BJP में आते ही राघव चड्ढा को मिला बड़ा इनाम, राज्यसभा में मिली अहम जिम्मेदारी, बदली सियासी तस्वीर

Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा को अब राज्यसभा में बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ ही हफ्ते पहले उन्होंने AAP के कई सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था।

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने समिति का पुनर्गठन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि बीजेपी ने राघव चड्ढा को सिर्फ पार्टी में शामिल नहीं किया, बल्कि तुरंत एक अहम संसदीय भूमिका भी सौंप दी।

Raghav Chadha

राज्यसभा में राघव चड्ढा को कौन सी जिम्मेदारी मिली? (What Responsibility Has Raghav Chadha Got)

राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि 20 मई से प्रभावी नई याचिका समिति का गठन किया गया है। इस समिति में कुल 10 सदस्यों को शामिल किया गया है और राघव चड्ढा को इसका चेयरमैन बनाया गया है।

यह समिति संसद की उन महत्वपूर्ण समितियों में मानी जाती है, जो सीधे जनता की शिकायतों और जनहित से जुड़े मामलों की जांच करती हैं। यानी अब राघव चड्ढा की भूमिका सिर्फ सांसद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह सार्वजनिक शिकायतों और प्रशासनिक मामलों पर भी नजर रखेंगे।

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याचिका समिति आखिर करती क्या है?

राज्यसभा की याचिका समिति का मुख्य काम सदन में आने वाली याचिकाओं की जांच करना होता है। अगर किसी नागरिक को लगता है कि उसकी शिकायत सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था से हल नहीं हो रही, तो वह इस समिति के जरिए अपनी बात संसद तक पहुंचा सकता है।

यह समिति जनहित से जुड़े मुद्दों, सरकारी कामकाज और प्रशासनिक फैसलों की भी समीक्षा करती है। आसान भाषा में समझें तो यह जनता और संसद के बीच एक औपचारिक पुल की तरह काम करती है। इसी वजह से इस समिति का अध्यक्ष बनना सिर्फ औपचारिक पद नहीं माना जाता, बल्कि इसे राजनीतिक भरोसे और संसदीय प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है।

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समिति में और कौन-कौन सांसद शामिल हैं?

राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली इस समिति में कई अन्य सांसदों को भी सदस्य बनाया गया है। इनमें:

  • हर्ष महाजन
  • गुलाम अली
  • शंभू शरण पटेल
  • मयंक कुमार नायक
  • मस्थान राव यादव बीधा
  • जेबी मेथेर हिशाम
  • सुभाशीष खुंटिया
  • रवंगवरा नारजारी
  • संतोष कुमार

जैसे नाम शामिल हैं।

राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना के बाद यह समिति तुरंत प्रभाव से काम शुरू करेगी।

AAP छोड़कर BJP में कब आए राघव चड्ढा?

राघव चड्ढा पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद चुने गए थे। लेकिन 24 अप्रैल 2026 को उन्होंने पार्टी छोड़ दी। खास बात यह रही कि वह अकेले नहीं गए, बल्कि AAP के दो-तिहाई से ज्यादा राज्यसभा सांसदों को साथ लेकर बीजेपी में शामिल हुए।

उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे नेता भी बीजेपी में आए। उस समय राघव चड्ढा ने कहा था कि उन्हें महसूस होने लगा था कि वह "गलत पार्टी में सही आदमी" हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से भटक चुकी है।

राघव चड्ढा ने AAP पर क्या आरोप लगाए थे?

बीजेपी में शामिल होते वक्त राघव चड्ढा ने कहा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 15 साल AAP को दिए, लेकिन अब पार्टी देशहित की जगह निजी राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि संविधान के प्रावधानों के तहत उन्होंने अपने समूह का बीजेपी में विलय करने का फैसला लिया। इस बयान के बाद देशभर की राजनीति में हलचल मच गई थी, क्योंकि राघव चड्ढा को कभी अरविंद केजरीवाल की टीम का सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाता था।

राज्यसभा में दूसरी बड़ी नियुक्तियां भी हुईं

राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी दूसरी अधिसूचना में बताया गया कि मेनका गुरुस्वामी (Menaka Guruswamy) को 'कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026' पर बनी संयुक्त समिति का सदस्य नामित किया गया है। वहीं लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि अरविंद सावंत (Arvind Sawant) को भी इसी संयुक्त समिति में शामिल किया गया है।

क्या बीजेपी राघव चड्ढा को बड़ा रोल देने की तैयारी में है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने राघव चड्ढा को सिर्फ शामिल करके नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें तुरंत जिम्मेदारी देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी उन्हें लंबे राजनीतिक प्लान का हिस्सा मान रही है।

राघव की युवा छवि, संसदीय अनुभव और मीडिया कम्युनिकेशन स्किल बीजेपी के लिए आने वाले समय में उपयोगी मानी जा रही है। यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें सीधे एक महत्वपूर्ण संसदीय समिति की कमान सौंप दी। अब देखना दिलचस्प होगा कि AAP से बीजेपी तक का यह सफर राघव चड्ढा की राजनीति को कितना बड़ा मोड़ देता है।

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