Year 2022 for India: भारत के लिए चुनौतियों के बावजूद उपलब्धियों से भरा रहा यह साल
बीते पल की उपलब्धियां जहां हमारे अंदर नए उत्साह का संचार कर देती है तो नाकामियां हमें सोचने के लिए मजबूर करती हैं कि हम भविष्य में फिर ऐसी गलतियों से बचें। भारत के लिए कुछ ऐसी ही खूबियों और खामियों से भरा रहा है साल 2022

Year 2022 for India: राजनीति के शिखर पर गरीब आदमी
भारत के संदर्भ में बीते साल की सबसे अहम घटना रही देश के सर्वोच्च पद पर आदिवासी महिला का चुनाव। कह सकते हैं कि द्रौपदी मुर्मू के जरिए सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर देश ने 25 जुलाई को अद्भुत इतिहास रचा। द्रौपदी मुर्मू ना सिर्फ पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं, बल्कि आजाद भारत में जन्मी पहली शख्सियत हैं जो राष्ट्रपति के पद पर पहुंची हैं। उन्होंने भी इतिहास को जैसे याद किया। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति पद तक पहुंचना, उनकी निजी नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक गरीब आदमी की उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका चुनाव प्रमाण है कि देश में गरीब सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।
राजनीतिक मोर्चे पर बीते साल जहां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने फिर जीत हासिल की और सरकार बनाई तो वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी धूमकेतु की तरह उभरी और सभी दलों को धत्ता बताते हुए पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई, जबकि हिमाचल प्रदेश पर कांग्रेस ने कब्जा करते हुए इतिहास बदलने के भाजपा के मंसूबे को ध्वस्त कर दिया। आम आदमी पार्टी ने हिमाचल, उत्तराखंड, गोवा और गुजरात में धमक दिखाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही। बीते साल जब पूरा देश 75वां स्वाधीनता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ था, बिहार में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटासन लगाया और भाजपा का साथ छोड़कर उस राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बनायी, जिसके खिलाफ उन्होंने बगावत की थी।
बीते साल केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बीच विवाद होता रहा। वहीं पश्चिम बंगाल में लगातार वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले जगदीप धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति बन बैठे। बीते साल कांग्रेस ने अरसे बाद गांधी-नेहरू परिवार से इतर का अध्यक्ष चुना। देश की सबसे पुरानी पार्टी ने 26 अक्टूबर के दिन मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना प्रमुख चुना। इसी साल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सात सितंबर को चर्चित भारत जोड़ो यात्रा शुरू की। जो अब भी जारी है।
बीता साल कांग्रेस के लिए हिचकोलों का रहा। गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस छोड़ी तो राजस्थान में अशोक गहलोत को हटाने की कोशिश पूरी तरह नाकाम रही। कांग्रेस को महाराष्ट्र में भी झटका लगा। जब महाविकास आघाड़ी की प्रमुख पार्टी शिवसेना में एकनाथ शिंदे की अगुआई में विद्रोह हुआ। शिंदे की अगुआई वाले शिवसेना के खेमे और भाजपा ने मिलकर राज्य में 30 जून को सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा, जिसमें कांग्रेस के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल थी।
कूटनीति के मोर्चे पर कामयाबी
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भारत ने साल 2022 में एक के बाद एक कई कामयाबियां हासिल की। बीते साल 16 सितंबर को उजबेकिस्तान के समरकंद में हुए शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता मिली। इस संगठन में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के साथ भारत भी सदस्य है। इसके साथ ही इसमें ईरान, अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया भी बतौर ऑब्जर्वर देश शामिल हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर कार्यरत देशों के इस संगठन की अध्यक्षता का मतलब साफ है कि वैश्विक पटल पर भारत की ताकत को अनदेखा नहीं किया जा सकता। बीते साल भारत की ताकत और कूटनीतिक हैसियत को संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी स्वीकार किया। इसी साल देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काउंटर टेररिज़्म कमेटी की बैठक की मेजबानी का मौका मिला। साल 2015 के बाद ये पहला मौका रहा, जब ये बैठक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से बाहर किसी दूसरी जगह पर हुई। इस बैठक में भारत ने आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर दुनिया का ध्यान तो खींचा ही, भविष्य की रणनीति को लेकर घोषणा पत्र भी जारी किया।
