Yogini Ekadashi 2026: मेष-मिथुन समेत इन 4 राशियों पर होगी विष्णु कृपा,जमकर बरसेगा पैसा
Yogini Ekadashi 2026: आज योगिनी एकादशी का पावन वर्त है, भक्तों ने भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा है, काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक एकादशी का दिन नए काम और शुभ काम के लिए उत्तम होता है, अगर आपको कोई पुराना काम लंबे वक्त से अटका हुआ है तो उसे आज श्री हरि का नाम लेकर पूरा करने की कोशिश करें, आपको जरूर सफलता मिलेगी।'
इसी के साथ ही उन्होंने बताया कि 'आज का दिन सभी राशियों के लिए काफी अच्छा रहने वाला है लेकिन चार राशियों के लिए बेहद शुभ है, इन सभी की किस्मत आज से पलटने वाली है और ये चार राशियां हैं-मेष, मिथुन, तुला और धनु। इन राशि वाले लोगों को करियर में तरक्की मिलेगी, लव लाइफ चमकेगी तो वहीं धन लाभ भी होगा।'

मेष, मिथुन, तुला और धनु पर बरसेगी विष्णु कृपा
- मेष: करियर में सफलात, अपनों को मिलेगा साथ, पार्टनर बरसाएगा प्रेम, बिजनेस में हो सकती है बड़ी डील।
- मिथुन: रूठा प्यार वापस आ सकता है, करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेग, धन लाभ के भी आसार।
- तुला: करियर में तरक्की, नए काम की शुरुआत हो सकती है, लव लाइफ भी काफी अच्छी रहने वाली है।
- धनु: रूके काम पूरे होंगे, नौकरी खोज रहे लोगों को सफलता मिलेगी, धन लाभ के आसार, परिवार में रहेगी सुख-शांति।
आरती के बिना अधूरी है Yogini Ekadashi 2026 की पूजा
योगिनी एकादशी की पूजा उनकी आरती के बिना अधूरी है इसलिए दयानंद शास्त्री ने कहा कि आज के दिन पूरे परिवार के सदस्यों के साथ जरूर भगवान विष्णु की आरती करें। जो कोई ऐसा करता है, उसके सारे कष्टों का अंत होता है और सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु की आरती
- ॐ जय जगदीश हरे.
- स्वामी जय जगदीश हरे ।
- भक्त जनों के संकट,
- दास जनों के संकट,
- क्षण में दूर करे ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- जो ध्यावे फल पावे,
- दुःख बिनसे मन का,
- स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
- सुख सम्पति घर आवे,
- सुख सम्पति घर आवे,
- कष्ट मिटे तन का ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- मात पिता तुम मेरे,
- शरण गहूं किसकी,
- स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
- तुम बिन और न दूजा,
- तुम बिन और न दूजा,
- आस करूं मैं जिसकी ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- तुम पूरण परमात्मा,
- तुम अन्तर्यामी,
- स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
- पारब्रह्म परमेश्वर,
- पारब्रह्म परमेश्वर,
- तुम सब के स्वामी ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- तुम करुणा के सागर,
- तुम पालनकर्ता,
- स्वामी तुम पालनकर्ता ।
- मैं मूरख फलकामी,
- मैं सेवक तुम स्वामी,
- कृपा करो भर्ता॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- तुम हो एक अगोचर,
- सबके प्राणपति,
- स्वामी सबके प्राणपति ।
- किस विधि मिलूं दयामय,
- किस विधि मिलूं दयामय,
- तुमको मैं कुमति ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
- ठाकुर तुम मेरे,
- स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
- अपने हाथ उठाओ,
- अपने शरण लगाओ,
- द्वार पड़ा तेरे ॥
- ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
- विषय-विकार मिटाओ,
- पाप हरो देवा,
- स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
- श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
- श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
- सन्तन की सेवा ॥
- ॐ जय जगदीश हरे,
- स्वामी जय जगदीश हरे ।
- भक्त जनों के संकट,
- दास जनों के संकट,
- क्षण में दूर करे ॥














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