'शादियां तो बस दिल की होती है, बाकी तो सब...', स्वरा-फहाद की शादी पर कंगना रनौत ने क्या कहा?
स्वरा भास्कर एक राजनीतिक रैली में फहाद अहमद से जनवरी 2020 में मिली थीं। 16 फरवरी को स्वरा ने शादी की तस्वीरें शेयर की थी। स्वरा भास्कर ने अब खुलासा किया कि वह अब 'शहनाई वाली शादी' की तैयारी कर रही हैं।

बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने 16 फरवरी को फहाद अहमद के साथ अपनी शादी की सोशल मीडिया पर घोषणा की है। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर आई, स्वरा भास्कर के टाइमलाइन पर बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया। दिव्या दत्ता और सोनम कपूर जैसे बॉलीवुड सितारे स्वरा भास्कर के जश्न में शामिल हुए थे। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने भी ट्वीट कर बधाई दी है। कंगना रनौत ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर लिखा, ''आप दोनों खुश और भगवान की कृपा है धन्य दिख रहे हैं। शादियां दिलों में होती हैं बाकी सब औपचारिकताएं हैं।''
कंगना ने स्वरा के उस ट्वीट का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि वह और फहाद स्पेशल मैरिज एक्ट की बदौलत शादी कर सकते हैं। स्वरा भास्कर ने ट्वीट कर लिखा था, ''#SpecialMarriageAct के लिए तीन चीयर्स, नोटिस अवधि आदि के बावजूद भी मौजूद है और कम से कम यह प्यार को एक मौका देता है ...। प्यार का अधिकार, अपने जीवन साथी को चुनने का अधिकार, शादी करने का अधिकार, एजेंसी का अधिकार इन्हें विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए।''
क्या है स्पेशल मैरिज एक्ट
स्वरा ने अपने ट्वीट में खुलासा किया कि उन्होंने इस साल 6 जनवरी को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अपनी कोर्ट मैरिज के लिए कागजात जमा किए। 1954 का विशेष विवाह अधिनियम भारतीय संसद द्वारा भारत के लोगों के लिए पारित किया गया था जो नागरिक विवाह पंजीकरण और विवाह के अनुष्ठापन के लिए प्रदान करता है चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या पहचान का हो।
सरल शब्दों में कहे तो 1954 के अधिनियम के नियमों के अनुसार, दो अलग-अलग धर्मों के पुरुष और महिलाएं एक-दूसरे के धर्म में परिवर्तित हुए बिना नागरिक विवाह में प्रवेश कर सकते हैं। यह जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में मान्य है। इसकी प्रक्रिया के मुताबिक पार्टियों को शादी की चुनी हुई तारीख से 30 दिन पहले आवश्यक कागजी कार्रवाई के साथ विवाह अधिकारी को एक सूचना देनी होती है। अगर 30 दिनों के भीतर कोई आपत्ति नहीं की जाती है, तो विवाह संपन्न हो जाता है। यहां तक कि अगर आपत्तियां उठाई जाती हैं, तो अधिनियम ऐसी आपत्तियों को हल करने के लिए एक प्रक्रिया प्रदान करता है।












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