चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं और जानवरों की मौत पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, कमेटी गठित करने के निर्देश

चारधाम यात्रा:अव्यवस्थाओं और जानवरों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

देहरादून, 9 जून। चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं और जानवरों की मौत पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। नैनीताल हाई कोर्ट ने 600 से अधिक घोड़ों की मौत पर केंद्र और राज्य समेत चारधाम यात्रा के चारों जिलों के डीएम को नोटिस जारी कर दिया हैं। इतना ही नहीं कोर्ट ने 22 जून तक सरकार से जवाब भी मांगा है।

High court expressed displeasure over the chaos and mout of animals in Chardham Yatra, instructions to constitute committee

दो सप्ताह में जबाव दाखिल करने के निर्देश
कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने चारधाम से संबंधित उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग व अन्य जिलाधिकारियों, पशुपालन विभाग और राज्य सरकार से दो सप्ताह में जबाव दाखिल करने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने एक कमेटी भी गठित करने को कहा है। इस मामले में कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने सरकार से पूछा है कि चारधाम यात्रा के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं और क्यों न इस यात्रा के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया जाए। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में डॉक्टरों की कमी को लेकर भी टिप्पणी की है और कहा है कि राष्ट्रीय मानक के अनुसार ना तो जानवरों के डॉक्टर है ना ही इंसानों के।
जनहित याचिका में लगाई गुहार
हाईकोर्ट में समाजसेवी गौरी मौलेखी ने जनहित याचिका दाखिल की। जिसमें उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में अब तक 600 घोड़ों की मौत हो गई, जिससे उस इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बन गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जानवरों और इंसानों की सुरक्षा के साथ उनको चिकित्सा सुविधा दी जाए। इसके अलावा याचिका में कहा है कि चारधाम यात्रा में भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे जानवरों और इंसानों को खाने और रहने की दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में कोर्ट से मांग की गई है कि यात्रा में कैरिंग कैपेसिटी के हिसाब से भेजा जाए। यहां उतने ही लोगों को अनुमति दी जाए, जितने लोगों को खाने-पीने और रहने की सुविधा मिल सके। याचिकाकर्ता समाजसेवी गौरी मौलेखी ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान इस अव्यवस्था पर केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखे, लेकिन राज्य सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। वह कहती हैं कि लोगों को आने-जाने में दिक्कतें हो रही है। इतना ही नहीं खाने-पीने की भी प्रॉब्लम श्रद्धालुओं को होने से लोग परेशान हैं। गौरी मौलेखी ने कहा कि कई सालों से घोड़ों-खच्चरों का प्रयोग यात्रा में हो रहा है, लेकिन कोई नीति नहीं बनी है। सरकार से मांग है कि एक नीति तैयार करें। साथ ही कहा कि बीमार घोड़ों को भी यात्रा में जबरन कई चक्कर लगवाए जा रहे हैं। अगर इनकी मौत हो रही है तो उनको पवित्र नदियों के डाला जा रहा है, जिससे प्रदूषण फैलने का खतरा भी है।
सरकार ने चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया
इधर चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार ने चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. सरोज नैथानी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जो यात्रा मार्गों पर तीर्थयात्रियों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण कर सरकार को सुझाव देगी। सचिव स्वास्थ्य राधिका झा ने आदेश जारी कर दिए हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर अब तक 148 यात्रियों की मौत हो चुकी है। जबकि 17 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार लाने के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है। जिसमें एनएचएम निदेशक डॉ.सरोज नैथानी को अध्यक्ष बनाया गया। उनके अलावा दून मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.अनुराग अग्रवाल, कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ.अमर उपाध्याय, हिमालयन मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.नवीन राजपूत सदस्य होंगे।

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