देश को कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ी कामयाबी बीते साल 16 नवंबर को मिली, जब भारत को जी 20 संगठन का साल 2023 के लिए अध्यक्ष चुन लिया गया। दुनिया के सैनिक और आर्थिक ताकत वाले बीस देशों के संगठन जी 20 की अध्यक्षता मिलना बेहद अहम है। साफ है कि भारत की आर्थिक और सैनिक ताकत को दुनिया भी स्वीकार कर रही है। इसके साथ ही देश को साल 2023 में इन देशों की शिखर बैठक की मेजबानी का मौका मिला है, जिसके तहत सितंबर 2023 में G-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष नई दिल्ली में जुटेंगे।
आर्थिक जगत का लेखा जोखा
साल 2022 में ही हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए। इस मोर्चे पर हमसे आगे अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी ही है। इसके पहले पांचवें स्थान पर ब्रिटेन था। एक दशक पहले तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 11वें स्थान पर था। आर्थिक मोर्चे पर साल 2022 में भारत ने कामयाबी का एक और इतिहास रचा। इसी साल देश ने 400 अरब डॉलर से ज्यादा के निर्यात का रिकॉर्ड बनाया। भारत को अब तक आयात निर्भर माना जाता रहा है लेकिन अब भारत अपने उत्पादों के निर्यात का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। 2022 का निर्यात उससे पिछले साल के मुकाबले 37 फीसदी ज्यादा रहा।
दरअसल केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चार सौ अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा था जिसे देश ने पूरा कर लिया है। बीते साल में प्रधानमंत्री युवाओं से अगले 25 साल पर फोकस करने की अपील की और इस अवधि को अमृत काल नाम दिया। इसके लिए प्रधानमंत्री ने पांच संकल्प देश के सामने रखे। ये संकल्प हैं: विकसित भारत बनाने का लक्ष्य, गुलामी की मानसिकता का पूरी तरह से त्याग, अपनी विरासत पर गर्व, राष्ट्र की एकता बढ़ाने का पुरजोर प्रयास और हर नागरिक के कर्तव्य का दायित्व वाला विकसित भारत बनाना।
साल 2022 युवा उद्यमियों की ओर देश की उम्मीद भरी निगाहों को लिए भी देखा जाएगा। इसी साल यूनिकॉर्न की संख्या ने 100 के आँकड़े को पार कर लिया। यूनिकार्न उन स्टार्टअप्स को कहते हैं, जिनकी मार्केट वैल्यू एक अरब को पार कर गई हो, इसी साल भारतीय यूनिकार्न का कुल पूंजी आधार 330 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया। दिलचस्प ये है कि सिर्फ बड़े शहरों में ही स्टार्टअप्स नहीं शुरू हुए और कामयाबियों के पथ पर आगे बढ़ते गए, बल्कि छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में नए-नए और सफल स्टार्टअप्स शुरू हुए।
एक दौर था, जब भारत को अनाज के लिए अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भारत के अन्नदाता के प्रयासों की वजह से साल 2022 में अन्न उत्पादन में देश ने रिकॉर्ड बनाया। पिछले साल देश में जहां 308.65 मिलियन टन से कुछ ज्यादा अन्न का उत्पादन हुआ था वहीं साल 2022 में ये बढ़कर करीब 316 मिलियन टन हो गया। साल 2022 में देश ने फल और सब्जी उत्पादन में भी रिकॉर्ड बनाया। साल 2020-21 के दौरान जहां फल-सब्जियों की पैदावार करीब 332 मिलियन टन थी, वह साल 2021-22 में बढ़कर करीब 343 मिलियन टन हो गयी।
कोरोना महामारी पर काबू पाने का साल
हालांकि साल के आखिर तक चीन से एक बार फिर हाहाकारी समाचार आने लगे। कोरोना की महामारी से चीन एक बार फिर जूझता नजर आने लगा। ऐसे में देश को तैयार होना ही था। आने वाली चुनौती से जूझने के लिए तैयार भी हुआ लेकिन जानकारों की मानें तो देश पर खतरा कम है। इसकी वजह रहा देश में तेजी से किया गया वैक्सीनेशन। भारत ने खुद के दम पर कोरोना की वैक्सीन बनाई और तेजी से टीकाकरण अभियान भी चलाया। साल बीतते-बीतते देश ने वैक्सिनेशन का दो अरब 20 करोड़ की संख्या को पार कर लिया।
अंतरिक्ष में कामयाबी की भरी नई उड़ान
साल 2022 में देश ने अंतरिक्ष में कामयाबी की भरी नई उड़ान। इसके साथ ही देश अंतरिक्ष तकनीक और सफलता के मामले में अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ्रांस जैसे देशों के क्लब में शामिल हो गया। बीते 18 नवंबर को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने जैसे ही पहले प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-एस' को अंतरिक्ष में भेजा, प्राइवेट कंपनियों के रॉकेट अंतरिक्ष में भेजने वाले देशों में शामिल हो गया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए उपग्रह 'विक्रम-एस' को स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया है।
