OM Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव कैसे आता है, क्या है पूरा नियम?
Removal of Lok Sabha Speaker om birla: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से हो रही है और पहले ही दिन लोकसभा में बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। सदन की कार्यवाही की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा से होने वाली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है, जिसे करीब 118 सांसदों का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन चलाने में निष्पक्षता नहीं बरती और विपक्ष की आवाज दबाई है। वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों वाले NDA खेमे ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह राजनीतिक बताया है और जवाबी रणनीति तैयार की है। संसद के भीतर इस मुद्दे पर करीब 10 घंटे तक बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

आज का सियासी एजेंडा (Parliament Agenda)
बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन दो बड़े घटनाक्रम चर्चा में रह सकते हैं। पहला लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव और दूसरा पश्चिम एशिया के हालात पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान। माना जा रहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संसद का यह चरण भी काफी हंगामेदार रह सकता है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को तीन दिनों के लिए व्हिप जारी किया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने सत्तापक्ष के सांसदों के साथ बैठक कर रणनीति तय की है। वहीं कांग्रेस ने भी अपने नेताओं के साथ बैठक कर विपक्षी लाइन तय की है।
शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने में हिचक दिखाई थी, लेकिन बाद में पार्टी ने साफ किया कि उसके सांसद भी प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। एनसीपी (शरद पवार) का रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, हालांकि माना जा रहा है कि पार्टी विपक्षी लाइन से अलग नहीं जाएगी।
स्पीकर को कैसे हटाया जा सकता है? (Speaker Removal Process)
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया संविधान और संसद के नियमों में स्पष्ट रूप से तय की गई है। विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ जो प्रस्ताव दिया है, वह संविधान के अनुच्छेद 94(c) और लोकसभा के नियमों के तहत लाया गया है।
सबसे पहले किसी सांसद या सांसदों के समूह को लोकसभा महासचिव को लिखित नोटिस देना होता है। यह नोटिस कम से कम 14 दिन पहले दिया जाना अनिवार्य है। इसके बाद प्रस्ताव को सदन की कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
नियमों के अनुसार प्रस्ताव पर चर्चा तभी हो सकती है जब उसे कम से कम 50 सांसदों का समर्थन मिल जाए। कई बार राजनीतिक तौर पर 100 सांसदों का समर्थन होने की बात भी कही जाती है ताकि प्रस्ताव को गंभीरता से लिया जाए।

अनुच्छेद 94(c) क्या कहता है? (Article 94c)
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 94 लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद से जुड़े प्रावधानों को तय करता है।
- इस अनुच्छेद के अनुसार अध्यक्ष को तीन परिस्थितियों में पद छोड़ना पड़ सकता है।
- पहली स्थिति तब होती है जब वह लोकसभा का सदस्य नहीं रह जाता।
- दूसरी स्थिति में वह स्वयं इस्तीफा दे सकता है।
- तीसरी स्थिति में सदन के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित होने पर उसे पद से हटाया जा सकता है।
- इसे तकनीकी भाषा में प्रभावी बहुमत (Effective Majority) कहा जाता है। इसका मतलब है कि उस समय सदन में मौजूद कुल सदस्यों के आधे से ज्यादा समर्थन जरूरी होगा।
प्रस्ताव के दौरान स्पीकर की क्या भूमिका रहती है?
- जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है तो वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 96 से जुड़ा है।
- हालांकि स्पीकर सदन में मौजूद रह सकते हैं, बहस में हिस्सा ले सकते हैं और एक सामान्य सदस्य की तरह पहली बार वोट भी दे सकते हैं। लेकिन अगर वोट बराबर हो जाए तो उन्हें निर्णायक मत देने का अधिकार नहीं होता।
- सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है।
क्या पहले भी ऐसे प्रस्ताव आए हैं?
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव बहुत दुर्लभ माना जाता है। अब तक भारतीय संसदीय इतिहास में यह प्रस्ताव केवल तीन बार लाया गया है।
- पहली बार 1954 में पहले लोकसभा अध्यक्ष जी वी मावलंकर के खिलाफ।
- दूसरी बार 1966 में हुकम सिंह के खिलाफ।
- तीसरी बार 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ।
हालांकि इन तीनों मामलों में प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और आज तक किसी भी लोकसभा अध्यक्ष को इस प्रक्रिया के जरिए पद से नहीं हटाया गया है।
FAQs (Speaker Removal Motion को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. लोकसभा अध्यक्ष को किस अनुच्छेद के तहत हटाया जा सकता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित करके अध्यक्ष को हटाया जा सकता है।
2. स्पीकर हटाने के प्रस्ताव के लिए कितने दिन पहले नोटिस देना पड़ता है?
इस प्रस्ताव के लिए कम से कम 14 दिन पहले लोकसभा महासचिव को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है।
3. प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कितने सांसदों का समर्थन जरूरी है?
लोकसभा नियमों के अनुसार कम से कम 50 सांसदों का समर्थन होना जरूरी है, तभी प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति मिलती है।
4. क्या स्पीकर इस दौरान सदन की अध्यक्षता कर सकते हैं?
नहीं। प्रस्ताव विचाराधीन होने पर स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते, लेकिन बहस में हिस्सा ले सकते हैं और पहली बार वोट दे सकते हैं।
5. क्या कभी लोकसभा अध्यक्ष को इस प्रक्रिया से हटाया गया है?
अब तक भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। तीन बार प्रस्ताव आए, लेकिन सभी असफल रहे।
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