CJP Protest Delhi: सोनम वांगचुक की एंट्री से गरमाया जंतर-मंतर, Gen Z बोले- 'सोनम को बनाओ शिक्षा मंत्री'

Cockroach Janta Party Delhi Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित 'Gen Z' छात्र आंदोलन शनिवार, 6 जून को उस समय एक नए राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में बदल गया, जब लद्दाख के शिक्षाविद्, पर्यावरणविद् और रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांग्चुक (Sonam Wangchuk) खुद छात्रों का हौसला बढ़ाने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

सोनम वांग्चुक के मंच पर आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद हजारों युवाओं का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ एक बेहद चौंकाने वाला नारा बुलंद किया। पूरे प्रदर्शन स्थल पर गूंजने लगा-"सोनम वांग्चुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाओ।"

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युवाओं का मानना है कि देश की जर्जर और पेपर लीक से प्रभावित शिक्षा व्यवस्था को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सोनम वांग्चुक जैसा एक दूरदर्शी शिक्षाविद् ही ठीक कर सकता है।

'इस्तीफा तो सिर्फ शुरुआत है, पूरी व्यवस्था का ओवरहॉल जरूरी' - सोनम वांग्चुक

जंतर-मंतर पर उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए सोनम वांग्चुक ने छात्रों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया, लेकिन साथ ही आंदोलन को एक बड़ी और गहरी दिशा भी दी। उन्होंने केवल सतही सुधारों के बजाय पूरी शिक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव (Comprehensive Reforms) की वकालत की।

वांग्चुक ने CJP के प्रोटेस्ट को संबोधित करते हुए कहा-"केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तो महज एक शुरुआत है। हमारा मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को पद से हटाना नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना है। परीक्षाओं में होने वाली ये गड़बड़ियां और बार-बार होने वाले पेपर लीक तो केवल एक बहुत बड़ी और गहरी बीमारी के बाहरी लक्षण (Symptoms) हैं। इस पूरी व्यवस्था को बदलाव की जरूरत है, ताकि देश के हर बच्चे को पारदर्शिता, जवाबदेही और क्वालिटि एजुकेशन मिल सके।"

परीक्षा घोटालों और पेपर लीक पर उठाए सवाल

वांगचुक ने युवाओं का समर्थन करते हुए कहा कि- हाल के सालों में सामने आए विभिन्न परीक्षा विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक, परीक्षा परिणामों पर सवाल और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं यह दर्शाती हैं कि शिक्षा व्यवस्था के कई हिस्सों में गंभीर खामियां मौजूद हैं। उनके अनुसार, केवल दोषियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए नीति स्तर पर बदलाव और ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सके।

युवाओं ने जताया समर्थन

जंतर-मंतर पर मौजूद कई छात्रों और युवाओं ने सोनम वांगचुक के विचारों का समर्थन किया। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पोस्टर और बैनर भी दिखाई दिए जिनमें शिक्षा सुधार की मांग की गई थी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने वांगचुक को देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने वाला चेहरा बताते हुए उन्हें शिक्षा मंत्री बनाए जाने की मांग तक कर डाली। इसी दौरान "Sonam Wangchuk should become Education Minister" और "शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ" जैसे नारे लगातार सुनाई देते रहे।

CJP आंदोलन को मिला नया बल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह आंदोलन पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुए इस अभियान को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिला है। सोनम वांगचुक के आंदोलन में शामिल होने को CJP के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता के कारण आंदोलन को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के संबोधन के बाद एक बार फिर देश में शिक्षा सुधार को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन और उठ रही मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। फिलहाल जंतर-मंतर से उठी आवाज ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

'अगर हम नहीं तो कौन? अगर अभी नहीं तो कब?' - वांगचुक

बता दें कि प्रोटेस्ट में आने से पहले 59 वर्षीय एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी रणनीति और गुस्से को जाहिर करते हुए एक बेहद तीखा पोस्ट साझा किया था। उन्होंने लिखा-अगर हम नहीं, तो कौन? अगर अभी नहीं, तो कब? अगर 5 जून तक परिस्थितियों में कोई सुधार नहीं होता है, तो मैं 6 जून को दिल्ली में CJP के सदस्यों के साथ शामिल होने जा रहा हूं। जब चीजें इस हद तक बिगड़ जाएं, तो किसी भी आत्मसम्मान वाले मंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए यह सिर्फ एक पद की बात नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के जीवन और भारत के भविष्य का सवाल है।

सोनम वांगचुक का यह समर्थन ऐसे समय पर आया है जब पिछले साल सितंबर के दौरान लद्दाख की स्वायत्तता और विशेष दर्जे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में उन्हें लगभग छह महीने तक हिरासत में रखा गया था। हिरासत से बाहर आने के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर यह उनका पहला बड़ा कदम है।

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