'कुछ लोगों को भले ही अच्छा ना लगे, मैं RSS का सदस्य था', विदाई समारोह में बोले जस्टिस चितरंजन दास
Calcutta High Court judge: कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से सोमवार (20 मई) को रिटायर हुए जस्टिस चितरंजन दास ने कुछ ऐसा कहा है कि वो सुर्खियां बन गई हैं। उन्होंने अपने विदाई समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य थे।
कलकत्ता हाईकोर्ट में न्यायाधीशों और बार के सदस्यों की उपस्थिति में जस्टिस चितरंजन दास ने कहा कि, "कुछ लोगों को भले ही अच्छा ना लगे, मुझे यहां स्वीकार करना होगा कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का सदस्य था और हूं।"

'संगठन में वापस जाने के लिए तैयार'
रिटायर होने के बाद बोले विदाई के लिए आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस चितरंजन दास ने कहा कि यदि संगठन उन्हें किसी भी सहायता या किसी ऐसे काम के लिए बुलाता है, जिसमें वह सक्षम हैं तो वह संगठन में वापस जाने के लिए तैयार हैं।
'संगठन का मुझ पर बहुत एहसान'
मालूम हो कि न्यायाधीश के रूप में 14 वर्षों से अधिक समय तक पद छोड़ने के बाद जस्टिस दास ट्रांसफर पर उड़ीसा हाई कोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट में आए थे। उन्होंने इस बात को भी दोहराया कि संगठन का मुझ पर बहुत एहसान है। मैं बचपन से लेकर युवावस्था तक वहां रहा हूं।
उन्होंने आगे कहा, "मैंने साहसी, ईमानदार होना और दूसरों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना तथा देशभक्ति की भावना और काम के प्रति प्रतिबद्धता से ऊपर रहना सीखा है।" जस्टिस दास ने कहा कि उन्होंने अपने काम की वजह से करीब 37 साल तक संगठन से दूरी बना ली थी।"
'सदस्यता का इस्तेमाल उन्नति के लिए नहीं किया'
उन्होंने कहा, "मैंने कभी भी संगठन की सदस्यता का इस्तेमाल अपने करियर में उन्नति के लिए नहीं किया, क्योंकि यह इसके सिद्धांतों के खिलाफ है।"
न्यायमूर्ति दास ने कहा कि उन्होंने सभी के साथ समान व्यवहार किया, चाहे वह कोई अमीर व्यक्ति हो, चाहे वह कम्युनिस्ट हो या भाजपा, कांग्रेस या टीएमसी से हो। उन्होंने कहा, ''मेरे सामने सभी समान हैं, मैं किसी के लिए या किसी राजनीतिक दर्शन या तंत्र के लिए कोई पूर्वाग्रह नहीं रखता हूं।''
उन्होंने कहा, "चूंकि मैंने अपने जीवन में कुछ भी गलत नहीं किया है, इसलिए मुझमें यह कहने का साहस है कि मैं संगठन से जुड़ा हूं, क्योंकि यह भी गलत नहीं है।"












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