Rajya Sabha Chunav: राज्यसभा में कम होगी NDA की ताकत? कांग्रेस को फायदा! 12 राज्यों 26 सीटों का गणित समझिए
Rajya Sabha Election 2026: देश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव का मौसम गर्म हो गया है। चुनाव आयोग ने 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। पहली नजर में यह चुनाव सामान्य लग सकता है, लेकिन असल में इसके नतीजे संसद के ऊपरी सदन का राजनीतिक संतुलन बदल सकते हैं।
सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि सत्ताधारी NDA को एक सीट का नुकसान हो सकता है, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को फायदा मिलने के संकेत हैं। खासकर झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। वहीं YSRCP जैसी पार्टियों के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हो सकता है।

🔷कुल 26 सीटों पर क्या है मौजूदा स्थिति?
जिन 26 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें अभी NDA के पास सबसे ज्यादा 18 सीटें हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखंड, मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश की सीटें शामिल हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन के पास पांच सीटें हैं, जबकि तीन सीटें YSRCP के खाते में हैं। लेकिन इस बार का चुनाव पुराने समीकरण बदल सकता है। अनुमान है कि NDA इस बार 17 सीटों पर सिमट सकता है, जबकि कांग्रेस, JMM और अन्य विपक्षी दलों को फायदा होगा। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर खास तौर पर कर्नाटक और झारखंड पर टिकी हुई है, जहां सत्ता समीकरण विपक्ष के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों और मौजूदा विधानसभा सीटों के मुताबिक, इस चुनाव के बाद एनडीए की ताकत 18 से घटकर 17 सीटों पर आ सकती है। दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में कांग्रेस को पांच और जेएमएम को दो सीटें मिलने का अनुमान है। इसके अलावा, दक्षिण भारत की नई राजनीतिक ताकत टीवीके (TVK) को एक सीट और मिजोरम की स्थानीय पार्टी जोरम पीपल्स मूवमेंट को एक सीट मिल सकती है।
इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान आंध्र प्रदेश की वाईएसआरसीपी को होने जा रहा है, जो अपनी तीनों सीटें गंवाती दिख रही है। फिलहाल 244 सदस्यों वाले सदन में एनडीए 149 सांसदों के साथ मजबूत स्थिति में है, लेकिन इस चुनाव के बाद विपक्ष अपनी संख्या को 78 से आगे बढ़ाने की पुरजोर कोशिश करेगा।

