Russia Drone Hijack NATO: यूक्रेन के ड्रोन, पुतिन का रिमोट! रूस ने हाईजैक किए हथियार, नाटो देशों में हड़कंप
Russia Drone Hijack NATO: रूस ने Ukraine के खिलाफ युद्ध में अब एक नई और खतरनाक रणनीति अपनाई है। रूस यूक्रेन के ड्रोन को हवा में ही 'हाईजैक' कर उन्हें नाटो देशों की तरफ मोड़ रहा है। इसके लिए गोली या मिसाइल नहीं, बल्कि GPS जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हाल ही में Vilnius में अचानक हवाई खतरे का अलर्ट जारी होने के बाद यूरोप में चिंता और बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस यूक्रेनी ड्रोन को भ्रमित कर नाटो सीमा की ओर भेज रहा है। अब यह मामला सिर्फ रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा बनता दिख रहा है।

रूस कैसे कर रहा है ड्रोन हाईजैक
Russia ड्रोन को भटकाने के लिए दो तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है - जैमिंग और स्पूफिंग। पहले ड्रोन के असली GPS सिग्नल को ब्लॉक किया जाता है ताकि वह दिशा खो दे। इसके बाद रूस अपना नकली GPS सिग्नल भेजता है। ड्रोन उस नकली सिग्नल को असली समझकर उसी दिशा में उड़ने लगता है। इस तरह यूक्रेन के ड्रोन रूस पर हमला करने की बजाय नाटो देशों की तरफ पहुंच जाते हैं। कई बार ड्रोन गलत समय और लोकेशन की वजह से क्रैश भी हो जाते हैं।
लिथुआनिया में मचा हड़कंप
हाल ही में Lithuania की राजधानी विल्नियस में अचानक बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बंकर में ले जाया गया, फ्लाइट्स रोकी गईं और कई सड़कें बंद कर दी गईं। हजारों लोग सुरक्षित जगहों पर छिपने लगे। बाद में पता चला कि आसमान में दिखे ड्रोन यूक्रेन के थे, लेकिन रूस की तकनीक से उनका रास्ता बदल गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद नाटो देशों में यह सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
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नाटो देशों के लिए बढ़ता खतरा
NATO के सदस्य देशों लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। लातविया में एक ड्रोन तेल भंडारण सुविधा पर गिरा, जबकि एस्टोनिया में पहली बार नाटो के F-16 फाइटर जेट को ड्रोन मार गिराना पड़ा। लगातार बढ़ती इन घटनाओं से नाटो देशों की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस सीधे हमला किए बिना नाटो की ताकत और एकता को परखने की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेन के लिए क्यों बड़ा झटका
Ukraine के लिए ड्रोन युद्ध का सबसे अहम हथियार बन चुके हैं। कम लागत वाले ये ड्रोन रूस के अंदर दूर तक जाकर हमला करने में सक्षम रहे हैं। मॉस्को, तेल डिपो और रडार स्टेशनों पर भी इनसे हमले हुए हैं। लेकिन अब रूस इन्हीं ड्रोन को पलटकर यूक्रेन और नाटो देशों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। इससे यूक्रेन की रणनीति को बड़ा झटका लगा है क्योंकि अब उसके अपने हथियार उसके लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
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अब AI और फाइबर ड्रोन पर दांव
रूस की GPS जैमिंग तकनीक से बचने के लिए यूक्रेन नई तकनीक पर काम कर रहा है। अब वह ऐसे फाइबर ऑप्टिक ड्रोन बना रहा है जो तार के जरिए कंट्रोल होते हैं और GPS पर निर्भर नहीं रहते। इसके अलावा AI गाइडेड ड्रोन भी तैयार किए जा रहे हैं जो कैमरे और डिजिटल मैप की मदद से उड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन युद्ध और ज्यादा हाईटेक और खतरनाक हो जाएगा, जहां तकनीक ही सबसे बड़ा हथियार बनेगी।












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