Pandit Pradip Mishra: प्रसिद्धि की चाह में पंडित मिश्रा भटक गये राह?
धीरेन्द्र शास्त्री के बाद मध्य प्रदेश के ही एक और चमत्कारी बाबा चर्चा में हैं। सिहोर के रहने वाले पंडित प्रदीप मिश्रा के चमत्कारों के दावों के बीच उनके आश्रम में इतनी भीड़ उमड़ आयी कि पूरा सिहोर शहर अस्त व्यस्त हो गया।

Pandit Pradip Mishra: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को आर्थिक राजधानी इंदौर से जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे 16 फरवरी को हांफ गया। 10 घंटे से अधिक के जाम ने आवागमन कर रहे मुसाफिरों को खासा परेशान किया। 30 हजार से अधिक गाड़ियां जाम में फंस गईं। कारण था सीहोर स्थित कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव में उमड़ी लाखों की भीड़ से हुई अव्यवस्था।
अव्यवस्था भी ऐसी कि एक अधेड़ महिला की भगदड़ में मृत्यु हो गई, आस्था के सैलाब में हजारों परिवार बिछड़ गए, 6000 से अधिक लोग सीहोर के स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंच गए। भोपाल-इंदौर राजमार्ग पर पानी की एक बॉटल 40 रुपये से अधिक में बिकी तो वहीं सीहोर में श्रद्धालुओं से शौच-स्नान इत्यादि के 50 से 100 रुपये तक वसूले गए।
सीहोर डेढ़ लाख की आबादी वाला छोटा सा शहर है। अब वहां औसतन हर रोज दो लाख लोग पहुंच रहे हैं। यानी जितनी शहर की आबादी है उतने लोग वहां रोज आ रहे हैं। ऐसे में अव्यवस्था का फैलना स्वाभाविक है। 1500 पुलिस के जवान इस कुंभ में कोई व्यवस्था बनाते भी तो कैसे? लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग वहां क्यों पहुंच गये?
दरअसल, पंडित प्रदीप मिश्रा अभिमंत्रित रुद्राक्ष बांटते हैं। उनका दावा है कि उनके द्वारा दिये गये रुद्राक्ष को पानी में डुबाकर उस पानी को छिड़क दिया जाए तो घर की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह भीड़ वही रुद्राक्ष पाने के लिए उमड़ी थी जिसका निमंत्रण कई दिनों से जनता को दिया जा रहा था। आमंत्रण दे दिया जबकि व्यवस्थाएं पूरी नहीं थी। स्वयं पंडित मिश्रा ने अव्यवस्था पर कहा, "लड़की वालों को 100 बारातियों के आने का अनुमान था, 500 आ गए।" हालांकि यह पंडित मिश्रा की नासमझी ही मानी जाएगी क्योंकि पिछले वर्ष भी उन्होंने यही गलती की थी जिस पर बड़ा बखेड़ा खड़ा हुआ था। प्रसिद्धि की चाह में पंडित मिश्रा बार बार राह भटक जाते हैं और ईश्वर के नाम पर जनता को परेशान करने का दोषी बन जाते हैं।
खास अभिमंत्रित रुद्राक्ष बांटने का दावा
रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम से जिस रुद्राक्ष के वितरण का ऐलान किया जाता है और लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है उसे लेकर पंडित मिश्रा की ओर से दावा किया जाता है कि वह गंडकी नदी से निकले रुद्राक्ष हैं और इनके धारण करने से व्यक्ति रोग इत्यादि से मुक्त होता है। वे इन्हें अभिमंत्रित कर बांटने का दावा करते हैं जिससे व्यक्ति का कल्याण होता है। इस वर्ष उनके द्वारा आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे जिनमें से 3 लाख से अधिक बिना रुद्राक्ष प्राप्त किए ही अव्यवस्थाओं का शिकार होकर आयोजकों को कोसते हुए चले गए।
राजनीतिक कथावाचक की बन रही पहचान
