Flashback 2022: बीतते साल के साथ काल के गाल में समा गयी भारत की कुछ महान हस्तियां
मृत्यु एक अटल सत्य है, इसलिए जो होता है, उसे ही विधि का विधान मानकर धैर्य रखना पड़ता है। 2022 ने भी हमसे हमारे अनेक बेशकीमती रत्न छीन लिए, जिनकी यादें और अतुल्य कामों की लंबी श्रृंखला, सदैव हमारे साथ रहेंगी।

Flashback 2022: बीतते साल के साथ 30 दिसंबर की सुबह होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबेन मोदी का निधन हो गया। अपने जीवन के शताब्दी वर्ष में पहुंची हीरा बा को कफ की तकलीफ के बाद बुधवार को अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल यूएन मेहता इंस्टीट्यूट में भर्ती करवाया गया था। गुरुवार आधी रात के बाद उनकी स्थिति बिगड़ गयी और शुक्रवार की भोर में उन्होंने अंतिम सांस ली।
प्रधानमंत्री मोदी को अपनी मां हीरा बा से बहुत लगाव था और वो नियमित उनसे मिलने जाते थे। अमेरिका में एक बार कार्यक्रम में वो यह बताते हुए भावुक हो गये थे कि कैसे उनकी मां ने लोगों के घरों में काम करके उन लोगों को पाला पोसा था। अपनी मां के निधन पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि "शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम। ...मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला था तो उन्होंने एक बात कही थी कि काम करो बुद्धि नी, जीवन जीयो शुद्धि नी। अर्थात काम बुद्धि से करो और जीवन शुद्धि से जियो।"
शुक्रवार की सुबह अहमदाबाद पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और मां के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इसके साथ ही 100वें वर्ष में हीरा बा का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया।
टूट गये सुर, शांत हुए बोल
गीत-संगीत और नृत्य की दुनिया को इस साल ने कुछ ज्यादा ही क्षति पहुँचायी। साल की शुरुआत में 17 जनवरी को विश्वविख्यात कथक गुरू बिरजू महाराज (92) के निधन ने नृत्य की थाप को थाम दिया। अगले ही महीने सुरसम्राज्ञी और सुर कोकिला जैसे नामों से जानी जाने वाली लता मंगेशकर (92) के रूप में 6 फरवरी को 'भारत' ने अपना एक 'रत्न' खो दिया। पाश्चात्य संगीत के वर्चस्व को चुनौती देते हुए, भारत में म्यूजिक प्लस मस्ती की अपनी खास शैली के जरिये युवाओं के दिलोदिमाग पर छा जाने वाले बप्पी लहरी (69) 15 फरवरी को जाते-जाते सबको उदास कर गये।
मई महीने में एक बार फिर संगीत की दुनिया के सुर टूटे और 10 मई को विख्यात संतूरवादक शिवकुमार शर्मा (84) सदा के लिए विदा हो गए। इसके बाद 29 मई को युवा पंजाबी रैपर सिद्धू मूसावाला (29) की असामाजिक तत्वों द्धारा हत्या ने लोगों को दहला दिया तो इसके दो ही दिन बाद 31 मई को लोकप्रिय गायक केके (कृष्णकुमार कुन्नथ) की एक कार्यक्रम के दौरान हृदयगति रुकने से मृत्यु ने सबको रुला दिया।
हंसाते-हंसाते रुला गये राजू
रुलाया तो राजू श्रीवास्तव (59) के निधन (21 सितंबर) ने भी, जो सारी जिंदगी गजोधर बनकर सबको हँसाते रहे। 2019 से वो उत्तर प्रदेश में फिल्म विकास बोर्ड के अध्यक्ष भी थे। उनके जरिए उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में नयी फिल्म सिटी बसाने के सपने को पूरा करने में लगी थी। लेकिन 10 अगस्त को ट्रेडमिल पर दौड़ते समय उनको दिल का दौरा पड़ा और लगभग डेढ महीना अस्पताल में जीवन मौत के बीच संघर्ष के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसी तरह मशहूर पार्श्वगायक कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ केके को भी 52 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ा था। वो भारत की कई भाषाओं की फिल्मों में प्लेबैक सिंगर थे। लेकिन राजू और केके की असामायिक मौत ने न सिर्फ उनके चाहने वालों का दिल दुखाया, बल्कि कम उम्र में दिल पर मंडराते मौत के खतरे और एक्स्ट्रीम वर्कआउट के साइड इफेक्ट्स को लेकर भी सबको चिंता में डाल दिया।
