Varanasi : दो साल की बच्ची ने आंख में डाला फेविक्विक, करना पड़ा ऑपरेशन, चिपक गई थी पुतली

एक 2 साल की बच्ची की आँखों में फेवीक्विक पड़ जाने की वजह से उसकी ऑंखें चिपक गई। बच्ची के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन जब उसके पास पहुंचे तो उनके भी होश उड़ गए। आनन फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया

Varanasi Two year old girl put feviquik in her eye had to undergo an operation the pupil was stuck

फेवीक्विक के बारे में तो हम सभी जानते हैं। फेवीक्विक एक साइनोएक्रीलेट (केमिकल) गोंद है। यह किसी भी चीज को चिपकाने के लिए काम आता है। यह एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो दो चीजों को बेहद मजबूती से चिपका देता है। कई बार फेविक्विक हमारी उंगलियों पर लग जाता है और हमारी उंगलियां भी आपस में चिपक जाती है। सवाल यह है कि यदि फेवीक्विक आंखों में चला जाए तो क्या होगा?
2 साल की बच्ची की आँखों में पड़ गया फेवीक्विक
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक दर्दनाक और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। जिसमे एक 2 साल की बच्ची की आँखों में फेवीक्विक पड़ जाने की वजह से उसकी ऑंखें चिपक गई। बच्ची के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन जब उसके पास पहुंचे तो उनके भी होश उड़ गए। आनन फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने करीब आधे घंटे तक मासूम का ऑपरेशन किया। जिसके बाद बच्ची की स्थिति सामान्य हो पाई।

Varanasi Two year old girl put feviquik in her eye had to undergo an operation the pupil was stuck

आधा घंटे चला ऑपरेशन, चिपक गई थी पुतली
बता दें कि वाराणसी के चौक निवासी दो साल की बच्ची समृद्धि को लेकर परिजन मंगलवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे बड़ी पियरी स्थित नर्सिंग होम में नेत्र सर्जन डॉ. अनुराग टंडन के पास पहुंचे। डॉ. टंडन ने बताया कि परिजनों से घटना का कारण पूछने पर पता चला कि बच्ची ने घर में रखे फेविक्विक को उठा कर बाएं आंख में डाल लिया। उसके बाएं आंख की पुतली फेविक्विक लगने की वजह से चिपक गई थी। जानकारी होने के बाद परिजन तुरंत नर्सिंग होम लेकर आए। यहां प्राथमिक जांच के बाद उसका ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। सामान्य एनीस्थिसिया देकर उसका ऑपरेशन किया गया।

Varanasi Two year old girl put feviquik in her eye had to undergo an operation the pupil was stuck

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    परिजनों की तत्परता से बच गई आंख की रौशनी
    करीब आधे घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति सामान्य हुई। जानकारी अनुसार मंगलवार शाम करीब चार बजे बच्ची को डिस्चार्ज भी कर दिया गया। अब उसे किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि अगर समय से बच्ची नहीं आती तो उसके आंखाें की कार्निया को नुकसान हो सकता था। परिवारवालों की तत्परता की वजह से बच्ची का समय से इलाज हुआ और उसकी आंखों की रोशनी बच गई। परिजनों को बच्ची की सेहत पर विशेष निगरानी करते रहने की सलाह दी गई है।

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