Daadi Ki Shaadi Review: रिश्तों और प्यार की परतों को खोलती है 'दादी की शादी', कपिल शर्मा-नीतू कपूर का कमाल

फिल्म- दादी की शादी (Daadi Ki Shaadi)
स्टारकास्ट- नीतू कपूर, कपिल शर्मा, रिद्धिमा कपूर
डायरेक्टर- आशीष आर मोहन
रनटाइम- 2 घंटे 30 मिनट
स्टार- 2 (**)

Daadi Ki Shaadi Review: आजकल फैमिली फिल्मों में या तो जबरदस्ती का मेलोड्रामा होता है या फिर ऐसी कॉमेडी जो 2 मिनट बाद याद भी नहीं रहती। आप सिनेमाघरों से बाहर निकलते हैं और उस कॉमेडी को भूल जाते हैं लेकिन आज यानी 8 मई 2026 को रिलीज हुई 'दादी की शादी' मूवी इन दोनों रास्तों से थोड़ा अलग चलती दिखती है। ये फिल्म लाउड होने की कोशिश नहीं करती, बस धीरे-धीरे आपके साथ बैठ जाती है जैसे किसी पुराने घर दहलीज की शाम।

क्या है फिल्म दादी की शादी की कहानी
स्टोरी का बेस काफी क्वर्की है। एक बुजुर्ग महिला की शादी और उस शादी के बहाने पूरे परिवार के इमोशन्स, इनसिक्योरिटीज, ईगो क्लैशेज और प्यार बाहर निकलकर सामने आना। सुनने में कॉन्सेप्ट फनी और थोड़ा सा अजीब लगता है लेकिन फिल्म इसे स्पूफ या मीम नहीं बनने देती।

Daadi Ki Shaadi

कॉमेडी ड्रामा फिल्मों से अलग है स्टोरी

यही मैच्योरिटी इसे बाकी कॉमेडी ड्रामा फिल्मों से अलग बनाती है। कहानी है भी ऐसी की इसे यहां पर ज्यादा बयां कर पाना इसके क्वर्किनेस को खत्म कर सकता है।

फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग

-नीतू कपूर इस फिल्म की सोल हैं। उनके सीन्स में ग्रेस भी है, लोनलीनेस भी और एक अजीब-सी इनोसेंस भी। कई मोमेंट्स ऐसे आते हैं जहां वो बिना किसी हैवी डायलॉग के पूरा सीन और दिल जीत लेती हैं।

-वहीं कपिल शर्मा सरप्राइजिंगली कंट्रोल्ड परफॉर्मेंस देते हैं। यहां वो स्टेज वाले कपिल नहीं बल्कि फैमिली कैओस में फंसा एक रिलेटेबल इंसान लगते हैं।

-इस फिल्म से रणबीर कपूर की बहन रिद्धिमा कपूर साहनी ने अपना डेब्यू किया है। उनका काम भी अच्छा है। पहली फिल्म के हिसाब से उन्होंने भी अपने हिसाब से ठीक काम किया है।

फिल्मी की लेखनी और म्यूजिक

-फिल्म की राइटिंग कई जगह बेहद ऑर्गेनिक लगती है। कैरेक्टर्स स्क्रिप्टेड कम और रियल ज्यादा महसूस होते हैं। फैमिली आर्ग्युमेंट्स, ऑक्वर्ड साइलेंसेज, शादी की तैयारियां, ये सब कुछ बहुत लिव्ड-इन वाइब देता है। हालांकि सेकेंड हाफ थोड़ा स्ट्रेच्ड महसूस होता है।

-कुछ इमोशनल सीन्स इम्पैक्ट क्रिएट करते हैं लेकिन कुछ जगह एडिटिंग टाइट हो सकती थी। जिससे फिल्म का कॉमिक स्पेस और भी अच्छा हो सकता था। बैकग्राउंड स्कोर और फिल्म का म्यूजिक बेहतर हो सकता था। फिल्म खत्म होने के बाद एक भी गाना जुबां पर नहीं रहता है।

-यही वजह है कि फिल्म का बज भी उतना ज्यादा नहीं रहा क्योंकि कोई यादगार गाना नहीं है। सिनेमैटोग्राफी भी सिंपल है, मगर उसी सिंप्लिसिटी में वॉर्म्थ है। फिल्म के लोकेशन्स अच्छे हैं और कुछ डायलॉग्स भी कसे हुए हैं।

क्यों देखें फिल्म 'दादी की शादी'?

'दादी की शादी' परफेक्ट फिल्म नहीं है लेकिन ऑनेस्ट फिल्म जरूर है। ये आपको क्लैप-वर्दी मोमेंट्स कम और फील-वर्दी मोमेंट्स ज्यादा देती है। अगर आपको ऐसी मूवीज पसंद हैं जो एंटरटेनमेंट के साथ थोड़ी इमोशनल कम्फर्ट भी दें, तो ये फिल्म आपके लिए काम कर सकती है। ये सिनेमा कम, फैमिली एल्बम ज्यादा लगती है। ऐसे में इसे आप इस वीकेंड अपने परिवार के साथ जाकर देख सकते हैं।

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