OI Explained: अगर ट्रंप हारे मिड टर्म इलेक्शन तो जाएगी कुर्सी? कितनी संभावना और क्या कहता है अमेरिकी संविधान?
OI Explained: ट्रंप जब से सत्ता में आए हैं वे एक के बाद एक वो फैसले ले रहे जिन्हें चुनाव लड़ने के दौरान उन्होंने अपने घोषणा पत्र में सिरे से खारिज कर दिया था। जैसे- ईरान या किसी भी दूसरे देश के साथ जंग शुरू करना या फिर अमेरिका में महंगाई कम करना। ट्रंप अपने सभी वादों से पलटते जा रहे हैं। वेनेजुएला और ईरान के साथ जंग लड़ चुके हैं और अमेरिका में महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि उन पर अमेरिका में होने वाले मिड टर्म इलेक्शन (मध्यावधि चुनाव) में हारने का खतरा मंडरा रहा है। आइए जानते हैं कि क्या होता है मिड टर्म इलेक्शन, इसका अगले राष्ट्रपति चुनाव पर क्या असर पड़ेगा, इसमें ट्रंप के हारने के चांस क्या हैं और यदि हार गए तो आगे क्या होगा।
राषट्रपति का पावर चेक हैं मिड टर्म इलेक्शन
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जितने बड़े माने जाते हैं, उतने ही अहम होते हैं Midterm Elections. ये चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं होते, बल्कि कई बार यह तय कर देते हैं कि अगले दो साल तक राष्ट्रपति कितनी ताकत से काम कर पाएंगे। आसान भाषा में कहें तो मिडटर्म चुनाव अमेरिका की राजनीति का पावर चेक होते हैं। 2026 में अमेरिका में फिर से Midterm Elections होने जा रहे हैं।

क्या होते हैं Midterm Elections?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। लेकिन इस चार साल के बीच, यानी ठीक दो साल बाद, पूरे देश में फिर से चुनाव कराए जाते हैं। इन्हें ही Midterm Elections कहा जाता है क्योंकि ये राष्ट्रपति के कार्यकाल के मिड पॉइंट यानी बीच में होते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर राष्ट्रपति चुनाव 2024 में हुआ और राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का है, तो बीच के दो साल बाद यानी 2026 में Midterm Elections होंगे।
कब होंगे 2026 के Midterm Elections?
2026 के Midterm Elections के लिए प्राथमिक चुनाव (Primary Elections) मार्च 2026 से शुरू होकर सितंबर 2026 के मध्य तक चलेंगे। इसके बाद पूरे अमेरिका में Midterm General Election मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
किन पदों के लिए होते हैं मिड टर्म इलेक्शन?
Midterm Elections में कई तरह के चुनाव होते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा फोकस अमेरिकी कांग्रेस पर रहता है। कांग्रेस अमेरिका की संसद जैसी संस्था है, जिसके दो हिस्से होते हैं-
• U.S. House of Representatives (हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव)
• U.S. Senate (सीनेट)
2026 के चुनावों में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सभी 435 सीटों पर वोटिंग होगी। इसके अलावा अमेरिकी सीनेट की 35 सीटों पर भी चुनाव होंगे। ये दोनों संस्थाएं अमेरिकी राजनीति में बेहद ताकतवर मानी जाती हैं क्योंकि यही कानून बनाती हैं और राष्ट्रपति के फैसलों को प्रभावित करती हैं।
राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच क्या रिश्ता होता है?
अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस दोनों अलग-अलग तरीके से चुने जाते हैं। राष्ट्रपति देश की Executive Branch यानी कार्यकारी शाखा को लीड करते हैं, जबकि कांग्रेस Legislative Branch यानी विधायी शाखा को कंट्रोल करती है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कानून बनाने की असली ताकत कांग्रेस के पास होती है। कांग्रेस ऐसे कानून पास कर सकती है जिन्हें राष्ट्रपति पसंद करें, या ऐसे भी कानून ला सकती है जिनसे राष्ट्रपति सहमत न हों।
यही वजह है कि कांग्रेस की ताकत राष्ट्रपति के पूरे एजेंडे को प्रभावित करती है। अगर कांग्रेस में राष्ट्रपति की पार्टी मजबूत है, तो उनके लिए फैसले लागू करना आसान हो जाता है। लेकिन अगर विपक्ष ज्यादा ताकतवर हो जाए, तो राष्ट्रपति के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

