Uttarakhand UCC: यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है उत्तराखंड, इससे क्या होगा? समझिए
Uttarakhand Uniform Civil Code: आने वाले जनवरी से उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। संविधान निर्माताओं ने इसकी व्यवस्था संविधान में ही कर रखी है, लेकिन राजनीतिक वजहों से यह अबतक अमल में नहीं आ पा रहा था। इस कानून के लागू होने के साथ ही सच्ची धर्मनिरपेक्षता की भावना से सभी तरह के पर्सनल लॉ में समानता आ जाएगी।

Uttarakhand UCC: संविधान निर्माताओं की सोच को करेगा साकार
अपने राज्य में सही मायने में सामाजिक सौहार्द और समरसता स्थापित करने के मकसद से यह सीएम धामी का बहुत ही साहसिक और ऐतिहासिक कदम है; और उम्मीद की जा सकती है कि देश के अन्य राज्यों में भी आने वाले समय में संविधान निर्माताओं की भावना के प्रति ऐसी ही सच्ची प्रतिबद्धता दिखाने की ललक बढ़ेगी।
Uttarakhand UCC: समान नागरिक संहिता लागू होने से क्या सुधार होगा?
- सभी समुदायों में एक से अधिक शादी पर प्रतिबंध लगेगा।
- गैर-कानूनी तलाक अपराध घोषित होगा। इसमें तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत),खुला और जिहार जैसी प्रथाएं भी शामिल होंगी।
- वैध तरीके से हुए सभी तरह के विवाहों को कानूनी मान्यता मिलेगी।
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Uttarakhand UCC: विवाहों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा
- पति-पत्नियों को अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। ऐसा नहीं करने पर 25,000 रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
- अगर लिव-इन रिलेशन में रह रहे हैं और रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो सजा भी हो सकती है।
- धोखे से की गई शादी या एक से ज्यादा शादी को रोकने के लिए रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड सबके लिए सुलभ है।
Uttarakhand UCC: बच्चों की कस्टडी और अभिभावकों के बारे में क्या प्रावधान है?
- पिता को कानूनी तौर पर अभिभावक (guardians) का दर्जा प्राप्त है। माताओं को संरक्षक (custodians) बनाया गया है।
- पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी आमतौर पर माताओं को देने का प्रावधान है।
- विवाहेत्तर (अमान्य) या लिव-इन संबंधों से पैदा हुए सभी बच्चे वैध माने जाएंगे और उन्हें भी समान रूप से उत्तराधिकार का हक प्राप्त होगा।
Uttarakhand UCC: गोद लेने का क्या प्रावधान है?
हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम (Hindu Adoption and Maintenance Act) और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) गोद लेने की प्रक्रिया तय करेंगे। हालांकि, समान नागरिक संहिता में हिंदू दत्तक ग्रहण के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नहीं बनाया गया है।
Uttarakhand UCC: पर्सनल लॉ और रीति-रिवाजों पर क्या है प्रावधान?
- पुनर्विवाह की शर्त थोपने वाली प्रथाओं को गैर-कानूनी कर दिया गया है। पंचायतों से मिलने वाले तलाक जैसी परंपराओं को अपराध घोषित कर दिया गया है।
- विवाह टूटने की स्थिति में मेहर और भरण-पोषण (maintenance) के प्रावधानों को बरकरार रखा गया है।
Uttarakhand UCC: समान नागरिक संहिता क्यों जरूरी है?
- समान नागरिक संहिता पर्सनल लॉ के मामले में भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव खत्म करने वाला कानून है। इसके लागू होने से हिंदू विवाह कानून, शरियत कानून और ईसाई विवाह कानूनों की वजह से नागरिकों के साथ अब कोई भेदभाव नहीं होगा और यह कानून सबके साथ समान व्यवहार करेगा।
- यूसीसी का लक्ष्य समानता, न्याय है जो कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने वाला कानून है।
Uttarakhand UCC: समान नागरिक संहिता से जुड़ी चुनौतियां क्या हैं?
- यूसीसी के आलोचक इसके उल्लंघन को अपराध की श्रेणी में डालने पर चिंता जता रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। खासकर मुस्लिम समुदाय को लेकर इस तरह की ज्यादा चिंता जताई जा रही है।
- इसी तरह से पिता को ही अभिभावक मानने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और इसे लैंगिक भेदभाव की श्रेणी में रखा जा रहा है।
- इसके अलावा गैर-जातीय विवाहों या अलग-अलग धर्मों में होने वाले विवाहों को लेकर भी अभी लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं बनी हुई हैं।
Uttarakhand UCC: इस साहसिक फैसले को अच्छे से तामील करने के लिए क्या करना होगा?
- उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार की यह जिम्मेदारी होगी कि सभी संप्रदायों के लिए बने इस समान कानून के तामील में किसी तरह का भेदभाव न होने पाए, ताकि कोई भी नागरिक यह महसूस न करे कि उसे पूरा न्याय नहीं मिल पा रहा है।
- सरकार को यह भी संदेश देना होगा कि यह कानून सभी नागरिकों के हित के लिए है और इससे किसी भी संप्रदाय को किसी भी तरह से कोई नुकसान नहीं पहुंचने जा रहा है।
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क्योंकि, अगर उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है तो उसे इसको नजीर बनाकर भी दिखाना होगा, ताकि देश के दूसरे राज्य भी जल्द से जल्द संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित हो सकें।
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