Swara Bhaskar Marriage: पद्मिनी के जौहर का मजाक उड़ाने वाली स्वरा बनी फहद की बेगम

धर्म और समाज के खिलाफ मुखर रूप से बोलने वाली पार्ट टाइम अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फहद अहमद के साथ स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज कर लेने की घोषणा की है।

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Swara Bhaskar Marriage: स्वरा भास्कर ने जिस फहद जिरार अहमद से शादी का ऐलान किया है वो यूपी में बरेली का रहने वाला युवा नेता है। फहद पढाई के लिए मुंबई गया फिर छात्र राजनीति और मुस्लिम राजनीति का हिस्सा बन गया। स्वाभाविक है वो स्वरा भास्कर जितनी पहचान वाला व्यक्ति नहीं है लेकिन दोनों की मुलाकात ऐसे मौके पर हुई जहां संभवत: विचारधारा के स्तर पर दोनों में एकता नजर आयी। वह मौका था नागरिकता कानूनों (सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, 2019, या सीएए) का विरोध जिसके तहत भारत सरकार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के सताये हुए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने हेतु कानूनों में संशोधन किया था।

सीएए के खिलाफ भारत में अल्पसंख्यक कहे जाने वाले मुस्लिम समुदाय ने दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के दूसरे हिस्सों में उग्र विरोध किया था। इस विरोध में कम्युनिस्ट और लिबरल बिरादरी ने अपना भरपूर समर्थन दिया था। यह विरोध अंतत: दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों तक जा पहुंचा और लगभग 55 लोग इन हिन्दू विरोधी दंगों के शिकार हो गये। सैकड़ों लोगों के घर उजड़ गये और करोड़ों रुपए की संपत्तियां जलकर खाक हो गयी थीं।

फहद की स्वरा भास्कर से मुलाकात इन्हीं हिन्दू विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई। स्वरा भास्कर इन हिन्दू विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही थीं और फहद भी। यहीं से दोनों में प्यार हुआ और आखिरकार 6 जनवरी को दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। अभी तक कोर्ट मैरिज के जो फोटो सोशल मीडिया पर आये हैं उसमें यही दिख रहा है कि दोनों के परिवार से इस कोर्ट मैरिज में कोई शामिल नहीं हुआ है। सिर्फ कुछ यार दोस्त और परिचित ही नजर आ रहे हैं जो फहद की ओर से मौजूद हैं।

स्वरा भास्कर मशहूर रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व नेवी कमांडर सी. उदय भास्कर की बेटी हैं। स्वरा ने जेएनयू से पढाई की है और लंबे समय से बॉलीवुड में संघर्षरत हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में छोटा मोटा काम भी किया है। लेकिन उनकी चर्चा उनकी फिल्मों से ज्यादा उनके बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण होती रही है। वो मुखर रूप से भारत के हिंदू बहुसंख्यकों और उनकी मान्यताओं के खिलाफ बोलती हैं। भारतीय समाज, सभ्यता, संस्कृति में उन्हें चारों ओर खामियां ही दिखती थीं जिसके कारण वो इस 'ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक' व्यवस्था को अस्वीकार करती रहीं हैं।

2018 में जब संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज हुई थी तो स्वरा भास्कर ने कहा था कि "फिल्म देखकर उन्हें निराशा हुई है। आखिर हम महिला को सिर्फ वैजाइना (योनि) के रूप में ही क्यों देखते हैं? महिलाएं चलती-फिरती योनि मात्र नहीं हैं। हां, उनके पास योनि है, लेकिन उनके पास उससे भी ज्यादा बहुत कुछ है। उनकी पूरी जिंदगी योनि पर ही ध्यान केंद्रित करने, उस पर नियंत्रण करने, उसकी रक्षा करने और उसे पवित्र बनाए रखने के लिए नहीं है।"

कथित तौर पर भारत की दकियानूसी सोच पर कटाक्ष करते हुए उस समय उन्होंने कहा था, "अच्छा होता अगर योनि सम्मानित होती। लेकिन दुर्भाग्यवश अगर वह पवित्र नहीं रही तो उसके बाद महिला जीवित नहीं रह सकती, क्योंकि एक अन्य पुरुष ने बिना उसकी सहमति के उसकी योनि का अपमान किया है." उन्होंने लिखा कि "योनि के अलावा भी दुनिया है, इसलिए दुष्कर्म के बाद भी वे जीवित रह सकती हैं।" उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा था कि संजय लीला भंसाली जौहर प्रथा के खिलाफ फिल्म में कुछ दिखाते तो अच्छा था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

