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Haridwar Kumbh 2021:मुस्लिम संत श्री एम का योगी आदित्यनाथ से क्या है सीधा रिश्ता ? जानिए

हरिद्वार, 16 अप्रैल: हरिद्वार कुंभ में इसबार एक मुस्लिम संत की मौजूदगी हिंदुओं के इस महापर्व की शोभा में चार चांद लगा रहा है। श्री एम के नाम से लोकप्रिय इस साधु के माथे पर यू आकार का चंदन तिलक देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो पैदा तो मुस्लिम परिवार में हुए थे, लेकिन वर्षों से वैष्णव परंपरा में इस कदर सराबोर हो चुके हैं कि उनके मुंह से निकला हर एक आध्यात्मिक शब्द कुंभ आने वाले श्रद्धालुओं की आत्मा पवित्र कर रहा है। इस साधु की एक और खासियत ये है कि इनका यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बहुत ही नजदीक का रिश्ता है और उनके प्रवचनों पर भी उस रिश्ते का असर महसूस किया जा सकता है।

हिंदू शास्त्रों पर अच्छी पकड़ बना चुके हैं श्री एम

हिंदू शास्त्रों पर अच्छी पकड़ बना चुके हैं श्री एम

हरिद्वार कुंभ के बैरागी कैंप क्षेत्र में गेरुआ वस्त्र पहनकर धूनी रमाए बैठे श्री एम यहां पहुंचे उन हजारों संत-महात्माओं की तरह ही हैं, जिनसे यह पवित्र धार्मिक नगरी इस वक्त पूरी तरह से भरी हुई है। वे जिस तरह से वेदों-उपनिषदों और भगवत गीता पर धारा-प्रवाह प्रवचन देते हैं, किसी के लिए यह यकीन करना लगभग नाममुकिन है कि उनका जन्म केरल के एक मुस्लिम परिवार में हुआ है और उनका असल नाम 'मुमताज अली खान' है। कुंभ में उन्होंने अपना खुद का अखाड़ा जमाया है। वहां पर योग धाम तैयार किया है, जहां पर वो हर दिन शास्त्र-पुराणों पर आधारित उपदेश देते हैं, साधुओं की सेवा का कार्य किया जाता है,भजन गाए जाते हैं। चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ वह उपस्थित श्रद्धालुओं से कहते हैं, 'भगवान को कई नामों से जाना जाता है- अल्लाह, क्राइस्ट, कृष्णा और कई सारे नामों से। विभिन्न नामों के बावजूद, भगवान एक और वही है। एकबार जब हमें इसका ज्ञान हो जाता है, हम सबको उसी तरह से देखने लगते हैं।'

पिछले साल ही मिला था पद्म भूषण सम्मान

पिछले साल ही मिला था पद्म भूषण सम्मान

परोपकार और आध्यात्म के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पिछले साल ही पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया था। इनका संगठन सत्संग फाउंडेशन आंध्र प्रदेश के मदनापल्ली में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र चलाता है। तिरुवनंतपुरम के एक प्रतिष्ठित मुस्लिम परिवार में जन्म लेकर उनके संत बनने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। वो अपने बारे में बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही योगियों के जीवन के प्रति बड़ा आकर्षण था। उन्होंने 19 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ दिया था और गुरु की तलाश में हिमालय की ओर निकल पड़े थे। वह ऋषिकेश से बद्रीनाथ के लिए साधु की वेश में पैदल ही निकल पड़े और करीब 300 किलोमीटर की दूरी यूं ही भटकते हुए तय किया और एक दिन वहां से भी आगे की ओर निकल गए।

हिमालय में पूरी हुई गुरु की तलाश

हिमालय में पूरी हुई गुरु की तलाश

आखिरकार कई रोमांचकारी घटनाओं के बाद उन्हें बद्रीनाथ से भी आगे जाकर एक गुफा में हिमालय के एक योगी से मुलाकात हुई, जिनमें उन्हें अपने गुरु की तलाश पूरी हुई। उन्होंने अपनी पुस्तक 'एपरेंटिस्ड टू ए हिमालयन मास्टर' में इसके बारे में विस्तार से बताया है। इसके बाद इन्होंने तीन साल से ज्यादा अपने गुरु के साथ हिमालय की यात्रा की। इस दौरान उनके गुरु ने उन्हें प्राचीन धर्म ग्रंथों की शिक्षा दी। अब वो योगसूत्र, उपनिषदों और वेदांत पर प्रवचन देते हैं। उनके उपदेशों में इन आध्यात्मिक ग्रंथों का ज्ञान तो रहता है ही, साथ ही उसमें वह अनुभव भी शामिल होता है, जो उनके गुरु ने उन्हें सिखाया है।

'नाथ' संप्रदाय में ली है दीक्षा

'नाथ' संप्रदाय में ली है दीक्षा

जहां तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और श्री एम के बीच रिश्ते की बात है तो यह एक आध्यात्मिक रिश्ता है और बहुत ही करीबी है। क्योंकि, ये मुस्लिम साधु ने भी उसी प्राचीन नाथ संप्रदाय में दीक्षा ली है, जिससे योगी आदित्यनाथ जुड़े हुए हैं और आज भी गोरखपुर मठ के महंत हैं। जहां तक कुंभ में उनकी लोकप्रियता की बात है तो कोरोना के डर के बावजूद अबतक भारी तादाद में श्रद्धालु उनके अखाड़े में उनका प्रवचन सुनने के लिए पहुंचते रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि हिंदू श्रद्धालुओं के मन में उनके प्रति इस आस्था की कभी कमी महसूस नहीं की गई है कि उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ है। (ऊपर की तीनों तस्वीरें सौजन्य-श्री एम ट्विटर)

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