Midterm Elections = राष्ट्रपति का रिपोर्ट कार्ड?
अमेरिका में Midterm Elections को अक्सर राष्ट्रपति के कामकाज का Report Card माना जाता है। क्योंकि ये चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं, इसलिए लोग इन्हें जनता के मूड का संकेत मानते हैं। अगर राष्ट्रपति लोकप्रिय हैं, तो उनकी पार्टी को चुनाव में कम नुकसान होता है। लेकिन अगर जनता नाराज है, तो उनकी पार्टी को कांग्रेस में सीटें गंवानी पड़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चुनाव की तारीख जितनी करीब आती है, राष्ट्रपति की लोकप्रियता और चुनावी नतीजों का संबंध उतना ज्यादा मजबूत हो जाता है।
क्यों हार जाती है राष्ट्रपति की पार्टी?
अमेरिकी राजनीति में एक पुराना ट्रेंड रहा है कि लोग कुछ समय बाद बदलाव चाहते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर Midterm Elections में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है। 1934 से अब तक हुए पिछले 22 Midterm Elections में से 20 बार राष्ट्रपति की पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में सीटें गंवानी पड़ी हैं। इसका मतलब यह है कि अमेरिका में जनता अक्सर राष्ट्रपति को पूरी तरह खुली छूट देने के बजाय Balance of Power बनाए रखना पसंद करती है। सिर्फ फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट (1934) में ग्रेट डिप्रेशन के चलते और 2002 में जॉर्ज डब्लयू बुश 9/11 के बाद ऐसा करने में कामयाब रहे थे।

कांग्रेस में सीटें कम होने से राष्ट्रपति पर क्या असर?
जब राष्ट्रपति की पार्टी कांग्रेस में कमजोर हो जाती है, तो उनके लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Midterm Elections के बाद अक्सर कांग्रेस का शक्ति संतुलन बदल जाता है। इससे राष्ट्रपति की ताकत काफी हद तक सीमित हो जाती है। एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि किसी भी राष्ट्रपति के पास सबसे ज्यादा राजनीतिक ताकत उनके कार्यकाल के शुरुआती दो सालों में होती है। इसी वजह से कई दूसरे एक्सपर्ट्स अमेरिकी राष्ट्रपति पद को Two-Year Presidency भी कहते हैं।
Midterm Elections या अगले राष्ट्रपति चुनाव का संकेत?
बहुत से लोग मानते हैं कि अगर किसी राष्ट्रपति की पार्टी Midterm Elections हार जाए, तो अगला राष्ट्रपति चुनाव भी हार सकती है। लेकिन इतिहास ऐसा हमेशा नहीं दिखाता। 1952 से 2012 के बीच ऐसे 13 मामले सामने आए, जब सत्ता में बैठी पार्टी को Midterm Elections में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में सीटें गंवानी पड़ीं। इनमें से 6 बार उसी पार्टी ने बाद में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर व्हाइट House अपने पास रखा। वहीं बाकी 6 मामलों में पार्टी को सत्ता गंवानी पड़ी। तो मामला फिफ्टी-फिफ्टी दिखाई देता है। यानी Midterm Elections जरूरी तो होते हैं, लेकिन वे अगले राष्ट्रपति चुनाव का सीधा संकेत नहीं माने जा सकते। हालांकि जो भी हो पर ये ट्रंप का आखिरी कार्यकाल ही होगा।
ट्रंप हार गए तो क्या होगा?
2026 के Midterm Elections डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप अगले दो साल कितनी आसानी या मुश्किल के साथ शासन चला पाएंगे। अगर उनकी पार्टी कांग्रेस में मजबूत रहती है, तो उनके लिए अपने फैसले लागू करना आसान होगा। लेकिन अगर विपक्ष ज्यादा सीटें जीत लेता है, तो ट्रंप प्रशासन को हर बड़े फैसले पर चुनौती मिल सकती है। हालांकि, नवंबर 2026 के नतीजों के बाद भी अमेरिकी राजनीति शांत नहीं होगी। क्योंकि अगले ही दिन से 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी। इसीलिए अगर राष्ट्रपति मिड टर्म इलेक्शन हार भी जाते हैं तो वे कुर्सी पर तो बने रहेंगे लेकिन बिल पास कराना उनके लिए बहुत मुश्किल और असंभव के करीब हो जाएगा।
मिड टर्म में हारेंगे या जीतेंगे ट्रंप?
पिछले एक साल में ट्रंप का कार्यकाल उनकी मैडमेन की छवि बनाता है। वेनेजुएला पर जबरन थोपी गई जंग, ईरान में शुरू की गई जंग, आईसलैंड को धमकाना, यूरोप से रिश्ते खराब करना, यूनाइटेड नेशन्स के कानूनों को न मानना, क्यूबा जैसे छोटे देशों पर दादागीरी करना, अमेरिकी जनता और व्यापारी दोनों वर्गों में नाराजगी पैदा करना। अमेरिका में महंगाई को अपनी नीतियों के चलते न रोक पाना ये सारी बातें ट्रंप के खिलाफ जाती हैं। यहां तक कि ट्रंप के MAGA सपोर्टर भी उनसे दूरी बना रहे हैं। चुनाव में उन्हें फंड करने वाले एलन मस्क तक पहले ही उनसे दूर हो चुके हैं। ये बताता है ट्रंप का मिड टर्म इलेक्शन में क्या होने वाला है।
इसी साल नवंबर में मिड टर्म इलेक्शन होना है, इसीलिए आने वाले महीनों में अमेरिका का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी मोड में जाने वाला है, और पूरी दुनिया की नजर इन चुनावों पर बनी रहेगी।
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