धरती से जुदा हुए धरतीपुत्र मुलायम
मुलायम सिंह यादव, जो हमेशा अपनी जमीन से जुड़ी राजनीति के लिए धरतीपुत्र के नाम से जाने जाते रहे, भी 10 अक्टूबर को प्रस्थान कर गये। उनके निधन से प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक न भरा जा सकने वाला शून्य पैदा हो गया। क्योंकि जब भी राष्ट्रीय स्तर पर, एक गैरभाजपाई और गैरकांग्रेसी मोर्चे की बात चलती तो 'नेताजी' के बिना चर्चा अधूरी ही मानी जाती थी।
कॉरपोरेट जगत को झटका
कारपोरेट और इंडस्ट्री सेक्टर के मामले में भी 2022 बेहद निर्दयी साबित हुआ। 12 फरवरी को बजाज आटो के जरिये देश के दोपहिया वाहन मालिकों के दिलों पर राज करने वाले पद्मभूषण राहुल बजाज (84) के निधन से उद्योग जगत को बहुत बड़ा आघात लगा। देश इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि 28 जून को शापूरजी पालोनजी समूह के पालोनजी मिस्त्री (93) और 31 अक्टूबर को टाटा समूह के पद्मभूषण उद्योगपति जमशेद जीजी ईरानी (86) भी इस नश्वर संसार को अलविदा कहकर चले गये।
लेकिन, भारत के वारेन बफेट कहे जाने वाले शेयर कारोबारी, निवेशक और अपने नेक कामों के लिए प्रसिद्ध राकेश झुनझुनवाला (62) की 14 अगस्त को कार्डियाक अरेस्ट से मृत्यु और 4 सितंबर को साइरस पालोनजी मिस्त्री (44) की एक सड़क हादसे में दर्दनाक मृत्यु ने तो उद्योग जगत को हिलाकर रख दिया।
ये दोनों मौतें अप्रत्याशित थी। राकेश झुनझुनवाला और साइरस मिस्री बड़े आर्थिक साम्राज्य का संचालन कर रहे थे। मृत्यु से कुछ समय पहले ही राकेश झुनझुनवाला ने आकासा एयरलाइंस की घोषणा किया था। इस एयरलाइंस में उनकी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। लेकिन दुर्भाग्य से 7 अगस्त को आकासा एयरलाइंस के शुरु होने के एक सप्ताह बाद ही उनका निधन हो गया।
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इसी तरह साइरस मिस्त्री भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल थे। मृत्यु से पूर्व उनकी नेटवर्थ 29 अरब डॉलर की थी। वो अनिवासी भारतीय थे लेकिन उनका कारोबार मुख्य रूप से भारत में ही फैला हुआ था। पारसी परिवार से संबंध रखने वाले साइरस मिस्त्री की टाटा सन्स में 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। सितंबर में उनकी मौत से दो महीने पहले जून में उनके पिता पलोनजी मिस्त्री का निधन हुआ था।
कुछ सीखना भी होगा
अपने आदर्शों का जीवन तो हमें बहुत कुछ सिखाता ही है, लेकिन कुछ मृत्यु भी हमें काफी कुछ सिखा जाती है। साइरस मिस्त्री भी एक ऐसी ही हस्ती थे। इस हादसे में उनकी मौत ने कार की पिछली सीट पर लगी बेल्ट न लगाने की आदत को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। इसके बाद नियमों को लेकर अधिक सख्ती पर जोर दिया गया ताकि पीछे की सीट पर बैठने वाली सवारियॉं भी सीटबेल्ट लगाने में कोताही न बरतें और फिर किसी के साथ वह न हो, जो मिस्त्री के साथ हुआ।
जिंदगी तो चलती रहती है, बस कुछ सॉंसें थम जाती हैं। अब जब नया साल दस्तक दे रहा है, हमें कामना करनी चाहिए कि यह साल सबके लिए अच्छा रहे।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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