मुंबई की सूरत बदलने की तैयारी: क्या 2030 तक वाकई झुग्गी-मुक्त हो पाएगा सपनों का शहर?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को मुंबई के लिए एक बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि अब मुंबई को झुग्गियों और बेतरतीब विकास के दौर से बाहर निकलना होगा। सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर क्लस्टर पुनर्विकास, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मास हाउसिंग के जरिए देश की आर्थिक राजधानी को 'स्लम-फ्री' बनाना है। इसके तहत 2030 तक करीब 15 लाख पुनर्वास घर बनाने का टारगेट रखा गया है।

मुंबई में आयोजित 'महाराष्ट्र इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव' में बोलते हुए शिंदे ने बताया कि मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 19 क्लस्टर पुनर्विकास जोन बनाए जा चुके हैं। सरकार एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है जिससे भीड़भाड़ वाली बस्तियों को आधुनिक शहरी इलाकों में बदला जा सके, जहां चौड़ी सड़कें, गार्डन, खेल के मैदान, स्कूल और सभी नागरिक सुविधाएं मौजूद हों।
धारावी समेत कई इलाकों की खराब स्थिति का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा, "मुंबईकरों को नालों के पास और गंदगी के बीच रहने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। सरकार ने इस हकीकत को बदलने की जिम्मेदारी ली है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर पात्र नागरिक को अपना पक्का घर मिले।"
उन्होंने बताया कि मुंबई को झुग्गी-मुक्त बनाने के इस मिशन में MMRDA, MIDC, CIDCO, SRA और MHADA जैसी सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। इस मल्टी-एजेंसी अप्रोच के जरिए ही इस बड़े विजन को हकीकत में बदला जाएगा।
शिंदे के मुताबिक, क्लस्टर पुनर्विकास मॉडल का मकसद न केवल जमीन का सही इस्तेमाल करना है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन स्तर को सुधारना भी है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ इमारतों का पुनर्विकास नहीं है, बल्कि यह लोगों की जिंदगी और पूरे इलाके के इकोसिस्टम को बदलने की कोशिश है।"
कॉन्क्लेव में अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव से मुंबई को करीब 300 हेक्टेयर खुली जगह (ओपन स्पेस) मिलने की उम्मीद है, जिसमें प्रोमेनेड और रेसकोर्स जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री ने बीडीडी चॉल के सफल पुनर्विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार पुरानी और जर्जर हाउसिंग को आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर महेंद्र कल्याणकर ने बताया कि अकेले SRA (झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण) द्वारा 2030 तक करीब सात लाख पुनर्वास घर बनाने की उम्मीद है। गौर करने वाली बात यह है कि प्राधिकरण के गठन के बाद पिछले ढाई दशकों में लगभग 2.9 लाख घर ही बनाए गए थे।
डॉ. कल्याणकर ने कहा कि धारावी में करीब 1.5 लाख पुनर्वास यूनिट्स बनाने की योजना है, जहां फिलहाल साफ-सफाई और आवास एक बड़ी चुनौती है। वहां कुछ इलाकों में 1,000 लोगों पर सिर्फ एक टॉयलेट है। उन्होंने आगे बताया कि 15 अगस्त तक 'धारावी एक्सपीरियंस सेंटर' तैयार हो जाएगा। साथ ही मीठी नदी के सौंदर्यीकरण और धारावी को एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जो एयरपोर्ट, लोकल ट्रेन, मेट्रो और बेस्ट नेटवर्क से जुड़ा होगा।
श्रीकांत शिंदे ने जानकारी दी कि बीएमसी, म्हाडा, सिडको और एसआरए जैसी एजेंसियां मिलकर पूरे क्षेत्र में क्लस्टर पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई पहले से ही एफडीआई, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश का नेतृत्व कर रही है। आने वाले दशकों में शहर की आर्थिक साख बनाए रखने के लिए इसे वर्ल्ड-क्लास बनाना बेहद जरूरी है।












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