। इस साधु का अश्लील सा प्रवचन कई बार इस वेबसीरीज में इस्तेमाल किया गया है।

इसी सीरीज के 9वें एपिसोड में सैफ अली खान पीएम बनी डिंपल कपाड़िया से मिलने पहुंचता है और फिर भगवान राम से खुद की तुलना करते हुए उनको 'रहे हैं' की बजाय 'रहा है' सम्बोधित करता है- '' राम वनवास से ' लौट रहा है ' तो कैकई को माफी मांगनी पड़ेगी...टीवी मीडिया बुलानी पड़ेगी'।

हालांकि ये सही है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय में हुई ओटीटी अधिकारियों की पेशी और कोर्ट केसेज ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के अधिकारियों को सचेत कर दिया है कि कोई उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग अपने राजनीतिक इरादों के लिए ना कर पाए, लेकिन ये भी सच है कि 'सेक्रेड गेम्स' का सीजन टू बहुत ज्यादा पसंद नहीं किया गया और नेटफ्लिक्स को उसमें घाटा हुआ था, जिसके चलते तीसरे सीजन को लेकर वहां उत्साह नहीं है। इन अधिकारियों ने अनुराग कश्यप को ये भी साफ कर दिया कि आपके शो के दर्शकों में महिलाएं नहीं हैं। सो ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि इन डायरेक्टर्स के ये मीडिया बयान अपने अपने प्रोजेक्ट्स को चर्चा में में लाने के लिए हैं, ताकि 'पठान' की तरह विवादों का फायदा उठा सकें।

यूं भी नेटफ्लिक्स को सरकार का इतना ही खौफ होता तो क्या वो 'मिशन मजनूं' को रिलीज करती, जिसमें मोरारजी देसाई का रॉ के बजट में कटौती और उनकी पाक को रॉ के कहूटा परमाणु संयत्र की जानकारी वाली तरफ इशारा किया गया है? यूं भी जिन फिल्मों को भारत में रिलीज से प्रतिबंधित किया गया है, उनमें से कई फिल्में इन सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं, जिनमें से अनुराग कश्यप की दो फिल्में 'ब्लैक फ्राईडे' और 'पांच' भी शामिल हैं। फिर भी अगर वो नेटफ्लिक्स पर भेदभाव और दबाव का आरोप लगा रहे हैं तो अपनी राजनीतिक नफरत के तहत केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला भी कर रहे हैं कि इस सरकार में अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जा रहा है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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