देवडोलियों के बीच चल रहा था पांडव नृत्य,प्रकट हुआ 5 फीट लंबा सांप, फिर जो हुआ हर कोई रह गया दंग Viral video
viral video उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। यहां कण कण में भगवान के दर्शन और शक्तियां आसानी से दिख जाती है। उत्तराखंड में देवताओं की तरह नागों को भी पूजा जाता है। मान्यता है कि नागदेवता सांप के रूप में कहीं और कभी भी प्रकट हो सकते हैं।
इसी तरह का एक मामला आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। जो कि उत्तरकाशी के सरनौल गांव का है। यहां सरुताल से लौट रही देव डोलियां जैसे ही गांप के चौक में पहुंची तो देव डोली के नृत्य और वाद्य यंत्रों के बीच करीब पांच फीट लम्बा सांप अवतरित हो गया।

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जिसने देखा हर कोई हतप्रभ हो गया। इस बीच देव डोलियों के साथ चल रहे पांडव पशवा (जिस व्यक्ति पर देवता अवतरित होता है) ने सांप को उठाया और देव डोली से भेंट कराने के बाद गले में डालकर सांप के साथ नृत्य करने लगे। जिसके बाद हर कोई हैरान हो गया और हर तरफ देवता के जयकारे के नारे लगने लगे और माहौल भक्तिमय हो गया।
कैमरे में कैद पूरी घटना
पूरे घटनाक्रम को लोगों ने कैमरे में कैद कर लिया। बाद में देवता के पशवा ने सांप को हाथ में लेकर सभी को नाग देवता के रूप में आशीर्वाद दिया और दूध पिलाने के बाद सांप को मन्दिर परिसर में ही विदा कर दिया।
महाभारत कालीन संस्कृति की पहचान
उत्तरकाशी जिले की रवाईं घाटी (यमुनाघाटी) के सुदूरवर्ती सरनौल गांव अनोखे पांडव नृत्य के चलते देशभर में महाभारत कालीन संस्कृति की पहचान रखता है। पांडव पश्वाओं की ओर से अद्भुत और अकल्पनीय देव नृत्य की प्रस्तुति ने देशभर में अलग पहचान बनाई है। इस बीच देव डोली रेणुका देवी, जमदग्नि ऋषि की उपस्थिति में नागराज के दर्शन ने सरनौल गांव की इस अनोखी घटना से हर कोई हैरान है।
देवस्थल पर प्रकट हुआ सांप
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पास ही सरुताल बुग्याल है। जहां ग्रामीण देव डोलियों और पांडवों को लेकर यात्रा पर गए थे। जब गांव लौटे तो देवस्थल पर पहुंचते ही देव डोली के सामने करीब पांच फीट लम्बा सांप प्रकट हो गया। यह देखते ही देवताओं के साथ सैकड़ों की संख्या में जुटी ग्रामीणों के बीच हड़कंप मच गया। लेकिन इससे पहले ही पांडव पशवा ने सांप को उठाकर पहले देव डोली से भेंट कराया और फिर अपने गले में डाल दिया।
सांप को दूध पिलाकर दी विदाई
यह देखकर लोगों में दहशत हो गई। लेकिन देवता के पशवा ने सांप को नागराज का रूप बताया तो सभी के शीश झुक गए और देव डोली के पास जाने लगे। इसके बाद पांडव पशवा ने सांप को हाथ में लेकर ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया। बाद में ग्रामीणों ने सांप को दूध पिलाकर और पूजा अर्चना कर मंदिर परिसर में विदा कर दिया है। मां रेणुका मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बिजेंद्र राणा ने कहा कि यह सब देवता का रूप है। मां रेणुका और भगवान जमदग्नि के दर्शन को ही नाग देवता अवतरित हुए हैं।












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