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Corona New Variant: कितना डरावना है कोरोना वायरस का नया वेरिएंट बीएफ.7?

वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से भारत में कोरोना के खतरे में कमी आने लगी थी, परन्तु दोबारा इस वायरस ने सबको हाई अलर्ट पर डाल दिया है! क्या सच में कोरोना के नए वेरिएंट बीएफ.7 से डरने की आवश्यकता है?

coronavirus in india should be worried for covid-19 variant bf 7 symptoms

Corona New Variant: चीन सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की वापसी की तस्वीरों ने भारतीय जनता की भी चिंता बढ़ा दी है। देश में कोरोना वायरस की स्थिति और कोविड 19 के नए वेरिएंट से बचाव को लेकर प्रधानमन्त्री मोदी ने गुरुवार को एक हाई लेवल मीटिंग भी बुलाई थी, जिसमें सुरक्षा के लिए आवश्यक गाइडलाइंस का पालन करने तथा जीनोम सीक्वेंसिंग और कोविड टेस्टिंग बढ़ाने की भी बात कही है।

सोशल मीडिया, टीवी चैनल्स पर वीडियो घूम रही हैं कि चीन में फिर से अस्पतालों में बेड भरने लगे हैं। मृतकों की संख्या इतनी अधिक है कि अंतिम संस्कार सामूहिक रूप से करना पड़ रहा है। WHO के अधिकारी कह रहे हैं कि यह नया वेरिएंट अभी तक का सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट है। जिसका नाम है ओमिक्रॉन बीएफ. 7।

चीन में इस समय कोहराम मचाने वाला BF.7 वैरिएंट आखिर ऐसा कर क्या रहा है, जो लोग भयभीत हो रहे हैं? यह वेरिएंट चीन में सभी को लगाई गई वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी को चकमा दे कर शरीर में प्रवेश कर जा रहा है। ऐसे में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र समय रहते उससे बचाव के लिए ऐक्टिव नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कोरोना के आरंभिक दौर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जैसा कि चीन से आने वाली ख़बरों में देखने को मिल रहा है।

हालांकि यह कोई बहुत अलग वेरिएंट नहीं है। यह भी ओमिक्रॉन का ही BA.1, BA.2, BA.5 की भांति ही एक सबसे नया पाया गया वेरिएंट है, जिसका पूरा नाम ओमिक्रॉन BA.5.2.1.7 दिया गया है। इसे ही संक्षिप्त में BF.7 कहा जा रहा है।

इस नए वेरिएंट में अलग तरह के म्यूटेशन के कारण यह एंटीबॉडी को अलर्ट होने का मौका नहीं देता। BF.7 वैरिएंट कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन में R346T नामक म्यूटेशन बना है, जो वैक्सीन से बने एंटीबॉडी को धोखा देकर शरीर की कोशिकाओं में बिना किसी अवरोध प्रवेश कर सकता है।

अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और बेल्जियम आदि देशों में भी BF.7 के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को पहले कोरोना हो चुका है या उसने वैक्सीन लगवाई है, तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। यह एंटीबॉडी दोबारा वायरस के दुष्प्रभाव से शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है। BF.7 वैरिएंट इस एंटीबॉडी को चकमा देकर शरीर में घुसने में सक्षम है।

इसमें हम सभी के लिए समझने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कोई अलग लक्षण वाला वेरिएंट नहीं है। कोरोना का यह ओमिक्रॉन वैरिएंट BF.7 संक्रमण में भी पहले मिल चुके वैरिएंट्स के ही लक्षण दिखाई देते हैं। वॉयरस का यह वैरियंट भी व्यक्ति के श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को ही प्रभावित करता है। अन्य सभी वेरिएंट्स की तरह यह भी कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को ही शिकार बनाता है।