यानि स्वरा का कहना था कि रानी पद्मिनी और उनकी सहेलियों ने अपने सम्मान (स्वरा के शब्दों में कहें तो योनि) की रक्षा के लिए जो जौहर किया था, वह गलत था। संभवत: उस दौर में रानी पद्मिनी की जगह स्वरा भास्कर होती तो जौहर करने की बजाय अलाउद्दीन खिलजी के हरम में रहना ज्यादा पसंद करतीं। स्त्री की शुचिता का जो भारतीय दर्शन है वह उनके लिए एक पाखंड है। वो संभवत: जिस योनि का उल्लेख करके व्यंग करती रही हैं उससे ही संततियों का जन्म होता है। वह उस योनि को कैसे देखती हैं जिससे संतान की उत्पत्ति होती है, पता नहीं। लेकिन भारतीय समाज तो उसे पार्वती या कामाख्या के रूप में पूजता है। जैसे पुरुष का एक पत्नीव्रत या ब्रह्मचर्य संतति की शुद्धता का आधार है वैसे ही स्त्री के लिए योनि की शुचिता भारतीय संततियों की पवित्रता का आधार है। उसे खिलजी दूषित करे या फहद अहमद । विनाश तो भारतीय संतति का ही होगा।

लेकिन स्वरा भास्कर या उनकी जैसी सोच समझ वाले तथाकथित पढ़े लिखे लोग न तो परिवार के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं, न समाज के और न ही धर्म के। ये इन सीमाओं का अतिक्रमण करके इतनी दूर चले जाते हैं कि अपने ही परिवार, समाज और धर्म में इन्हें कुछ भी अच्छा नजर नहीं आता। कथित आधुनिकता और प्रगतिशीलता के नाम पर ऐसे लोग अपने आप को इतनी गाली दे देते हैं कि इन्हें अपने धर्म समाज में कुछ भी अच्छा नहीं दिखता। यह एक तरह से अपने आप को रूटलेस करने की प्रक्रिया होती है। जब आप रूटलेस (जड़ विहीन) हो जाते हैं तो गंदे नाले में भी आपको गंगा नहाने का अनुभव करना पड़ता है। वह इसलिए नहीं कि गंदा नाला गंगा हो गया है बल्कि इसलिए कि आपने गंगा को इतनी गाली दे दी है कि अब आपको गंदा नाला भी पवित्र नजर आता है।

भारत की कथित प्रगतिशीलता या आधुनिकता अपने ही अस्तित्व को नकारने की प्रक्रिया है। इसकी शिकार अकेली स्वरा भास्कर नहीं है। लाखों या शायद करोड़ों लोग इसी सोच समझ और मन मानस के साथ जी रहे हैं। यहां सवाल अंतर्धामिक विवाह का नहीं है। सवाल उस मानसिकता का है जो सभी नैतिक और सामाजिक सिद्धांतों से बाहर जाकर त्याग की जगह भोगपूर्ण सुख की कामना करता है। रानी पद्मिनी ऐसे लोगों को भला आदर्श स्त्री क्यों नजर आयेंगी? उनके अनुसार अपने पति रतन सिंह के नाम पर जौहर करने से ज्यादा सुविधाजनक यह होता कि पद्मिनी अलाउद्दीन खिलजी के हरम में जाकर खुश रहती। ऐसे लोगों के लिए रतन सिंह और अलाउद्दीन खिलजी में कोई फर्क नहीं होता। उनके लिए यौन व अन्य सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

ऐसी चेतनाशून्य और विकृत मन मानस की स्त्री कभी भारतीय समाज में आदर्श नहीं हो सकती भले ही वह स्वरा भास्कर ही क्यों न हों। भारत का लोक समाज ऐसे लोगों को आदर्श मानने की बजाय इन्हें नकारकर आगे बढ़ने में विश्वास करता है। लेकिन स्वरा के लिए असली समय अब शुरु होगा। इस्लाम में बिना धर्म परिवर्तन के शादी नहीं होती। कुरान और इस्लामिक शरीयत स्पष्ट रूप से इसका निषेध करती है। अगर किसी लड़की को किसी मोमिन से शादी करनी है तो अनिवार्य रूप से उसे इस्लाम कबूल करके निकाह पढ़ना पड़ता है। तभी इस्लामिक कायदों के मुताबिक शादी मंजूर होती है।

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    अब देखना ये होगा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत फहद अहमद से शादी करने वाली स्वरा इस्लाम कब कुबूल करती हैं, भले ही गुपचुप ही करे। बिना इसके फहद के परिवार और समाज में स्वरा को स्वीकृति नहीं मिलने वाली।

    यह भी पढ़ें: 'शादियां तो बस दिल की होती है, बाकी तो सब...', स्वरा-फहाद की शादी पर कंगना रनौत ने क्या कहा?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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