खुद कम पढ़े लिखे, दूसरों को चले नौकरी दिलाने,टेम्पो चालक और कुक बन गए नकल गिरोह के सरगना, जानिए पूरी कहानी

पेपर लीक प्रकरण में केन्द्रपाल और हाकम सिंह मुख्य सरगना

देहरादून, 27 अगस्त। उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण में अब तक एसटीएफ ने कई बड़े खुलासे किए हैं। एसटीएफ की जांच में नकल गिरोह के मुख्य सरगना पकड़े जा चुके हैं। अब तक एसटीएफ की जांच में जिन दो बड़े चेहरों के इस गिरोह में मुख्य भूमिका में होने की बात सामने आई है, उसमें केन्द्रपाल और हाकम सिंह मुख्य सरगना माने जा रहे हैं। जो कि खुद कम पढ़े लिखे हैं लेकिन उत्तराखंड के पढ़े लिखे युवाओं को नौकरी दिलवाने का धंधा चला रहे थे। केन्द्रपाल सिंह टेम्पो चालक जबकि हाकम सिंह ने कुक की नौकरी से काम की शुरूआत की। लेकिन दोनों नकल गिरोह के सरगना बनकर अकूत संपत्ति के मालिक बन गए।

पेपर लीक प्रकरण में धामपुर नकल सेंटर

पेपर लीक प्रकरण में धामपुर नकल सेंटर

एसटीएफ ने यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण में धामपुर नकल सेंटर का खुलासा किया है। जो कि केंद्रपाल और हाकम सिंह ने मिलकर तैयार किया था। एसटीएफ का दावा है कि उत्तर प्रदेश का नकल माफिया का गड़जोड उत्तराखंड के सरकारी नौकरियों के सौदागरों से कनेक्शन था। इसमें हाकम सिंह, चंदन मनराल, जगदीश गोस्वामी और ललित के गहरे संबंध थे। इस सबके बीच की कड़ी केंद्रपाल अपने विभिन्न संपर्क के माध्यम से पेपर लीक करता था। जिसके लिए मोटी रकम लेकर डील की जाती थी।

1996 में टेंपो चलाता था केंद्रपाल

1996 में टेंपो चलाता था केंद्रपाल

केंद्रपाल वर्ष 1996 में टेंपो चलाता था, उसके बाद कुछ वर्षों तक रेडीमेड दुकान पर काम किया और बाद में कपड़ों की सप्लाई का काम किया। केंद्रपाल वर्ष 2011- 2012 में अभियुक्त प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने के गिरोह में जुड़ गया। वर्ष 2012 में अभियुक्त केंद्रपाल की पूर्व में गिरफ्तार अभियुक्त चंदन मनराल से मुलाकात हुई। वर्ष 2011-12 में ही अभियुक्त केंद्र पाल की मुलाकात पूर्व में गिरफ्तार अभियुक्त हाकम सिंह रावत से हुई।

नकल गिरोह के जरिए करोड़ों की संपत्ति अर्जित की

नकल गिरोह के जरिए करोड़ों की संपत्ति अर्जित की

केंद्रपाल ने पेपर लीक और नकल गिरोह के जरिए करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। जिसमें करीब 12 बीघा जमीन धामपुर में और धामपुर में एक आलीशान मकान के अलावा सांकरी में हाकम सिंह के साथ रीजोर्ट में पार्टनरशिप भी है। कुछ ऐसी ही कहानी उत्तरकाशी के हाकम सिंह की है। हाकम नेता, कारोबारी और अभिनेता भी है। लेकिन हाकम की शुरूआत भी एक साधारण कुक से हुई। हाकम सिंह ने उत्तरकाशी के मौरी इलाके से छोटा काम शुरू किया और उत्तरप्रदेश के नकल माफियाओं तक कनेक्शन जोड़ लिए।

हरिद्वार में नकल माफियाओं से जुड़ गया

हरिद्वार में नकल माफियाओं से जुड़ गया

हाकम सिंह की कहानी एक अधिकारी के कुक के साथ शुरू हुई जो कि अधिकारी के लिए खाना बनाने का काम करता था। जानकारी के अनुसार हाकम सिंह उत्तरकाशी के एक प्रशासनिक अधिकारी के घर कुक का काम करने लगा। कुछ दिनों बाद उस अधिकारी का ट्रांसफर हरिद्वार हुआ तो वह हाकम सिंह को भी अपने साथ ले गए। यहां वह अधिकारी का ड्राइवर बन गया। हरिद्वार में हाकम का कुछ लोगों के साथ उठना बैठना हुआ तो वह पेपरलीक के धंधे से जुड़ गया। यहां उसकी मुलाकात यूपी के नकल माफियाओं से हो गई। इसके बाद हाकम ने इस धंधे में घूसने के लिए राजनीति का सहारा लिया।

रिजॉर्ट में हाकम और केन्द्रपाल की पॉर्टनरशिप की बात सामने आई है

रिजॉर्ट में हाकम और केन्द्रपाल की पॉर्टनरशिप की बात सामने आई है

वर्ष 2008 में वह पंचायत की राजनीति में सक्रिय हो गया। वर्ष 2019 के पंचायत चुनाव में वह जिला पंचायत सदस्य बन गया। इस बीच हाकम ने राजनीति में अच्छी पेंठ बना ली। हाकम बड़े बड़े नेताओं और अधिकारियों से मिलकर फोटो खींचवाने लगा। जिसका इस्तेमाल वह अपने धंधे में करने लगा। हाकम सिंह ने मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक के साथ फोटो खिंचवाकर संवाद भी स्थापित कर लिए। इससे हाकम सिंह ने अकूत संपत्ति अर्जित कर सांकरी में आलीशान रिजॉर्ट तैयार करवा लिया। साथ ही विदेश तक कारोबार चलाने के संकेत मिल रहे हैं। जो कि नकल गिरोह में जुड़ने के बाद से ही कारोबार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

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