🔷राज्यवार विश्लेषण: कहां पलटेगी बाजी और कहां मजबूत रहेगी सरकार? (State Wise Rajya Sabha Seats Analysis)
इस चुनाव को सही से समझने के लिए हमें राज्यों के गुणा-भाग को देखना होगा। कई राज्यों में जहां सत्ताधारी दल क्लीन स्वीप करने की तैयारी में हैं, वहीं कुछ राज्यों में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।
🔹कर्नाटक (Karnataka): यहां एनडीए को सबसे बड़ा झटका लग सकता है। अभी यहां की 4 सीटों में से 3 एनडीए और 1 कांग्रेस के पास है। लेकिन इस बार कांग्रेस अपनी विधानसभा मजबूती के दम पर 3 सीटें जीत सकती है, जिससे एनडीए को सिर्फ 1 सीट से संतोष करना पड़ेगा।
🔹आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh): यहां की चारों सीटें इस बार एनडीए के पाले में जाने की पूरी उम्मीद है, जिससे विपक्ष को तगड़ा झटका लगेगा।
🔹गुजरात (Gujarat): राज्य की 4 सीटों में से अभी 3 भाजपा और 1 कांग्रेस के पास है। नए समीकरणों के हिसाब से भाजपा यहां क्लीन स्वीप करते हुए चारों सीटें अपनी झोली में डाल सकती है।
🔹झारखंड (Jharkhand): यहां की 2 सीटों पर दिलचस्प मुकाबला है। नियमों के मुताबिक दोनों सीटें जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास जानी चाहिए। हालांकि, भाजपा के पास भी 21 विधायक हैं। ऐसे में अगर विपक्ष के चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, तो भाजपा एक सीट झटक सकती है।
🔹मध्य प्रदेश और राजस्थान (Madhya Pradesh & Rajasthan): इन दोनों ही राज्यों में 3-3 सीटें खाली हो रही हैं। दोनों राज्यों में अभी 2-2 सीटें भाजपा और 1-1 सीट कांग्रेस के पास है। चुनाव के बाद भी यहां यथास्थिति बने रहने की उम्मीद है।
🔹पूर्वोत्तर के राज्य (North-East States): मणिपुर और अरुणाचल की एक-एक सीट पर भाजपा फिर से जीत दर्ज कर सकती है। मेघालय में एनडीए की सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी अपनी सीट बचा लेगी, जबकि मिजोरम की सीट इस बार मिजो नेशनल फ्रंट के हाथ से निकलकर जोरम पीपल्स मूवमेंट के पास जा सकती है।
🔷दो सीटों पर उपचुनाव का रोमांच: क्यों खाली हुई थीं ये सीटें?
इस आम चुनाव के साथ-साथ दो प्रमुख सीटों पर उपचुनाव भी होने जा रहे हैं। ये सीटें महाराष्ट्र और तमिलनाडु से आती हैं। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता और राज्य की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। यह सीट दोबारा एनडीए के खाते में जाने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ, तमिलनाडु में एआईएडीएमके (AIADMK) के सीनियर नेता सीवी षणमुगम ने भी विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। तमिलनाडु की यह सीट इस बार सत्ताधारी दल टीवीके को मिल सकती है, जिसे कांग्रेस का सीधा समर्थन हासिल है। इन दोनों ही सीटों पर होने वाले बदलावों पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।
🔷मल्लिकार्जुन खड़गे और दिग्विजय सिंह समेत 24 बड़े दिग्गज हो रहे हैं रिटायर
इस चुनाव की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस बार देश के कई कद्दावर राजनेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कुल 24 सांसद 21 जून से 19 जुलाई के बीच रिटायर होने जा रहे हैं।
रिटायर होने वाले प्रमुख चेहरों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा शामिल हैं। इन दिग्गजों के रिटायर होने से कई पार्टियों को अपने नए चेहरों को संसद भेजने का मौका मिलेगा, जिससे उच्च सदन की बहस और राजनीति का रंग भी बदला-बदला नजर आएगा।
🔷मार्च में हुए चुनावों का कैसा रहा था ट्रेंड?
अगर हम इस साल के शुरुआती राजनीतिक ट्रेंड को देखें, तो 16 मार्च को भी देश के तीन राज्यों-हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए थे। उस चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी रहा था और उसने कुल 9 सीटों पर अपना परचम लहराया था।
बिहार की बात करें तो वहां की सभी 5 सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने एकतरफा जीत हासिल की थी। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 पर एनडीए और 1 पर बीजू जनता दल (BJD) को जीत मिली थी। वहीं हरियाणा की 2 सीटों में से 1 भाजपा और 1 कांग्रेस के खाते में गई थी। मार्च के इस प्रदर्शन से उत्साहित एनडीए इस बार भी अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहती।
🔷आखिर कैसे चुने जाते हैं राज्यसभा के सांसद?
बहुत से लोग सोचते हैं कि राज्यसभा चुनाव भी लोकसभा की तरह ही होता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। लोकसभा में आम जनता सीधे वोट डालती है, जबकि राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव देश की जनता द्वारा चुने गए विधायक (MLA) करते हैं। चूंकि राज्यसभा कभी पूरी तरह भंग नहीं होती, इसलिए इसे स्थायी सदन कहा जाता है। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर हो जाते हैं। सदन की कुल 245 सीटों में से 233 सीटों पर चुनाव होते हैं और बाकी 12 सदस्यों को देश के राष्ट्रपति कला, साहित्य और विज्ञान जैसे क्षेत्रों से मनोनीत करते हैं।
इस चुनाव में जीत के लिए एक विशेष फॉर्मूला इस्तेमाल होता है, जिसे 'कोटा' कहते हैं। इसमें हर राज्य के कुल विधायकों की संख्या के आधार पर एक सीट की कीमत (वोट वैल्यू) तय होती है। इसे हम महाराष्ट्र के उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं।
मान लीजिए महाराष्ट्र में सात सीटों पर चुनाव होना है और विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। ऐसे में जीत का फॉर्मूला इस तरह निकलेगा:
कुल विधायक × 100 ÷ (राज्यसभा सीटें + 1) + 1
यानी
288 × 100 ÷ (7+1) = 3600 + 1
इस हिसाब से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 3601 वोट वैल्यू चाहिए होगी। चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है, इसलिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 36 विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में हर विधायक की अहमियत अचानक बढ़ जाती है और क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का खेल बदल सकती है।













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