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Uttarakhand UCC: कैसा है उत्तराखंड में इसी महीने लागू होने वाला यूनिफॉर्म सिविल कोड, इसके बारे में सबकुछ समझिए

Uttarakhand UCC: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को एलान किया है कि 2022 के चुनावी वादे के अनुसार ही उनकी सरकार इसी महीने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने जा रही है। माना जा रहा है कि यह नया कानून 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस से अमल में आ सकता है।

सीएम धामी ने कहा,"हमने कहा था कि हम देवभूमि में रहने वाले हरेक व्यक्ति के लिए एक समान कानून लागू करेंगे और हम वो वादा पूरा कर रहे हैं। मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से हमारा प्रस्ताव पारित हो गया है। बहुत जल्द इसी माह हम इसे लागू करने वाले हैं।"

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Uttarakhand UCC: डेडिकेटेड पोर्टल से नागरिकों को मिलेगी रजिस्ट्रेशन और शिकायतों की सुविधा

राज्य सरकार की ओर से इसके रजिस्ट्रेशन और शिकायतों को सुव्यवस्थित करने के लिए नागरिकों,अधिकारियों और सर्विस सेंटर के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग लॉगिन विकल्पों के साथ एक विशेष यूसीसी पोर्टल तैयार किया गया है।

इसके सही तरीके से संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रदेश स्तर पर तीन स्तरीय सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, जहां से राज्य के लोगों को तकनीकी और कानूनी सहायता भी उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों को व्यापक ट्रेनिंग भी दी गई है।

Uttarakhand UCC: उत्तराखंड के सभी लोगों पर लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का कहना है, "2022 के चुनाव में हमने वादा किया था कि राज्य के अंदर रहने वाले हरेक व्यक्ति के लिए चाहे किसी जाति का होगा, किसी पंथ का होगा, किसी समुदाय का होगा, हमने कहा था कि देवभूमि में रहने वाले हरेक व्यक्ति के लिए एक समान कानून लागू करेंगे।"

ऐसे में समझना जरूरी है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता या यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने पर लिव-इन संबंधों,विवाहों और इनसे जुड़े सिविल मामलों पर यह किस तरह से प्रभावी होगा?

Uttarakhand UCC: समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता वह कानून है, जो विवाह,तलाक,उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे सिविल मामलों में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है,चाहे उनका धर्म, जाति या समुदाय कुछ भी हो।

सरकार का मकसद ये है कि समान नागरिक संहिता के माध्यम से समाज में सिविल मामलों में भी समानता और न्याय को बढ़ावा मिले। साथ ही यह सुनिश्चित हो कि किसी भी नागरिक के साथ समान कानूनी ढांचे में रहते हुए कोई भेदभाव न हो और पूरी तरह से निष्पक्ष व्यवहार किया जाए।

Uttarakhand UCC: विवाह और लिव-इन संबंधों के मामले में समान नागरिक संहिता

उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने का मतलब होगा कि सभी विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसा करने के साथ ही सभी जोड़ों को अपना नाम, उम्र का साक्ष्य, धर्म और आधार की डिटेल उपलब्ध करवानी पड़ेगी।

इससे अगर इस तरह के संबंधों को लेकर कोई तीसरा पक्ष आपत्ति जताता है तो अधिकारियों को उनसे जुड़े तथ्यों की पड़ताल करने में मदद मिलेगी। लिव-इन जोड़ों को भी विवाह की तरह ही अपने पार्टनरों का नाम, उम्र का साक्ष्य, राष्ट्रीयता, धर्म, पिछले संबंधों की स्थिति और फोन नंबर आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध करवाने पड़ेंगे।

यूसीसी के लिए उत्तराखंड में जो पोर्टल तैयार किया गया है, उसमें लिव-इन संबंधों में दो तरह के रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध होगी। पहले तो यह उन जोड़ों के लिए है, जो उत्तराखंड में रहते हैं। दूसरा, उन लोगों के लिए है, जो भारत में कहीं और के निवासी हैं।

आवेदकों के लिए पंजीकरण के दौरान फोटो और घोषणापत्र भी अपलोड करना जरूरी होगा। इसके साथ ही इन संबंधों से पैदा हुए बच्चों का पंजीकरण भी जरूरी होगा, जो जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने के सात दिनों के भीतर अपलोड करना जरूरी होगा।

Uttarakhand UCC: उत्तराधिकार और वसीयत पर क्या कहता है समान नागरिक संहिता

यूसीसी के तहत वसीयत और उत्तराधिकार के लिए अब घोषणाकर्ता,वारिसों और गवाहों के आधार का विवरण देने की आवश्यकता होगी। गवाहों को उत्तराधिकार घोषणा पढ़ते हुए स्वयं की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अपलोड करनी होगी।

साथ ही कानूनी उत्तराधिकारियों की स्पष्ट घोषणा करनी होगी। उत्तराधिकार को लेकर किसी भी विवाद को संबंधित पोर्टल के माध्यम से भी सुलझाया जा सकेगा।

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