रक्षा उत्पादन और टेलिकॉम
साल 2022 में मेक इन इंडिया ने भी कमाल दिखाया। इसकी वजह से देश ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की। दो सितंबर को केरल के बंदरगाह कोच्चि से स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को लांच किया गया। नौसेना की ताकत बना 'आईएनएस विक्रांत' देश के समुद्री इतिहास का सबसे बड़ा नौसैनिक जहाज है जिसमें दो हजार दो सौ कमरे हैं। पोत पर चालक दल के साथ ही सोलह सौ लोग सवार हो सकते हैं। 'आईएनएस विक्रांत' के जरिए भारत अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस जैसे स्वदेशी रक्षा उत्पादन वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया।
साल 2022 भारत में टेलीकॉम सेक्टर के लिए शानदार रहा। जहां एक ओर पीएम मोदी ने देश में 5G सर्विस की शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर 8वीं स्पेक्ट्रम नीलामी से अब तक का सबसे अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। देशभर के 50 शहरों में अब तक 5G सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने अक्टूबर से सेवाएं शुरू कर दी हैं। 5जी सेवा ग्राहकों को 4जी की तुलना में 10 गुना तेज इंटरनेट सेवा प्रदान करने में सक्षम है।
खेल और साहित्य की उपलब्धियां
साल 2022 खेल के क्षेत्र में भी भारत के लिए काफी अहम रहा। बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। खासतौर पर बेटियों ने अपना कमाल दिखाया। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स पहला खेल कुंभ रहा, जिसमें पहली बार में महिला क्रिकेट को शामिल किया गया। इसमें भारतीय बेटियों ने सिल्वर मेडल जीत कर नई कहानी लिख डाली। महिलाओं की लॉन बॉल्स टीम ने भारत को पहली बार गोल्ड मेडल दिलाकर भी इतिहास रचा। चार खिलाड़ियों की भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर 92 साल के इस खेल के इतिहास में देश को पहली बार मेडल दिलाया।
साल 2022 में भारत ने एक खिताब 21 साल बाद अपने नाम किया। भारत के जम्मू की रहने वाली सरगम कौशल 18 दिसंबर को मिसेज वर्ल्ड का ताज जीतने में कामयाब रही। उन्होंने 62 देशों की सुंदरियों को पीछे छोड़ते हुए ये खिताब अपने नाम किया। इसके पहले साल 2001 में अदिति गोवित्रीकर मिसेज वर्ल्ड चुनी गई थीं।
साहित्य के मोर्चे पर भी साल 2022 खुशियों का मौका लेकर आया। इसी साल प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार से हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि को सम्मानित किया गया। गीतांजलि श्री को यह पुरस्कार उनके उपन्यास की अमेरिकी अनुवादक डेज़ी रॉकवेल के साथ मिला। डेजी रॉकवेल ने इस उपन्यास का अनुवाद टूंब ऑफ सैंड के नाम से किया है। पहले जब भी किसी भारतीय रचनाकार की किसी रचना को अहम अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला वह उनके अंग्रेजी लेखन पर मिला लेकिन रेत समाधि पहली ऐसी रचना है जो मूल रूप से भारतीय भाषा में लिखी गई और उसे कोई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
नमामि गंगे और प्राकृतिक आपदाएं
साल 2022 भी गंगा के नाम एक उपलब्धि के लिए भी याद किया जाएगा। गंगा को साफ करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस नमामि गंगे प्रोजेक्ट की शुरूआत की है। संयुक्त राष्ट्र ने उसे दुनिया की 10 प्रमुख पहलों में शामिल किया है, जिनके जरिए प्राकृतिक दुनिया को बहाल करने की सफल कोशिश की गई है। दरअसल साल 2014 से 'नमामि गंगे' योजना चल रही है, जिसके जरिए गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण किया जा रहा है।
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बीता साल कुछ हादसों के लिए भी याद किया जाएगा। बीते साल चीन की ओर से अरूणाचल प्रदेश से लगी सीमा पर तवांग में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसमें कुछ सैनिक घायल हुए, हालांकि भारतीय सैनिकों ने इसे नाकाम कर दिया। बीते साल ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ का निधन हुआ तो भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर भी हमारा साथ छोड़ गईं। बीते साल उत्तराखंड के जंगल जहां आग से धधकते रहे, वहीं असम बाढ़ से तबाह रहा।
यह भी पढ़ें: Flashback 2022: बीतते साल के साथ काल के गाल में समा गयी भारत की कुछ महान हस्तियां
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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