कोरोना काल से पूर्व पंडित प्रदीप मिश्रा को गिने-चुने लोग ही जानते थे किंतु उन्होंने आपदा को अवसर में बदला और वे रोजाना शिवलीला की कथाओं के माध्यम से घर-घर में पहुंच गए। हालांकि अपने अजीबोगरीब टोटकों के कारण वे निशाने पर भी रहे। शिवलिंग पर चढ़ाये गए निर्माल्य को चुराने की शिक्षा भी उन्हीं के द्वारा दी गई। विद्यार्थियों को परीक्षा में पास कराने के टोटके बताना हो अथवा महिलाएं ससुराल में कैसे राज करें जैसे विषयों पर उन्होंने बहुत सुर्खियां बटोरीं। पंडित मिश्रा को पहचान तब मिली जब मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा उनके यजमान बने। इसके बाद पंडित मिश्रा ने पलटकर नहीं देखा। क्या भाजपा-क्या कांग्रेस, नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में उनकी कथाएं आयोजित करवाईं। आज पंडित मिश्रा मध्य भारत में राजनीतिक वोट बैंक के अगुआ बन चुके हैं। मालवा से लेकर नर्मदापुरम का पूरा क्षेत्र उनके अनुयायियों से भरा पड़ा है।
पिछले वर्ष भी हुई थी भारी अव्यवस्था
पिछले वर्ष 28 फरवरी को पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव के बहाने शक्ति प्रदर्शन करते हुए 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को इकट्ठा कर लिया था। पहले ही दिन लगभग 40 किलोमीटर का जाम सड़कों पर लग गया था। इस जाम में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रीद्वय इंदर सिंह परमार और तुलसी सिलावट भी फंस गए थे। जब कांग्रेस ने इस मामले में सरकार को घेरा तो पंडित प्रदीप मिश्रा व्यास पीठ से रो दिए थे और उन्होंने भावुक होकर अप्रैल में हरिद्वार में रुद्राक्ष महोत्सव की घोषणा कर दी थी।
हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उनसे बात करने के बाद पूरे नाटक का पटाक्षेप हो गया था। तब भी मुख्यमंत्री ने भविष्य में बेहतर व्यवस्थाओं का आश्वासन दिया था किन्तु इस बार वह नाकाफी सिद्ध हुआ। यहां तक कि स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना सिहोर दौरा निरस्त करना पड़ा।
चाणक्य नीति में कहा गया है- अति सर्वत्र वर्जयेत अर्थात् लालच से यथासंभव बचना चाहिए। अति किसी चीज की अच्छी नहीं होती। टीवी और सोशल मीडिया के जरिए पंडित मिश्रा स्टार कथावाचक भले बना दिए गए हों किन्तु उनके शास्त्र ज्ञान पर सवाल भी उठता रहा है। लेकिन उनके टोटकों और चमत्कार की ऐसी चर्चा चल पड़ी है कि लोग लाखों की संख्या में उनके पास पहुंचते हैं।
सीहोर के नमक चौराहे वाले पुराने बाशिंदे जानते हैं कि शैशव अवस्था में पंडित मिश्रा की क्या स्थिति थी और अब क्या बन चुकी है। जिन टोटकों को पंडित मिश्रा शान से बताते हैं उनका उल्लेख न तो लाल किताब में हैं, न किसी शास्त्र में और न ही रावण संहिता में। राजनीति में हिंदुत्व के उभार ने पंडित मिश्रा को अवसर दिया जिसका अब वे दुरुपयोग करने लगे हैं।
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ऐसे लोगों की बढ़ती प्रसिद्धि के पीछे भारतीय जनता का वह मन मानस भी है जहां वो अपनी समस्याओं का समाधान किसी चमत्कार में खोजते हैं। इसी का फायदा पंडित मिश्रा जैसे लोग भी उठाते हैं तो चर्च मिशनरियां भी।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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