कोरोना महामारी के बाद से आम लोगों के बीच में इम्यूनिटी एक बेहद प्रचलित शब्द बन गया है। लोग यह समझ चुके हैं कि शरीर की आंतरिक सुरक्षा तंत्र का मजबूत होना ही किसी भी वायरस या अन्य बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर उपाय है। ओमिक्रॉन हो या इन्फ्लुएंजा या फिर सामान्य फ्लू, अपना प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत रखने से व्यक्ति अनेकों विषाणुओं से बच सकता है।

बदलते मौसम, सर्दी के दिनों में सामान्य रूप से भी आंवले का सेवन अत्यंत उपयोगी माना जाता है। जो शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता चमत्कारिक रूप से बढ़ाता है। विटामिन ए और विटामिन डी का भी इसमें विशेष रोल है। विटामिन ए के लिए पीले फल, गाजर, पपीता, दूध आदि का नियमित सेवन करें। प्राकृतिक तरीके से विटामिन डी का निर्माण हो इसके लिए हर दिन कम से कम एक घंटा धूप में बैंठें। किंतु महानगरों में अत्यधिक प्रदूषण के कारण प्राकृतिक रूप से विटामिन डी का बन पाना सहज नहीं हो पाता है ऐसे में लोगों को जांच करा के विटामिन डी के सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है।

जब भी वायरल संक्रमण की बात होती है, लोग गरम पानी का उपयोग अधिक करना उपयुक्त मानते हैं। किंतु बहुत अधिक तापमान वाला पानी पीना आपकी एसिडिटी बढ़ा सकता है। अतः गरम पानी को कम मात्रा में चाय की तरह सिप करके पियें। 'नस्य' का भी प्रयोग अधिकाँश लोग अब जानने लगे हैं। नाक में सरसों का तेल या 2-2 बूंद गाय का घृत लगाना भी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में दी जाने वाली सलाह है। सब्जी पकाते समय उसमें आधा चम्मच सोंठ पाउडर डालें।

दिन में दो बार काढ़ा अवश्य पीने वाले लोग पहले अपने शरीर की प्रकृति को भली भांति समझ लें। क्योंकि यदि अपनी प्रकृति के विपरीत काढ़ा का अधिक सेवन किया तो इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। सामान्य रूप से तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, सोंठ, मुनक्का, लौंग व गुड़ डालकर पकाया गया काढ़ा सर्दी के मौसम में एक बार लिया जा सकता है। किन्तु यदि इसमें से किसी भी चीज से आपको परेशानी होती है तो उसे न लें। शरीर की तासीर और लिए जाने वाले पदार्थ की तासीर को समझ कर ही नियमित सेवन करना चाहिए।

इम्यूनिटी को दुरुस्त रखने के लिए मन का शांत और स्थिर रहना एक महत्वपूर्ण बात है। तमाम रिसर्च यह सिद्ध करते हैं कि मन को सकारात्मक बनाए रखना, शरीर को स्वस्थ रखने और किसी भी प्रकार के विषाणु, रोगाणु से लड़ने के लिए अति आवश्यक है। पोषक आहार, सकारात्मक मन, हमारा नियमित ध्यान-प्राणयाम-योग और अपनों का सहयोग मिल कर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने का आधार है।

कोरोना वायरस से जंग के दौरान पिछले इतने समय में हम सब बहुत कुछ सीख चुके हैं। उन्हीं सावधानियों का ठीक से पालन करना है। अपना और अपनों का ख्याल रखना है। कोरोना ने हमें बाहरी दिखने वाली चीज़ों के मुकाबले आंतरिक शुद्धि, स्वच्छता, स्वस्थ जीवन और परिवार और संबंधों के महत्व को समझाया है। तन - मन को शुद्ध, स्वच्छ रखें। उसका पोषण करें। चित्त को शांत रखें। शारीरिक दूरी का पालन करें, मास्क लगाएं और रिश्तों को सहेजें, एक दूसरे का ख्याल रखें क्योंकि कोरोना वायरस से बचाव ही समाधान है।

यह भी पढ़ें: 'भारत अच्छा कर रहा है, चीन की तरह यहां नहीं फैलेगी महामारी', जानें डॉ. गगनदीप कांग ने ऐसा क्यों कहा?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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