Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार! बाजार खुलते ही सेंसेक्स 2253 अंक टूटा, निफ्टी में भी लगी सेंध
Stock Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन 'ब्लैक मंडे' साबित हुआ है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन, सोमवार (9 मार्च 2026) को बाजार खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मच गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए हैं।
सोमवार, 9 मार्च को सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, स्क्रीन पर लाल निशान ने निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 2253.87 अंक (लगभग 3%) की ऐतिहासिक गिरावट के साथ 76,665.03 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी करीब 700 अंक टूटकर 23,750 के नीचे फिसल गया।
Sensex Down बाजार की स्थिति: एक नजर में
बाजार में बिकवाली इतनी चौतरफा थी कि केवल कुछ ही शेयर हरे निशान में टिक पाए। मार्केट कैप में गिरावट देखी गई। शुरुआती कुछ मिनटों के भीतर ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग 13.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार में अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक 'इंडिया VIX (Volatility Index' 20% से अधिक उछल गया, जो निवेशकों के बीच भारी डर का संकेत है।
Reasons for Market Fall March: मार्केट में गिरावट के 3 बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस 'ब्लडबाथ' के पीछे तीन मुख्य ट्रिगर काम कर रहे हैं-
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध: पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रहा संघर्ष पिछले सप्ताहांत और अधिक हिंसक हो गया है। ईरान पर हुए हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Havens) की ओर भागने पर मजबूर कर दिया है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग: युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, ऐसे में महंगा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा खतरा है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन: वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकालना शुरू कर दिया है। अकेले मार्च महीने में अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली हो चुकी है।
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज अपने सर्वकालिक निचले स्तर 92.30 के पार निकल गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे घरेलू मुद्रा कमजोर हो रही है।
विशेषज्ञों की राय: क्या करें निवेशक?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को फिलहाल 'पैनिक सेलिंग' (घबराहट में शेयर बेचना) से बचने की सलाह दी जा रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार अभी पूरी तरह से भू-राजनीतिक खबरों से संचालित हो रहा है। लंबी अवधि के निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण शेयरों (Quality Stocks) में धीरे-धीरे खरीदारी के अवसर तलाशने चाहिए, लेकिन अभी बड़ी एकमुश्त राशि लगाने से बचना चाहिए।
आज दोपहर 11 बजे और 12 बजे विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में ईरान संकट पर बयान देंगे। बाजार की नजरें सरकार के कूटनीतिक रुख और कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों पर टिकी होंगी। यदि तनाव बढ़ता है, तो निफ्टी 23,500 के स्तर तक भी गिर सकता है।












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