वाराणसी से प्रयागराज तक गंगा में चलेगा क्रूज, कुंभ मेला से पहले चलाने की तैयारी
वाराणसी से प्रयागराज तक गंगा नदी में क्रूज चलाने को लेकर तैयारियां चल रही हैं, बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति पर लगने वाले कुंभ मेले से पहले संचालन शुरू हो जाएगा
वाराणसी से प्रयागराज तक गंगा नदी में क्रूज चलाने को लेकर एक बार फिर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। बताया जा रहा है कि गंगा में दो जगहों पर फ्लोटिंग जेट्टी लगाई जाएंगी और मकर संक्रांति पर लगने वाले कुंभ मेले से पहले क्रूज़ का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। इसे लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस कार्य में करीब सात करोड़ से अधिक रुपए खर्च होंगे। ऐसे मैं वाराणसी से प्रयागराज तक क्रूज सेवा प्रारंभ हो जाने पर पर्यटकों के आवागमन में जहां आसानी होगी वहीं काफी सस्ते दाम में सामानों का भी आवागमन किया जा सकेगा। हालांकि इस बारे में अधिकारियों से बात किया गया तो कोई भी अफसर स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दे रहे हैं।

2019 में क्रूज चलाने का बना था प्लान
यह भी बता दें कि वाराणसी से प्रयागराज तक क्रूज़ सेवा शुरू करने के लिए वर्ष 2019 में ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। उस समय बताया गया था कि वाराणसी से प्रयागराज के बीच क्रूज़ सेवा प्रारंभ हो जाने के बाद पर्यटक यहां गंगा नदी से भ्रमण करते हुए वाराणसी से प्रयागराज तक का सफर करेंगे वही सामानों के आवागमन में भी आसानी होगी। काफी प्रयास के बाद भी वर्ष 2019 में क्रूज सेवा शुरू नहीं हो सकी और यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। लेकिन पिछले दिनों वाराणसी में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जलमार्ग को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। उसी कार्यक्रम में वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक क्रूज सेवा संचालित करने का प्लान तैयार किया गया। इसके अलावा पूर्वांचल समेत आसपास के जनपदों में भी जलमार्ग को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई थी।

वाराणसी, अयोध्या और मथुरा में तैनात होंगे कैटामेरन
वाराणसी के दीनदयाल हस्तकला संकुल में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच में 11 नवंबर को एक करार किया गया। इस करार के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा 100 पैक्स हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर कैटामारन जलयान का डिजाइन और विकास केपीआईटी पूणे के सहयोग से कराया जाएगा। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाइड्रोजन एवं इलेक्ट्रिक कैटामेरन वाराणसी, अयोध्या, मथुरा हेतु अनुबंध तथा वाराणसी एवं डिब्रूगढ़ के मध्य क्रूज के समय सारणी का भी विमोचन किया गया। उक्त कार्यक्रम में भारत सरकार में बंदरगाह, नौवहन व जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, वाणिज्य व उद्योग, उपभोक्ता मामले तथा खाद्य एवं जन वितरण हेतु केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भारी उद्योग मंत्री महेन्द्र नाथ पांडेय भी मौजूद रहे।

जलमार्ग के लिए 62 घाटों का निर्माण
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा गंगा नदी पर 62 लघु सामुदायिक घाटों का विकास और अपग्रेड कर रहा है। इनमें से 15 उत्तर प्रदेश में 21 बिहार में, 3 झारखंड में और 23 पश्चिम बंगाल में हैं। उत्तर प्रदेश में वाराणसी और बलिया के बीच 250 किलोमीटर में घाट विकसित किए जा रहे हैं। ये घाट यात्री एवं प्रशासनिक सुविधाओं से युक्त होंगे जिनसे नदी पर सामान एवं मुसाफिरों की आवाजाही संभव होगी और समय तथा लागत की बचत होगी। घाटों का परिचालन आरंभ हो जाने से छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में वृद्धि होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और इस सब से समुदायों को लाभ होगा। अन्तर्देशीय जलमार्गों के विकास पर ध्यान केन्द्रित करने से विकास एवं परिचालन के मानकीकरण में मदद मिलेगी, फलस्वरूप स्थानीय समुदायों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो पाएंगी और उनकी आजीविका में भी सुधार होगा।
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