सम्राट कैबिनेट में नहीं मिली मंगल पांडेय को जगह, मैथिलि ठाकुर की वजह से कटा तीन बार के मंत्री का पत्ता?
Mangal Pandey: बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। नई कैबिनेट में कई पुराने नेताओं को दोबारा मौका मिला, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय (Mangal Pandey) का नाम सूची से गायब रहने पर पार्टी के अंदर अलग तरह की चर्चा शुरू हो गई है। बिहार भाजपा के मजबूत चेहरों में गिने जाने वाले मंगल पांडेय को मंत्री नहीं बनाए जाने से उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में निराशा देखी जा रही है।
खास बात यह है कि शपथ ग्रहण समारोह में उनकी मौजूदगी भी रही, जिससे आखिरी समय तक उनके मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही थी। अब पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि क्या BJP नेतृत्व उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रहा है? पश्चिम बंगाल में उनके काम और संगठन पर पकड़ को देखते हुए कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

Bihar कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी चर्चा
सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। भाजपा कोटे से 15 नेताओं को जगह मिली, जबकि JDU से 13 मंत्री बनाए गए। इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो और जीतनराम मांझी व उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। नई कैबिनेट की सूची सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की हो रही है, जिनका नाम इस बार शामिल नहीं किया गया। इनमें सबसे बड़ा नाम मंगल पांडेय का माना जा रहा है।
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मंगल पांडेय कई साल तक रहे स्वास्थ्य मंत्री
मंगल पांडेय पहली बार 2017 में बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने थे। इसके बाद 2022 तक उन्होंने लगातार यह जिम्मेदारी संभाली। 2024 से 2025 के बीच वह स्वास्थ्य और कृषि विभाग दोनों देख रहे थे। बाद में NDA सरकार बनने पर उन्हें फिर स्वास्थ्य विभाग दिया गया। पिछले कई वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में उनके काम को भाजपा मंचों से कई बार सराहा भी गया। यही वजह है कि इस बार भी उनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा था।
बंगाल में भूमिका बनी चर्चा का कारण
मंगल पांडेय पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल में भाजपा संगठन के साथ सक्रिय रहे हैं। पहले उन्हें सह प्रभारी बनाया गया था और बाद में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बंगाल में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। इसी वजह से अब यह चर्चा तेज हो गई है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कुछ नेता यह भी मान रहे हैं कि बंगाल में पार्टी को मिली सफलता का इनाम उन्हें जल्द मिल सकता है।
सामाजिक समीकरण पर BJP का फोकस
सूत्रों की मानें तो भाजपा ने इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों को ध्यान में रखकर फैसले लिए हैं। इसी वजह से कई नए चेहरों को मौका दिया गया, जबकि कुछ पुराने नेताओं को बाहर रखा गया।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।
मैथिली ठाकुर के सवाल के बाद चर्चा में आए थे
इसी साल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के अस्पतालों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि अस्पताल की इमारत काफी जर्जर हो चुकी है और वहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मैथिली ठाकुर ने सदन में कहा था कि छत से प्लास्टर गिर रहा है, दीवारों में दरारें हैं और बारिश के दौरान वार्डों में पानी भर जाता है। उन्होंने सवाल उठाया था कि स्वास्थ्य बजट बढ़ने के बावजूद अस्पतालों की हालत क्यों नहीं सुधर रही।
मंगल पांडेय के जवाब से संतुष्ट नहीं थीं मैथिली
उस समय स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय ने जवाब देते हुए कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की नई बिल्डिंग को मंजूरी दे चुकी है और कई जगह काम चल रहा है। हालांकि मैथिली ठाकुर उनके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखीं। उन्होंने सदन में कहा था कि उनके इलाके का अस्पताल कई सालों से योजना में शामिल है, लेकिन जमीन पर कोई काम नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा था कि मरीज डर के माहौल में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मैथिली ठाकुर के लगातार सवालों के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था। इसके कुछ महीने बाद बिहार की राजनीति बदली और अब सम्राट चौधरी की अगुवाई में नई कैबिनेट बनी, जिसमें मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली।
सम्राट कैबिनेट से तीन पुराने मंत्रियों का कटा पत्ता
सम्राट चौधरी सरकार में ज्यादातर पुराने मंत्रियों को दोबारा मौका मिला, लेकिन तीन नेताओं को जगह नहीं मिल सकी। इनमें मंगल पांडेय के अलावा नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता शामिल हैं। नारायण प्रसाद पहले आपदा प्रबंधन मंत्री रह चुके हैं और पर्यटन विभाग भी संभाल चुके हैं। वहीं सुरेंद्र मेहता पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री रहे थे। इस बार दोनों नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।












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